जम्मू-कश्मीर में 83 फीसदी कम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, सेब और धान की फसल पर मंडराया खतरा

Apple Farmers Kashmir: जम्मू-कश्मीर में सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण सेब के बाग और धान की फसल संकट में आ गई है. शोपियां, कुलगाम, श्रीनगर और बडगाम जैसे जिलों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे सेब की क्वालिटी प्रभावित होने और धान के खेत सूखने लगे हैं.

नोएडा | Updated On: 18 Jul, 2026 | 09:23 AM

Jammu Kashmir Rainfall Deficit: जम्मू-कश्मीर में इस बार मॉनसून की कमजोर रफ्तार अब किसानों के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही है. कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण सेब के बाग और धान की खेती प्रभावित होने लगी है. बागवानों का कहना है कि, लगातार सूखे मौसम से सेब की क्वालिटी पर असर पड़ रहा है, जबकि कई इलाकों में धान के खेत सूखने लगे हैं. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

कई जिलों में 50 फीसदी से ज्यादा कम बारिश

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 1 जून से 15 जुलाई के बीच जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है.

लगातार बने इस सूखे मौसम का असर अब खेती और बागवानी दोनों पर साफ दिखाई देने लगा है.

सेब की क्वालिटी पर पड़ रहा असर

कश्मीर की पहचान उसके सेब उत्पादन से है. यहां हर साल करीब 20 से 22 लाख टन सेब का उत्पादन होता है और लाखों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश की कमी के कारण सेब के पेड़ों में नमी घट रही है. इससे फल फटने (फ्रूट क्रैकिंग) और लेंटिसल ब्लॉच जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है. इनका सीधा असर सेब की क्वालिटी और बाजार में मिलने वाली कीमत पर पड़ सकता है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि, अगर आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो इस सीजन में सेब उत्पादकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.

धान के खेतों में सूखे जैसे हालात

सूखे का असर सिर्फ बागवानी तक सीमित नहीं है. दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में धान की खेती भी संकट में आ गई है. कई गांवों में सिंचाई नहरों का जलस्तर काफी घट गया है, जिससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. वाईके पोरा, खरगुंड, चौगाम और चुरत जैसे गांवों में धान के खेत सूखने लगे हैं. किसानों का कहना है कि, खेतों की मिट्टी सख्त हो गई है और उसमें दरारें पड़ने लगी हैं. ऐसे हालात में धान के पौधों का विकास रुक सकता है और उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

लाखों किसानों की आजीविका पर असर

कश्मीर में सेब और धान की खेती किसानों की कमाई का सबसे बड़ा सहारा है. सेब के कारोबार से करीब 35 लाख लोगों को सीधे या परोक्ष रूप से रोजगार मिलता है. वहीं धान घाटी की प्रमुख फसल है और इसकी खेती बड़े क्षेत्र में की जाती है. अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर सिर्फ फसल पर ही नहीं, बल्कि किसानों की कमाई पर भी पड़ेगा. साथ ही कश्मीर की पूरी कृषि व्यवस्था और इससे जुड़े लाखों लोगों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है.

19 जुलाई से राहत की उम्मीद

हालांकि किसानों के लिए राहत की खबर भी है. मौसम विभाग के अनुसार 19 जुलाई से जम्मू-कश्मीर में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जबकि 21 और 22 जुलाई को कई इलाकों में अच्छी बारिश होने की संभावना है. किसानों को उम्मीद है कि अगर समय पर बारिश हो जाती है, तो सेब के बागों और धान की फसलों को काफी हद तक बचाया जा सकता है और संभावित नुकसान कम हो सकता है.

Published: 18 Jul, 2026 | 09:23 AM

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