कभी मुनाफे की खेती बना अनानास अब बना सिरदर्द, आखिर किस संकट में फंसे केरल के किसान?

Kerala pineapple farmers: इस साल मार्च और अप्रैल में केरल में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ी. कई इलाकों में तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने अनानास की फसल को प्रभावित किया. अत्यधिक गर्मी के कारण फूल और फल बनने की प्रक्रिया पर असर पड़ा, जिससे उत्पादन चक्र बिगड़ गया.

नई दिल्ली | Published: 23 May, 2026 | 09:43 AM

Kerala pineapple farmers: देशभर में फलों की खेती करने वाले किसान इन दिनों कई तरह की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. अब केरल के अनानास किसानों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है. राज्य में अनानास की कीमतों में भारी गिरावट आने और मजदूरों की कमी के कारण किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि किसानों के संगठन ने अगले एक साल तक नई अनानास खेती नहीं करने की अपील कर दी है.

पाइनएप्पल ग्रोअर्स एसोसिएशन केरला ने किसानों से कहा है कि फिलहाल नई फसल लगाने के बजाय पुराने बागानों की देखभाल पर ध्यान दिया जाए. संगठन का मानना है कि इससे बाजार में अनानास की अधिक आपूर्ति कम होगी और आने वाले महीनों में कीमतों में सुधार हो सकता है.

कीमतें गिरने से किसानों को भारी नुकसान

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, इस समय केरल में अनानास किसानों को लागत तक निकालना मुश्किल हो रहा है. पहली गुणवत्ता वाले हरे अनानास की कीमत करीब 46 रुपये प्रति किलो चल रही है, जबकि पके अनानास का थोक भाव गिरकर सिर्फ 10 से 13 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. किसानों का कहना है कि उन्हें कम से कम 35 से 40 रुपये प्रति किलो का भाव मिले तभी लागत निकल सकती है. मौजूदा कीमतों पर उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ रहा है.

कई किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में अनानास की अच्छी मांग और बेहतर दाम मिलने के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने इसकी खेती शुरू कर दी थी. अनुकूल मौसम और ज्यादा उत्पादन के चलते बाजार में अनानास की भरमार हो गई, जिससे कीमतें तेजी से नीचे आ गईं.

मजदूरों की कमी बनी बड़ी समस्या

केरल के किसानों के सामने सिर्फ दाम गिरने की ही नहीं बल्कि मजदूरों की कमी की भी बड़ी चुनौती है. पाइनएप्पल ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बेबी जॉन के अनुसार चुनावी सीजन के दौरान बड़ी संख्या में मजदूर उत्तर भारत लौट गए, जिससे खेतों में काम करने वाले श्रमिकों की भारी कमी हो गई.

मजदूरों की कमी के कारण किसानों को फसल की कटाई और खेतों की देखभाल में परेशानी हो रही है. कई जगह पके हुए अनानास खेतों में ही खराब हो रहे हैं क्योंकि उन्हें समय पर बाजार तक नहीं पहुंचाया जा पा रहा.

गर्मी ने भी बिगाड़ा फसल चक्र

इस साल मार्च और अप्रैल में केरल में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ी. कई इलाकों में तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने अनानास की फसल को प्रभावित किया. अत्यधिक गर्मी के कारण फूल और फल बनने की प्रक्रिया पर असर पड़ा, जिससे उत्पादन चक्र बिगड़ गया.

विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में लगातार बदलाव अब फलों की खेती के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. गर्मी बढ़ने से फलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं.

खाद और खेती की लागत बढ़ी

अनानास की खेती में खाद और मजदूरी सबसे बड़ा खर्च होता है. किसानों का कहना है कि उर्वरकों की कीमत लगातार बढ़ रही है, जबकि केंद्र सरकार रासायनिक खादों के उपयोग को कम करने पर जोर दे रही है. ऐसे में नई खेती शुरू करना किसानों के लिए और महंगा साबित हो सकता है.

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय तनाव और सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण खाद की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. किसानों को डर है कि आने वाले समय में खेती की लागत और ज्यादा बढ़ सकती है.

बाजार में मांग भी हुई कमजोर

केरल का अनानास देश के कई राज्यों में भेजा जाता है, लेकिन इस बार होटल इंडस्ट्री और जूस कंपनियों की मांग कमजोर पड़ गई है. प्रोसेस्ड फ्रूट और जूस उत्पादों की बिक्री कम होने के कारण बड़ी मात्रा में अनानास बाजार में बिना बिके रह जा रहे हैं. किसानों का कहना है कि अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे तो छोटे और मध्यम किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. कई किसान पहले ही कर्ज के दबाव में हैं.

एक साल नई खेती रोकने की सलाह

इन्हीं हालातों को देखते हुए किसान संगठन ने अगले 12 महीनों तक नई अनानास खेती नहीं करने की सलाह दी है. उनका मानना है कि अगर उत्पादन कुछ समय के लिए नियंत्रित किया जाए तो बाजार में संतुलन बनेगा और कीमतों में सुधार हो सकेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि खेती को बचाने के लिए किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर भंडारण और प्रोसेसिंग सुविधाओं की जरूरत है. साथ ही सरकार को भी किसानों को राहत देने के लिए विशेष सहायता योजनाएं शुरू करनी चाहिए, ताकि अनानास की खेती से जुड़े हजारों परिवारों की आय सुरक्षित रह सके.

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