मक्का किसानों के लिए एडवाइजरी, फॉल आर्मीवॉर्म से बचाव के लिए किसान तुरंत करें ये काम

हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर ने मक्का किसानों को फॉल आर्मीवॉर्म कीट से सतर्क रहने की सलाह दी है. किसानों से खेतों की नियमित निगरानी, समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाने और जरूरत पड़ने पर ही कीटनाशकों का इस्तेमाल करने को कहा गया है. समय पर पहचान और नियंत्रण से फसल का नुकसान कम किया जा सकता है.

Kisan India
नोएडा | Published: 18 Jul, 2026 | 04:56 PM

Maize Farming: हिमाचल प्रदेश के मक्का किसानों के लिए जरूरी खबर है. हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर ने फॉल आर्मीवॉर्म (Fall Armyworm) कीट को लेकर एडवाइजरी जारी की है. विश्वविद्यालय ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और समय रहते इस कीट पर नियंत्रण करने की सलाह दी है, क्योंकि लापरवाही बरतने पर मक्का की फसल को भारी नुकसान हो सकता है.

विश्वविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. सुरजीत कुमार ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा है कि यदि समय रहते इस कीट पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह मक्का की फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. उन्होंने किसानों से नियमित रूप से खेतों की निगरानी करने को कहा है. उनके अनुसार, फॉल आर्मीवॉर्म के हमले की पहचान कुछ आसान संकेतों से की जा सकती है. अगर मक्का की कोमल पत्तियों पर खिड़की जैसी पारदर्शी परत दिखाई दे, तो यह कीट के हमले का संकेत हो सकता है. साथ ही पत्तियों में अनियमित छेद भी इसके प्रकोप की निशानी हैं. उन्होंने कहा कि इसके अलावा मक्का के पौधे के बीच वाले हिस्से में इल्ली या उसकी बीट दिखाई दे, तो किसान तुरंत सतर्क हो जाएं और जरूरी उपाय करें. समय पर पहचान करने से फसल का नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है.

सिर्फ रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भर न रहें किसान

विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे सिर्फ रासायनिक कीटनाशकों  पर निर्भर न रहें, बल्कि समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाएं. इसके तहत खेतों की नियमित निगरानी करें, कीट के अंडों और इल्ली को नष्ट करें, खेत की साफ-सफाई बनाए रखें. साथ ही लाभकारी कीटों का संरक्षण करें और फॉल आर्मीवॉर्म की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाएं. इससे कीट पर समय रहते नियंत्रण किया जा सकेगा और फसल का नुकसान कम होगा.

कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करने की सलाह

विश्वविद्यालय ने किसानों को बिना जरूरत कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करने की सलाह दी है. विशेषज्ञों के अनुसार, कीटनाशकों का इस्तेमाल तभी करें जब फॉल आर्मीवॉर्म का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर (ETL) से ऊपर पहुंच जाए या फसल के 10 प्रतिशत से अधिक हिस्से को नुकसान होने लगे. इससे अनावश्यक खर्च कम होगा और फसल के साथ-साथ पर्यावरण की भी सुरक्षा होगी.

विश्वविद्यालय ने सलाह दी है कि यदि फॉल आर्मीवॉर्म  का प्रकोप आर्थिक नुकसान की सीमा से ऊपर पहुंच जाए, तो किसान इमामेक्टिन बेंजोएट 5 SG की 0.4 ग्राम या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 SC की 0.4 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. छिड़काव करते समय दवा मक्का के पौधे के बीच वाले हिस्से (व्हॉर्ल) तक अच्छी तरह पहुंचनी चाहिए. साथ ही दवाओं का इस्तेमाल हमेशा तय मात्रा और सुरक्षा नियमों के अनुसार ही करें.

फसल का नुकसान होगा कम

कीट विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. सुरजीत कुमार ने किसानों से कहा कि फॉल आर्मीवॉर्म के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विश्वविद्यालय या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क करें. उन्होंने कहा कि समय पर निगरानी, शुरुआती नियंत्रण और समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाने से फसल का नुकसान कम होगा, रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता घटेगी और मक्का का उत्पादन बेहतर बना रहेगा.

कीट की पहचान और नियंत्रण जरूरी

यह एडवाइजरी खरीफ सीजन के ऐसे समय में जारी की गई है, जब मक्का की फसल संवेदनशील अवस्था में है. ऐसे में समय रहते कीट की पहचान और नियंत्रण करने से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और अच्छी पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है.

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