जनवरी की बेमौसम बारिश से रोबस्टा कॉफी को भारी नुकसान, 2026-27 पैदावार घटने की आशंका

इस बेमौसम बारिश का एक और गंभीर असर यह हुआ कि कॉफी के पौधों में समय से पहले फूल आ गए. आमतौर पर रोबस्टा कॉफी में फूल फरवरी-मार्च में सही समय पर पड़ने वाली बारिश के बाद आते हैं. लेकिन जनवरी में ही फूल आने से उनका विकास असमान हो गया है. किसानों का कहना है कि जब फूल एकसाथ और सही समय पर नहीं आते, तो आगे चलकर फल भी बराबर नहीं बनते.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 31 Jan, 2026 | 09:28 AM

Robusta coffee harvest: जनवरी का महीना आमतौर पर कॉफी किसानों के लिए कटाई और सुखाने का समय माना जाता है, लेकिन इस बार मौसम ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया. कर्नाटक के प्रमुख कॉफी उत्पादक इलाकों में जनवरी में हुई बेमौसम बारिश ने रोबस्टा कॉफी की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है. किसान जहां पहले से ही मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत से परेशान थे, वहीं अचानक हुई बारिश ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. खेतों में खड़ी फसल, अधपकी चेरी और समय से पहले आए फूल सब कुछ किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है.

कटाई के बीच बारिश ने बिगाड़ा पूरा गणित

कर्नाटक के कोडागु, चिक्कमगलुरु और हसन जैसे जिलों में जनवरी के मध्य से लगातार बारिश देखने को मिली. यह वही समय होता है जब रोबस्टा कॉफी की कटाई जोरों पर रहती है. बारिश के कारण कटाई का काम रुक-रुक कर हुआ, जिससे चेरी को सही तरीके से सुखाने में दिक्कत आई. कई जगहों पर नमी बढ़ने से कॉफी चेरी पेड़ों पर ही खराब होने लगी. इससे सीधे तौर पर किसानों की आमदनी पर असर पड़ा है.

समय से पहले फूल, भविष्य की फसल पर खतरा

इस बेमौसम बारिश का एक और गंभीर असर यह हुआ कि कॉफी के पौधों में समय से पहले फूल आ गए. आमतौर पर रोबस्टा कॉफी में फूल फरवरी-मार्च में सही समय पर पड़ने वाली बारिश के बाद आते हैं. लेकिन जनवरी में ही फूल आने से उनका विकास असमान हो गया है. किसानों का कहना है कि जब फूल एकसाथ और सही समय पर नहीं आते, तो आगे चलकर फल भी बराबर नहीं बनते. इसका असर सीधे 2026-27 की फसल पर पड़ सकता है.

मजदूरों की कमी ने बढ़ाई परेशानी

बारिश के साथ-साथ मजदूरों की कमी भी किसानों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है. कई इलाकों में मजदूर समय पर नहीं मिल पा रहे, जिससे कटाई और सुखाने का काम और ज्यादा देर से हो रहा है. बारिश के कारण जब काम रुकता है और मजदूर लौट जाते हैं, तो दोबारा उन्हें बुलाना भी मुश्किल हो जाता है. इससे लागत बढ़ती है और फसल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है.

बारिश की मार

मौसम विभाग के मुताबिक, इस जनवरी में सामान्य से कई गुना ज्यादा बारिश दर्ज की गई. चिक्कमगलुरु में जहां आमतौर पर जनवरी में बहुत कम बारिश होती है, वहां इस बार कई सौ प्रतिशत ज्यादा वर्षा रिकॉर्ड की गई. कोडागु और वायनाड जैसे इलाकों में भी सामान्य से अधिक बारिश हुई. यह बारिश भले ही मात्रा में ज्यादा न लगे, लेकिन समय गलत होने की वजह से इसका असर कहीं ज्यादा नुकसानदायक साबित हुआ.

रोबस्टा को चाहिए था आराम, मिला झटका

कॉफी विशेषज्ञों के अनुसार, रोबस्टा पौधों को कटाई के बाद एक आराम का समय चाहिए होता है, ताकि वे अगली फसल के लिए खुद को तैयार कर सकें. इस दौरान पौधों में हल्का तनाव जरूरी होता है, जिससे सही समय पर फूल आ सकें. लेकिन जनवरी की बारिश ने यह प्राकृतिक प्रक्रिया बिगाड़ दी. पौधों को बिना आराम मिले ही फूल आ गए, जिससे आगे चलकर फल गिरने और पैदावार घटने की आशंका बढ़ गई है.

छोटे किसानों पर ज्यादा असर

इस बेमौसम बारिश का सबसे ज्यादा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ा है. बड़े बागानों में किसी तरह प्रबंधन किया जा सकता है, लेकिन छोटे किसान सीमित संसाधनों के कारण ज्यादा नुकसान झेल रहे हैं. कई किसानों का अनुमान है कि इस साल की रोबस्टा फसल का 10 से 20 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है, जबकि अगले साल की फसल में यह नुकसान और भी ज्यादा हो सकता है.

कॉफी बोर्ड और अन्य संस्थाएं हालात का आकलन कर रही हैं और आने वाले महीनों में नुकसान का विस्तृत आंकलन सामने आ सकता है. लेकिन फिलहाल किसानों के लिए यह समय बेहद कठिन है. मौसम की अनिश्चितता, मजदूरों की कमी और लागत में बढ़ोतरी—इन सबके बीच कॉफी उगाना अब पहले जितना आसान नहीं रहा.

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