कीमत 250 रुपये पार, फिर भी किसानों की जेब खाली…रबर ड्यूटी कट के खिलाफ केरल में बढ़ा विरोध

Natural rubber import duty: इस समय रबर की कीमत 250 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच चुकी है, जो पिछले 14 साल में सबसे ज्यादा है. सुनने में यह अच्छा लगता है, लेकिन हकीकत कुछ और है. किसानों की लागत भी तेजी से बढ़ गई है. एक किलो रबर तैयार करने में उन्हें 210 से 220 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 1 May, 2026 | 09:32 AM

Natural rubber import duty: देश में प्राकृतिक रबर को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. एक ओर टायर बनाने वाली कंपनियां चाहती हैं कि सरकार आयात पर लगने वाली ड्यूटी कम करे, ताकि उन्हें सस्ता कच्चा माल मिल सके. वहीं दूसरी ओर केरल के रबर किसान और प्लांटर्स इसका विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो घरेलू बाजार में कीमतें गिर जाएंगी और उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा. यह मुद्दा सिर्फ एक उद्योग या फसल तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लाखों किसानों की आजीविका और देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था जुड़ी हुई है.

केरल के प्लांटर्स का विरोध क्यों

बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, केरल प्लांटर्स एसोसिएशन ने साफ तौर पर कहा है कि रबर पर आयात ड्यूटी घटाने का फैसला किसानों के लिए नुकसानदायक होगा. संस्था के अनुसार करीब 12 लाख किसान इस क्षेत्र से जुड़े हैं और उनकी रोजी-रोटी इसी पर निर्भर है. अगर विदेशी रबर सस्ता होकर बाजार में आएगा, तो घरेलू कीमतें नीचे आ सकती हैं. इससे किसानों को अपनी उपज का सही दाम नहीं मिलेगा और उनकी आमदनी घट जाएगी.

कीमतें बढ़ीं, फिर भी मुनाफा नहीं

इस समय रबर की कीमत 250 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच चुकी है, जो पिछले 14 साल में सबसे ज्यादा है. सुनने में यह अच्छा लगता है, लेकिन हकीकत कुछ और है. किसानों की लागत भी तेजी से बढ़ गई है. एक किलो रबर तैयार करने में उन्हें 210 से 220 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है. यानी कीमत बढ़ने के बावजूद असली मुनाफा बहुत कम बच रहा है.

खेती से जुड़े खर्च भी लगातार बढ़ रहे हैं. कॉपर ऑक्सी क्लोराइड की कीमत करीब 200 प्रतिशत तक बढ़ गई है, स्प्रे ऑयल 150 प्रतिशत महंगा हो गया है और मजदूरी में भी 12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है.

मौसम और कीटों का असर

रबर किसानों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं. मौसम में बदलाव, अनियमित बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियों ने उत्पादन पर असर डाला है. इसके साथ ही कीटों के हमले भी बढ़े हैं, जिससे फसल को नुकसान हुआ है और उत्पादन कम हो गया है. ऐसे में किसानों की आमदनी और भी दबाव में आ गई है.

टायर उद्योग की मांग क्या है

दूसरी तरफ टायर उद्योग का कहना है कि उन्हें उत्पादन के लिए पर्याप्त मात्रा में कच्चा रबर नहीं मिल पा रहा है. इसी वजह से उन्होंने सरकार से आयात ड्यूटी कम करने की मांग की है, ताकि वे बाहर से सस्ता रबर मंगाकर अपनी जरूरत पूरी कर सकें और उत्पादन लागत को नियंत्रित रख सकें.

संतुलन बनाना बड़ी चुनौती

सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह किसानों और उद्योग दोनों के हितों को संतुलित तरीके से देखे. केरल के प्लांटर्स का कहना है कि ड्यूटी घटाने के बजाय सरकार को किसानों की लागत कम करने पर ध्यान देना चाहिए. उन्हें बेहतर तकनीक, उत्पादन बढ़ाने के उपाय और स्थिर कीमत सुनिश्चित करने के लिए योजनाएं दी जानी चाहिए.

फिलहाल इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन यह साफ है कि यह मामला जल्द ही बड़ा रूप ले सकता है. अगर ड्यूटी घटाई जाती है, तो उद्योग को राहत मिलेगी, लेकिन किसानों को नुकसान हो सकता है. वहीं अगर ड्यूटी बरकरार रहती है, तो उद्योग को महंगे कच्चे माल का सामना करना पड़ेगा.

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