बाजार के महंगे चने भूल जाएं, किचन गार्डन में खुद उगाएं पौष्टिक चना…जानिए पूरी प्रक्रिया
चने ठंडे मौसम की फसल माने जाते हैं, इसलिए इन्हें उगाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी के बीच होता है. इस दौरान तापमान न बहुत ज्यादा गर्म होता है और न ही ज्यादा ठंडा, जिससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है. किचन गार्डन में ऐसी जगह चुनें जहां दिन में कम से कम छह से सात घंटे धूप आती हो.
Chickpea farming: अगर आप रोजमर्रा के खाने में ताजगी, स्वाद और सेहत तीनों चाहते हैं, तो किचन गार्डन में चने उगाना आपके लिए एक बेहतरीन शुरुआत हो सकती है. अक्सर लोग सोचते हैं कि चना सिर्फ खेतों में ही उगाया जा सकता है, लेकिन सच्चाई यह है कि थोड़ी-सी समझदारी और सही देखभाल से आप इसे अपने घर की बालकनी, छत या छोटे से आंगन में भी आसानी से उगा सकते हैं. घर में उगे चने न सिर्फ रसायन-मुक्त होते हैं, बल्कि उनमें स्वाद और पोषण भी बाजार से खरीदे चनों की तुलना में कहीं ज्यादा होता है.
घर में चने उगाने का सही समय और जगह
चने ठंडे मौसम की फसल माने जाते हैं, इसलिए इन्हें उगाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी के बीच होता है. इस दौरान तापमान न बहुत ज्यादा गर्म होता है और न ही ज्यादा ठंडा, जिससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है. किचन गार्डन में ऐसी जगह चुनें जहां दिन में कम से कम छह से सात घंटे धूप आती हो. चने के पौधों को खुली धूप पसंद होती है, क्योंकि यही धूप उन्हें मजबूत और हरा-भरा बनाती है.
बीज की तैयारी से तय होती है फसल की सेहत
अच्छी पैदावार के लिए बीज का चुनाव बहुत जरूरी है. आप देसी चने या काबुली चने, दोनों में से किसी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. बीज बोने से पहले उन्हें 6 से 8 घंटे पानी में भिगो देना चाहिए. इससे बीज नरम हो जाते हैं और अंकुरण जल्दी होता है. कई लोग बीजों को भिगोने के बाद एक गीले कपड़े में लपेटकर रख देते हैं, जिससे उनमें हल्का अंकुर निकल आता है. ऐसे बीज मिट्टी में जल्दी जम जाते हैं.
मिट्टी और गमले की सही तैयारी
चने के लिए हल्की, भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे बेहतर रहती है. इसके लिए आप दो भाग सामान्य मिट्टी, एक भाग गोबर की सड़ी खाद या वर्मीकंपोस्ट और एक भाग बालू मिला सकते हैं. यह मिश्रण जड़ों को सांस लेने में मदद करता है और पौधे को जरूरी पोषक तत्व देता है. अगर आप गमले में चने उगा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि गमला कम से कम 10–12 इंच गहरा हो, ताकि जड़ें आराम से फैल सकें.
बीज बोने का आसान तरीका
तैयार मिट्टी में बीज लगभग 1 से 2 इंच की गहराई पर बोएं. बीजों के बीच थोड़ी दूरी रखें ताकि पौधों को बढ़ने की जगह मिले. बीज डालने के बाद ऊपर से हल्की मिट्टी डालें और पानी का हल्का छिड़काव करें. गमले या क्यारी को तुरंत धूप वाली जगह पर रख दें.
पानी और देखभाल में संतुलन जरूरी
चने के पौधों को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. मिट्टी को हमेशा हल्का नम रखना काफी है. ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं. सर्दियों में हफ्ते में दो से तीन बार पानी देना पर्याप्त रहता है. समय-समय पर पौधों के आसपास की मिट्टी को हल्का सा कुरेद दें, इससे हवा का संचार बेहतर होता है और पौधे तेजी से बढ़ते हैं.
पौधे की बढ़वार और फूल आने का समय
लगभग 25 से 30 दिनों में पौधे अच्छे से बढ़ने लगते हैं और कुछ ही समय बाद उनमें फूल आने शुरू हो जाते हैं. फूल झड़ने के बाद छोटी-छोटी फलियां दिखने लगती हैं, जिनमें चने विकसित होते हैं. इस समय पौधे को हल्की जैविक खाद देने से दाने अच्छे बनते हैं.
कटाई और उपयोग का सही तरीका
करीब 90 से 100 दिनों में चने की फलियां सूखने लगती हैं. जब पौधा पीला पड़ने लगे और फलियां सूख जाएं, तब उन्हें तोड़ लिया जाता है. सूखी फलियों से चने निकालकर धूप में अच्छी तरह सुखा लें. इन चनों का इस्तेमाल आप दाल, सब्जी, भुने चने या अंकुरित चने के रूप में कर सकते हैं.
किचन गार्डन में चने उगाने के फायदे
घर में उगे चने पूरी तरह प्राकृतिक और रसायन-मुक्त होते हैं. इससे परिवार को शुद्ध और पौष्टिक भोजन मिलता है. साथ ही बाजार पर निर्भरता कम होती है और खर्च भी बचता है. किचन गार्डन में चने उगाना बच्चों को खेती और प्रकृति से जोड़ने का भी एक अच्छा तरीका है.
अगर आप थोड़ी-सी मेहनत और नियमित देखभाल कर लें, तो किचन गार्डन में उगे चने न सिर्फ आपकी थाली को स्वादिष्ट बनाएंगे, बल्कि आपको आत्मसंतोष और सेहत दोनों का फायदा भी देंगे.