क्या आप जानते हैं कि रसोई के कचरे यानि की केले के छिलके और सब्जियों के बचे हुए हिस्सों से भी पौधों के लिए बेहतरीन खाद बनाई जा सकती है? वर्मीकंपोस्टिंग एक ऐसी विधि है जिसमें खास तरह के केंचुए जैविक कचरे को तोड़कर एक बेहद पोषक खाद में बदल देते हैं, जिसे वर्मीकंपोस्ट या वर्मकास्टिंग भी कहते हैं. कंपोस्टिंग न सिर्फ आपके पौधों को स्वस्थ बनती है, बल्कि कचरे को भी लैंडफिल में जाने से रोकती है.
वर्मीकंपोस्टिंग एक सरल और प्रभावी तरीका है, जिससे हम घर के कचरे को कम कर सकते हैं और मिट्टी को उपजाऊ बना सकते हैं. तो आप भी यदि वर्मीकंपोस्टिंग करना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है. इस खबर में हम आपको वर्मीकंपोस्टिंग की विधि और फायदें बता रहे हैं.
कैसे तैयार होती है वर्मीकंपोस्ट
डिब्बा चुनें- ऐसा कंटेनर लें जिसमें हवा और पानी निकलने के लिए छेद हों. इस डिब्बे को आप घर के अंदर या छायादार बाहरी जगह पर रख सकते हैं. आपको बता दें कि डिब्बे का तापमान 13डिग्री सेलसियस से 15डिग्री सेलसियस होना चाहिए.
बिछावन तैयार करें- डिब्बा चुनने के बाद जो सबसे महत्वपूर्ण काम है वो बिछावन तैयार करना है. बिछावन के लिए हम पुराना अखबार, नारियल का रेशा या सूखे पत्ते को पानी में हल्का भींगोकर इस्तेमाल करते हैं. इसे उतना ही भीगोया जाता है जितने में इसकी नमी बरकरार रहे.
केंचुए जोड़ें- 500-1000 रेड विग्लर केंचुए डालें. ये केंचुए आम बाग के केंचुओं से अलग होते हैं. इन्हें ऑनलाइन या स्थानीय सप्लायर की मदद से आसानी से मंगाया जा सकता है.
खाना डालें- किचन कचरे जैसे कटे हुए फल-सब्जी के छिलके, चाय की पत्ती, केले के छिलके, अंडों के छिलके आदि डालें. कीटों से बचाने के लिए नीम के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है. हर बार खाना डालते वक्त बिछावन को 2-3 इंच नीचे दबा दें.
देखरेख करें- बिछावन की देखरेख बराबर करते रहें. समय-समय पर देखते रहें कि बिछावन ज्यादा गीला ना हुआ हो साथ ही साथ इसमें नमी की मात्रा को भी चेक करते रहें.
वर्मी तैयार- खाद को तैयार होने में लगभग 3 से 6 महीने का समय लगता है. 3-6 महीने में बिछावन काली मिट्टी जैसे दानों में बदल जाती है. तब आप आधा खाद निकालें और दूसरी तरफ नया खाना रखें. केंचुए धीरे-धीरे उधर चले जाएंगे.
खाद का उपयोग कैसे करें?
- बगीचों में- 10-20 परसेंट वर्मीकास्ट मिट्टी में मिलाएं( 2-4 कप प्रति वर्ग फुट).
- गमलों के लिए- 1 हिस्सा खाद को 4-5 हिस्सा पॉटिंग मिट्टी मिलाएं. हर 1-2 महीने में ऊपर से आधा इंच डालें.
- लॉन के लिए- एक चौथाई इंच की पतली परत फैलाएं. 10-20 पाउंड प्रति 100 वर्ग फीट.
क्या करें, क्या न करें-
- ज्यादा खाना ना डालें, बिछावन सूखा रखें व नमीदार रखें ताकि वर्मी को दुर्गंध से बचाया जा सके.
- यदि केंचुए मर रहें हो तो इस स्थिति में तापमान और नमी संतुलित करें या फिर अंडे के छिलके ड़ालें.
- केंचुए अगर भागने का प्रयास कर रहें हों तो नमी, तापमान और पीएच चेक करें और जरुरत अनुसार सुधार करें.
वर्मीकंपोस्टिंग के फायदे-
पर्यावरण के लिए लाभदायक- वर्मीकंपोस्टिंग से लैंडफिल्स में जाने वाले जैविक कचरा कम होता है, जिससे मीथेन गैस का उत्सर्जन घटता है. इपीए के अनुसार, लैंडफिल में पैदा होने वाली मीथेन का 58 परसेंट हिस्सा सिर्फ भोजन के बर्बाद होने से होता है.
मिट्टी को मिलता है काला सोना- वर्मीकंपोस्ट में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व होते हैं जो सीधे पौधों को मिलते हैं. इसके अलावा इसमें मौजूद हार्मोन बीज अंकुरण और फूल आने में मदद करते हैं.
मिट्टी की सेहत में सुधार- यह खाद मिट्टी की हवा और पानी को सोखने की क्षमता बढ़ाती है और बीमीरियां से बचाने वाले लाभकारी बैक्टेरिया और फंगस को जन्म देती है.
प्राकृतिक तरल खाद वर्मी टी- केंचुआ खाद से निकला तरल ( डायल्यूट करके इस्तेमाल करें) पौधों के लिए उत्तम तरल खाद का काम करता है.
गंध रहित और जगह की बचत- सही तरीके से किया गया वर्मीकंपोस्टिंग दुर्गंध नहीं करता. आप इसे बालकनी, रसोई के नीचे, गैरेज या यहां तक कि अलमारी में भी कर सकते हैं.