Himachal Pradesh News: मिट्टी पर रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए ICAR- सेंट्रल पोटैटो रिसर्च इंस्टीट्यूट (CPRI), शिमला ने हिमाचल प्रदेश के किसानों को संतुलित और समझदारी से खाद के उपयोग के बारे में जागरूक करने का फैसला किया है. इस अभियान के तहत CPRI की 12 टीमें 45 दिनों तक गांवों में जाकर सीधे किसानों से मिलेंगी और उन्हें सही मात्रा में खाद के उपयोग की जानकारी देंगी. संस्थान के निदेशक बृजेश सिंह ने कहा है कि इस अभियान की रणनीति को हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक में समीक्षा कर तैयार किया गया है.
उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत किसानों को यह समझाया जाएगा कि खाद का इस्तेमाल केवल तय और सही मात्रा में ही करना जरूरी है. इसका उद्देश्य ज्यादा खाद के उपयोग से होने वाली समस्याओं को कम करना और मिट्टी की सेहत तथा पर्यावरण को सुरक्षित रखना है. उन्होंने ‘द ट्रब्यून’ को यह भी बताया कि यह पूरा अभियान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है.
फसल योजनाओं की जानकारी दी जाएगी
कृषि उत्पादन विभाग के प्रमुख जगदेव शर्मा ने कहा कि इस योजना के तहत किसानों को ऐसी फसल योजनाओं की जानकारी दी जाएगी जिनमें कम खाद की जरूरत पड़ती है. इसके लिए गांव स्तर पर बैठकें, खेतों में प्रदर्शन और इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसानों में जागरूकता बढ़े और वे मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के तरीके सीख सकें.
‘मेरा गांव मेरा गौरव’ कार्यक्रम शुरू होगा
सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रमुख आलोक कुमार ने कहा कि ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ कार्यक्रम के तहत यह अभियान हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, मेघालय और बिहार में शुरू किया जाएगा. यह काम संस्थान के छह क्षेत्रीय केंद्रों के जरिए किया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसानों में जागरूकता बढ़ाने और उनके व्यवहार में बदलाव लाने के लिए प्रभावी नारे और संदेशों का उपयोग किया जाएगा. साथ ही, किसानों से नियमित बातचीत और उन्हें अच्छी कृषि तकनीकों की जानकारी देकर जमीनी स्तर पर बेहतर तरीके अपनाने को बढ़ावा दिया जाएगा.
किसानों की आय और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा
इस अवसर पर CPRI के वैज्ञानिकों ने कहा कि यह पहल सिर्फ मिट्टी की सेहत सुधारने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे खेती की उत्पादकता भी बढ़ेगी और खेती की लागत कम होगी. उन्होंने कहा कि इससे टिकाऊ (सस्टेनेबल) कृषि को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, जिससे उनकी समृद्धि भी बढ़ेगी.
संतुलित खाद का इस्तेमाल पर्यावरण के लिए जरूरी
खाद का संतुलित और समझदारी से इस्तेमाल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, फसल उत्पादन सुधारने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए बहुत जरूरी है. इसमें मिट्टी की जांच के आधार पर सही समय, सही मात्रा और सही तरीके से खाद डालना शामिल होता है, जिसे 4R (सही स्रोत, सही समय, सही मात्रा और सही स्थान) कहा जाता है. इसमें जैविक खाद (जैसे कम्पोस्ट) और रासायनिक खाद (NPK) का सही मिश्रण उपयोग किया जाता है. इससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है और खेती की लागत भी कम होती है.