मौसम की मार से किसानों की बढ़ी चिंता, भारत में 4 फीसदी घट सकता है कॉफी उत्पादन
कॉफी उत्पादक राज्यों में इस बार तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया है. लगातार बढ़ रही गर्मी के कारण मिट्टी में नमी कम होती जा रही है. इससे पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा और सिंचाई की जरूरत भी बढ़ गई है. दरअसल, लंबे समय तक गर्मी रहने से अरेबिका पौधों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है.
coffee production: भारत में इस बार कॉफी किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है. बदलते मौसम, तेज गर्मी और कम बारिश का असर अब कॉफी की फसलों पर साफ दिखाई देने लगा है. अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2026-27 में देश का कॉफी उत्पादन करीब 4 प्रतिशत तक कम हो सकता है. खासतौर पर अरेबिका कॉफी उगाने वाले किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ सकता है.
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की मुंबई इकाई की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले कॉफी सीजन में भारत का कुल उत्पादन करीब 61.4 लाख बैग रहने का अनुमान है. एक बैग में 60 किलो कॉफी होती है. यानी कुल उत्पादन लगभग 3.68 लाख टन तक रह सकता है. पिछले सीजन में यह आंकड़ा करीब 64 लाख बैग यानी 3.84 लाख टन था. ऐसे में इस बार उत्पादन में गिरावट की आशंका ने किसानों और कॉफी उद्योग दोनों की चिंता बढ़ा दी है.
अरेबिका कॉफी पर सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट के अनुसार, इस बार सबसे ज्यादा असर अरेबिका कॉफी की फसल पर पड़ सकता है. अनुमान है कि अरेबिका उत्पादन घटकर 15.6 लाख बैग तक रह जाएगा, जबकि पिछले साल यह करीब 17.3 लाख बैग था.
दरअसल अरेबिका कॉफी बहुत संवेदनशील फसल मानी जाती है. इसे सही समय पर बारिश, ठंडा मौसम और पर्याप्त नमी की जरूरत होती है. लेकिन इस बार मौसम ने किसानों का साथ नहीं दिया. कई इलाकों में मानसून सामान्य से कमजोर रहा और गर्मी लगातार बढ़ती गई. इसका असर पौधों में फूल आने और फलों के बनने की प्रक्रिया पर पड़ा है.
मार्च और अप्रैल में शुरुआती बारिश से किसानों को थोड़ी राहत जरूर मिली थी, लेकिन उसके बाद पड़ रही तेज गर्मी ने हालात बिगाड़ दिए. हल्की और अनियमित बारिश फसलों के लिए काफी नहीं मानी जा रही है. इससे खेतों में नमी तेजी से कम हुई और पौधों पर दबाव बढ़ गया.
रोबस्टा कॉफी से अब भी उम्मीद
रोबस्टा कॉफी की स्थिति अरेबिका के मुकाबले थोड़ी बेहतर मानी जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, रोबस्टा उत्पादन लगभग 45.8 लाख बैग रहने का अनुमान है. भारत में कुल कॉफी उत्पादन का 75 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा रोबस्टा कॉफी का ही होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि रोबस्टा फसल मौसम के उतार-चढ़ाव को ज्यादा बेहतर तरीके से सहन कर लेती है. पिछले दो सालों में कई इलाकों में जरूरत से ज्यादा बारिश हुई थी, जिससे फंगल बीमारी बढ़ गई थी. इस बार कम बारिश होने से रोबस्टा फसल को कुछ हद तक फायदा मिल सकता है.
बढ़ती गर्मी बनी बड़ी परेशानी
कॉफी उत्पादक राज्यों में इस बार तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया है. लगातार बढ़ रही गर्मी के कारण मिट्टी में नमी कम होती जा रही है. इससे पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा और सिंचाई की जरूरत भी बढ़ गई है. दरअसल, लंबे समय तक गर्मी रहने से अरेबिका पौधों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है. इससे फूल झड़ने लगते हैं और फलों का विकास धीमा पड़ जाता है. किसानों को अब ज्यादा पानी और देखभाल करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत भी बढ़ रही है.
मौसम की अनिश्चितता ने बढ़ाई टेंशन
पिछले कुछ वर्षों में मौसम का मिजाज तेजी से बदला है. कभी ज्यादा बारिश तो कभी लंबे सूखे जैसे हालात किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं. अनियमित बारिश और हीटवेव की वजह से फसल का सही अनुमान लगाना भी मुश्किल हो गया है.
कॉफी किसान अब आने वाले मानसून पर उम्मीद लगाए बैठे हैं. अगर समय पर अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन में और गिरावट आ सकती है. इससे कॉफी उद्योग और किसानों दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है.
नई तकनीक और बेहतर जल प्रबंधन की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, अब खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ नई तकनीकों को अपनाना जरूरी हो गया है. बेहतर जल प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई और मौसम के अनुसार खेती की योजना बनाकर ही भविष्य में नुकसान कम किया जा सकता है. फिलहाल कॉफी बोर्ड की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन शुरुआती संकेत किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं. अगर मौसम का यही हाल रहा तो आने वाले वर्षों में भारत की कॉफी उत्पादन क्षमता पर बड़ा असर पड़ सकता है.