अप्रैल में बढ़ेगा देश में यूरिया उत्पादन, LNG सप्लाई सुधरने से किसानों को समय पर मिल सकती है खाद

जून से खरीफ सीजन शुरू होता है, जब किसानों को सबसे ज्यादा यूरिया की जरूरत होती है. ऐसे में अप्रैल में उत्पादन बढ़ना और आयात आना किसानों के लिए राहत की बात है. अगर यही स्थिति बनी रही, तो इस बार किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

नई दिल्ली | Updated On: 16 Apr, 2026 | 09:21 AM

Urea production April 2026: अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में तनाव के कारण देश में यूरिया की कमी की खबरों ने किसानों को काफी हद तक परेशान कर दिया था. लेकिन अब एक अच्छी खबर सामने आई है. अप्रैल 2026 में यूरिया उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे आने वाले खरीफ सीजन में किसानों को राहत मिल सकती है. अनुमान है कि इस महीने देश में करीब 20 लाख टन यूरिया का उत्पादन होगा, जो मार्च के मुकाबले लगभग 11 फीसदी ज्यादा है. मार्च में उत्पादन गिरकर करीब 18 लाख टन रह गया था.

क्यों बढ़ रहा है उत्पादन

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार,  मार्च महीने में यूरिया उत्पादन इसलिए कम हो गया था क्योंकि कई प्लांट गैस की कमी के कारण समय से पहले बंद करने पड़े थे. दरअसल, यूरिया बनाने के लिए प्राकृतिक गैस यानी LNG बहुत जरूरी होती है. जब इसकी सप्लाई कम हो जाती है, तो उत्पादन भी प्रभावित होता है.

लेकिन अप्रैल में स्थिति बेहतर हुई है. 6 अप्रैल के बाद यूरिया प्लांट्स को गैस की सप्लाई बढ़कर लगभग 90 फीसदी तक पहुंच गई है, जो पहले करीब 60 फीसदी थी. इससे फैक्ट्रियां फिर से सामान्य तरीके से काम करने लगी हैं.

महंगी गैस के बावजूद सरकार की कोशिश

हालांकि गैस की सप्लाई बढ़ी है, लेकिन इसकी कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं. पहले LNG की कीमत 10-12 डॉलर प्रति यूनिट थी, जो अब बढ़कर 19-21 डॉलर तक पहुंच गई है. यानी सरकार और कंपनियों को ज्यादा कीमत देकर गैस खरीदनी पड़ रही है. इसके बावजूद भारत ने तीन बार स्पॉट मार्केट से गैस खरीदी, ताकि उत्पादन पर असर न पड़े और किसानों को समय पर यूरिया मिल सके.

आयात से भी बढ़ेगी सप्लाई

घरेलू उत्पादन के अलावा आयात भी इस बार अहम भूमिका निभाएगा. अप्रैल में करीब 6 लाख टन यूरिया विदेश से आने की उम्मीद है. इससे कुल उपलब्धता और बढ़ेगी.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक देश है और हर साल बड़ी मात्रा में यूरिया बाहर से खरीदता है. इस बार भी 2.5 मिलियन टन यूरिया खरीदने के लिए टेंडर जारी किया गया था, जिसके बदले 5.6 मिलियन टन तक की सप्लाई के ऑफर आए हैं.

कीमतों में भारी उछाल

हालांकि सप्लाई बढ़ाने की कोशिश हो रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. हाल के टेंडर में यूरिया की कीमत करीब 1000 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है, जो कुछ महीने पहले के मुकाबले लगभग दोगुनी है. इसका कारण पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई है.

स्टॉक की स्थिति पहले से बेहतर

इस बीच देश में उर्वरकों का स्टॉक भी संतोषजनक स्थिति में है. 15 अप्रैल तक कुल उर्वरक भंडार 18.4 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है. इससे उम्मीद है कि किसानों को समय पर खाद मिलती रहेगी और खेती प्रभावित नहीं होगी.

खरीफ सीजन से पहले राहत

जून से खरीफ सीजन शुरू होता है, जब किसानों को सबसे ज्यादा यूरिया की जरूरत होती है. ऐसे में अप्रैल में उत्पादन बढ़ना और आयात आना किसानों के लिए राहत की बात है. अगर यही स्थिति बनी रही, तो इस बार किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

Published: 16 Apr, 2026 | 09:40 AM

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