प्याज-लहसुन की फसल पर कीट-रोगों का हमला! समय रहते अपनाएं बचाव के ये उपाय, नहीं तो पूरी फसल होगी बर्बाद
Onion-Garlic Farming: किसान ध्यान दें! क्या आप जानते हैं कि आपकी मेहनत से उगाई प्याज और लहसुन की फसल आपके लिए ‘छोटा एटीएम’ साबित हो सकती है? लेकिन सही समय पर कीट और रोगों का प्रबंधन न किया गया तो आपकी मेहनत पर पानी फिर सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कुछ आसान और असरदार तरीके, जिनसे आप अपनी फसल को सुरक्षित रखकर अधिक उत्पादन और बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.
कीटनाशक का समय पर छिड़काव: प्याज और लहसुन में कीट दिखाई देने पर या रोपाई के 30 दिन बाद कीटनाशक का छिड़काव शुरू करें. कीट की तीव्रता के अनुसार 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करना फसल की सुरक्षा के लिए जरूरी है. छिड़काव में चिपकने वाले पदार्थ का उपयोग करना फसल पर दवा को अधिक असरदार बनाता है.
चूसक कीट (थ्रिप्स टेबेसाई): ये कीट पत्तियों से रस चूसकर पत्तियों में सफेद धब्बे और सिकुड़न पैदा करते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और कंद छोटे रहते हैं. रोपाई से पहले जड़ों का 2 घंटे तक कार्बोज्डाइम के घोल से उपचार और संक्रमण के समय नीम आधारित कीटनाशक का छिड़काव करना फसल बचाने में मदद करता है.
प्याज की मक्खी (मैगट): मैगट पौधों के आधारीय तने और जमीन के पास के हिस्से में अंडे देती है, जिससे पौधा सूख सकता है. इसके नियंत्रण के लिए नीम की खली या क्लोरोपाइरिफम 5% का इस्तेमाल खेत की तैयारी में करना और संक्रमण के समय क्यूनालफस का छिड़काव करना आवश्यक है.
कटवा (भूमिगत कीट): कटवा पौधों की जड़ों और भूमिगत भाग को काटकर पौधों को कमजोर और पीला कर देता है. इससे बचाव के लिए फसल चक्र अपनाएं, आलू के बाद प्याज की फसल न लगाएं और रोपाई के पाद थीमेट का उपयोग करें.
शीर्ष छेदक (हेलिओथिस आर्मिजेरा): इसका लार्वा पत्तियों को काटकर फसल को नुकसान पहुंचाता है, खासकर बीज वाली फसल में. इसके नियंत्रण के लिए मिथाइल डैमेटोन या साइपरमेथ्रिन 0.5-1 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. घोल में 0.1% चिपचिपा पदार्थ (जैसे ट्राइटोन या सैन्डोविट) डालना जरूरी है.
कीटनाशकों का संतुलित प्रयोग: एक ही वर्ग के कीटनाशकों का बार-बार इस्तेमाल न करें. इससे कीटों में प्रतिरोधक क्षमता नहीं बढ़ती और फसल को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. हमेशा जरूरत के अनुसार और सही समय पर ही छिड़काव करें.