कपास किसानों की होने वाली है बल्ले-बल्ले, MSP बढ़ते ही खरीफ 2026 में रिकॉर्ड बुवाई के संकेत, बढ़ सकती है कमाई
Cotton Cultivation India: कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, बेहतर दाम और बढ़े हुए MSP के कारण 2026-27 में देश में कपास की खेती का रकबा करीब 7 फीसदी बढ़ सकता है. सरकार ने कपास के MSP में 557 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है. वहीं 2025-26 में कपास उत्पादन 334 लाख गांठ, घरेलू मांग 338 लाख गांठ और आयात 47 लाख गांठ रहने का अनुमान है.
Cotton Farming India: कपास किसानों के लिए आने वाला सीजन उम्मीदों से भरा नजर आ रहा है. व्यापारिक संस्था कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने अनुमान जताया है कि वर्ष 2026-27 के बुवाई सीजन में देश में कपास की खेती का रकबा करीब 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. बेहतर दाम, बढ़ा हुआ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और किसानों को मिल रही अच्छी आमदनी इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है.
बेहतर दामों से बढ़ा किसानों का भरोसा
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस सीजन किसानों को कपास के अच्छे दाम मिले हैं. इससे किसानों का भरोसा बढ़ा है और अब वे अगले सीजन में ज्यादा जमीन पर कपास बोने की तैयारी कर रहे हैं. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025-26 में देश में करीब 114.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती हुई थी. अब उम्मीद है कि अगले सीजन में कपास का रकबा और बढ़ सकता है.
सरकार ने बढ़ाया कपास का MSP
केंद्र सरकार ने भी किसानों को राहत देते हुए कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बड़ी बढ़ोतरी की है. साल 2026-27 के मार्केटिंग सीजन के लिए MSP में 557 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है.
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इसके बाद:
- मध्यम रेशे वाले कपास का MSP बढ़कर 8,267 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है.
- लंबे रेशे वाले कपास का MSP 8,667 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है.
सरकार के इस फैसले से किसानों को बेहतर लाभ मिलने की उम्मीद है और इसका सीधा असर बुवाई क्षेत्र बढ़ने पर पड़ सकता है.
उत्पादन और मांग दोनों में बढ़ोतरी का अनुमान
मुंबई में कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय फसल समिति की बैठक में अलग-अलग राज्यों से मिले आंकड़ों के आधार पर कपास उत्पादन और मांग का अनुमान लगाया गया. संस्था के अनुसार, साल 2025-26 में देश का कुल कपास उत्पादन करीब 334 लाख गांठ रहने की उम्मीद है. एक गांठ का वजन 170 किलो माना जाता है. वहीं देश में कपास की मांग भी बढ़ सकती है. अनुमान है की, घरेलू मांग करीब 7.6 प्रतिशत बढ़कर 338 लाख गांठ तक पहुंच सकती है.
आयात बढ़ेगा, निर्यात रहेगा स्थिर
सीएआई के अनुसार, अगले सीजन में कपास का आयात लगभग 15 प्रतिशत बढ़कर 47 लाख गांठ हो सकता है, जबकि पिछले साल यह 41 लाख गांठ था. वहीं निर्यात 18 लाख गांठ पर स्थिर रहने की संभावना जताई गई है. इसका मतलब है कि घरेलू उद्योगों में कपास की खपत तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण आयात की जरूरत बढ़ सकती है.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है स्टॉक
| स्टॉक और सरप्लस | 2024-25 | 2025-26 (अनुमान) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| कपास का क्लोजिंग स्टॉक | 60.59 लाख गांठ | 85.59 लाख गांठ | 41 फीसदी अधिक |
| कुल सरप्लस | 78.59 लाख गांठ | 103.59 लाख गांठ | लगभग 32 फीसदी अधिक |
खपत के सही आंकड़ों के लिए बनेगी नई रणनीति
बैठक में कपास की असली खपत और बचे हुए स्टॉक को लेकर अलग-अलग राय सामने आई. इसके बाद कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सही जानकारी जुटाने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी से सर्वे कराने का फैसला किया है. इसके अलावा, बचे हुए कपास स्टॉक की सही स्थिति जानने के लिए सात सदस्यों की एक नई समिति भी बनाई गई है.
कुल मिलाकर, बेहतर MSP, मजबूत मांग और किसानों को मिल रहे अच्छे दामों की वजह से भारत में कपास क्षेत्र का विस्तार होने की संभावना बढ़ गई है. अगर मौसम अनुकूल रहा, तो आने वाले समय में कपास उत्पादन और व्यापार दोनों नए स्तर पर पहुंच सकते हैं.