किसानों को राहत! सरकार ने शुरू की ‘कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना’.. 50 फीसदी ब्याज होगा माफ

हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्ज के बोझ से दबे किसानों को राहत देने के लिए कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना शुरू की है. इसके तहत 3 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर बकाया ब्याज का 50 फीसदी हिस्सा सरकार वहन करेगी. 50 करोड़ रुपये की इस योजना से 6,356 किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है.

नोएडा | Published: 28 Jun, 2026 | 07:58 AM

आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को बड़ी राहत देते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना (Agriculture Loan Interest Subvention Scheme) शुरू करने का फैसला किया है. यह योजना राज्य सरकार के बजट में की गई एक महत्वपूर्ण घोषणा को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम है. इस योजना का उद्देश्य उन किसानों की मदद करना है, जिनकी कृषि भूमि कर्ज नहीं चुका पाने के कारण नीलाम होने के खतरे में है. सरकार की इस किसान हितैषी पहल के तहत प्रत्येक किसान के 3 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर बकाया ब्याज का 50 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी.

सरकार के अनुसार, इस योजना से प्रदेश के करीब 6,356 किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है. इसके लिए राज्य सरकार ने 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. सरकार का मानना है कि इस योजना से कर्ज के बोझ से दबे किसानों को राहत  मिलेगी और उनकी जमीन को नीलामी से बचाने में मदद मिलेगी. राज्य सरकार की यह योजना हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक और कांगड़ा सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के माध्यम से लागू की जाएगी.

योग्य ऋणधारकों की सूची तैयार होगाी

खास बात यह है कि योजना का लाभ देने के लिए दोनों बैंकों की शाखाएं पात्र किसानों की पहचान करेंगी और योग्य ऋणधारकों की सूची तैयार करेंगी. इसके बाद चयनित किसानों को कृषि ऋण पर ब्याज अनुदान  का लाभ दिया जाएगा, जिससे कर्ज का बोझ कम होगा और उनकी कृषि भूमि को नीलामी से बचाने में मदद मिलेगी.

किसान राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि किसान राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनका कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण कई किसान आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पात्र किसानों को एकमुश्त राहत देने का फैसला किया है.

किसानों की आजीविका को सुरक्षित करना है

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य कर्ज के बोझ से दबे किसानों को राहत पहुंचाना और उनकी आजीविका को सुरक्षित करना है. यह योजना उन किसानों के लिए लागू होगी, जिनके कृषि ऋण की किस्तें बकाया हैं और जिनकी जमीन कर्ज नहीं चुकाने के कारण नीलामी के खतरे में है. सरकार किसानों पर पड़े ब्याज के बकाया बोझ का 50 फीसदी हिस्सा वहन करेगी.

किसानों के लिए अपने ऋण को नियमित करना आसान होगा

सरकार का मानना है कि इससे किसानों के लिए अपने ऋण को नियमित करना आसान होगा, आर्थिक दबाव कम होगा और वे अपनी जमीन खोने के डर के बिना खेती का काम जारी रख सकेंगे. मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों और वित्तीय संस्थानों को योजना को जल्द से जल्द लागू करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पात्र किसानों को समय पर सहायता मिले, ताकि उन्हें राहत पहुंचाने में किसी तरह की देरी न हो.

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