सिंचाई संकट से तमिलनाडु में टमाटर खेती घटी, 700 हेक्टेयर पर सिमटा रकबा.. भाव 32 रुपये किलो

तमिलनाडु के धर्मपुरी में पानी की कमी से टमाटर की खेती का रकबा घटकर 700 हेक्टेयर रह गया है. पालाकोड मंडी में आवक घटने से टमाटर के भाव 32 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं. किसानों के मुताबिक, पर्याप्त पानी नहीं मिलने से खेती प्रभावित हुई है. बागवानी विभाग को उत्तर-पूर्वी मॉनसून जल्दी आने की उम्मीद है, जिससे स्थिति सुधर सकती है.

नोएडा | Updated On: 11 Sep, 2026 | 11:44 AM

तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में पानी की कमी के चलते टमाटर की खेती का रकबा घट गया है. अल नीनो के असर से पानी की कमी बढ़ने के कारण किसानों ने टमाटर की खेती कम कर दी है. इसका असर अब कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है. पलाकोड की मंडियों में टमाटर का भाव बढ़कर 32 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है. अधिकारियों के मुताबिक, पूरे जिले में टमाटर की खेती घटकर करीब 700 हेक्टेयर रह गई है. हालांकि, किसानों को उम्मीद है कि उत्तर-पूर्वी मॉनसून शुरू होने के बाद पानी की उपलब्धता बेहतर होगी. इसके बाद टमाटर की खेती का रकबा फिर बढ़ सकता है.

तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में टमाटर की खेती का रकबा बारिश की कमी के कारण घट गया है. जिले में हर साल करीब 12,000 हेक्टेयर में टमाटर की खेती  होती है अगस्त और सितंबर में सामान्य तौर पर 1,300 से 1,500 हेक्टेयर में टमाटर लगाया जाता है. इस साल अल नीनो के असर के चलते जिले में पर्याप्त बारिश नहीं हुई. इससे दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर रहा और पानी की कमी बढ़ गई. नतीजतन, अगस्त-सितंबर में टमाटर की खेती घटकर सिर्फ 700 हेक्टेयर रह गई.

पालाकोड मंडी में टमाटर की आवक घटी, भाव 32 रुपये किलो तक पहुंचे

पालाकोड के थोक व्यापारी पी. सेट्टू ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि मंडी में आमतौर पर रोजाना करीब 25 टन टमाटर की आवक होती है. लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में आवक घटकर 11 से 12 टन रह गई है. इससे टमाटर के भाव बढ़ गए हैं. उन्होंने कहा कि करीब 10 दिन पहले टमाटर 15 रुपये किलो बिक रहा था. गुरुवार को इसकी कीमत बढ़कर 26 से 32 रुपये किलो हो गई. गुणवत्ता के हिसाब से टमाटर के भाव अलग-अलग रहे.

पानी की कमी से टमाटर की खेती घटी, किसानों को बारिश का इंतजार

पालाकोड के किसान बी. सुगुमारन ने कहा कि अभी सिर्फ वही किसान टमाटर की खेती कर रहे हैं, जिनके पास सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी है. ज्यादातर झीलों, बांधों और यहां तक कि कुओं में भी पानी की कमी है. इसके चलते टमाटर की खेती का रकबा काफी घट गया है. उन्होंने कहा कि अगर बारिश नहीं हुई तो हालात ऐसे ही बने रहेंगे.

किसानों को खेती बढ़ाने के लिए बारिश का इंतजार

वहीं, बागवानी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अल नीनो के असर से लगभग सभी फसलों पर कुछ न कुछ असर पड़ा है. टमाटर की खेती फिलहाल 700 हेक्टेयर में हो रही है. विभाग को उम्मीद है कि उत्तर-पूर्वी मॉनसून इस बार जल्दी आएगा. इससे आने वाले हफ्तों में स्थिति में सुधार हो सकता है.

Published: 11 Sep, 2026 | 11:43 AM

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