बिना रोपाई अब सीधे खेत में करें बुवाई, सरकार भी दे रही तगड़ी सब्सिडी, जानें DSR का पूरा खेल

DSR Farming Subsidy: हरियाणा सरकार ने खरीफ 2026 के लिए धान की सीधी बिजाई (DSR) तकनीक को बढ़ावा देते हुए पूरे राज्य में लागू कर दिया है. इस तकनीक में धान की रोपाई की जगह बीज सीधे खेत में मशीन से बोए जाते हैं, जिससे पानी, समय और लागत की बचत होती है. सरकार इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों को 4500 रुपये प्रति एकड़ तक सब्सिडी दे रही है.

नोएडा | Updated On: 25 May, 2026 | 07:36 PM

Paddy DSR Technique: खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान धान की बुवाई की तैयारी में जुट जाते हैं. लेकिन पारंपरिक धान खेती में पानी की भारी खपत एक बड़ी समस्या बन चुकी है. गिरते ग्राउंड वाटर लेवल को देखते हुए सरकारें अब नई तकनीकों को बढ़ावा दे रही हैं. इसी दिशा में हरियाणा सरकार ने खरीफ 2026 के लिए धान की सीधी बिजाई (DSR) तकनीक को पूरे राज्य में लागू कर दिया है (महेंद्रगढ़ को छोड़कर). इस योजना के तहत किसानों को सब्सिडी भी दी जा रही है, जिससे खेती अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बन सके.

धान की सीधी बिजाई (DSR) क्या है?

DSR (Direct Seeded Rice) यानी धान की सीधी बिजाई की आधुनिक तकनीक है. इसमें किसान धान की नर्सरी तैयार करने और पौध रोपाई करने के बजाय सीधे खेत में बीज मशीन या ड्रिल की मदद से बोते हैं. पारंपरिक तरीके में खेतों को पानी से भरकर रोपाई करनी पड़ती है, लेकिन DSR में यह प्रक्रिया नहीं होती. इसी वजह से यह तकनीक समय, मेहनत और पानी, तीनों की बचत करती है.

DSR तकनीक के प्रमुख फायदे

पानी और ग्राउंड वाटर की बड़ी बचत

धान की पारंपरिक खेती में खेतों को लंबे समय तक पानी से भरा रखना पड़ता है, जिससे पानी की भारी बर्बादी होती है. DSR तकनीक से लगभग 15 से 20 फीसदी तक पानी की बचत संभव है. यह गिरते ग्राउंड वाटर लेवल को सुधारने में बेहद मददगार साबित हो रही है.

खेती की लागत में कमी

इस तकनीक में नर्सरी उखाड़ने और रोपाई के लिए मजदूरों की जरूरत नहीं पड़ती. मशीन से बुवाई होने के कारण लेबर खर्च काफी कम हो जाता है. साथ ही ट्रैक्टर, डीजल और अन्य कृषि कार्यों पर होने वाला खर्च भी घट जाता है.

समय और मेहनत की बचत

DSR विधि अपनाने से किसान को नर्सरी तैयार करने की लंबी प्रक्रिया से छुटकारा मिल जाता है. मशीन द्वारा सीधे बुवाई होने से पूरा काम तेजी से और कम मेहनत में पूरा हो जाता है.

मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार

पारंपरिक कद्दू विधि से मिट्टी सख्त हो जाती है, जिससे अगली फसलों पर असर पड़ता है. DSR तकनीक से मिट्टी की संरचना बनी रहती है और भविष्य की फसल की उत्पादकता बेहतर होती है.

सब्सिडी और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया

हरियाणा सरकार DSR तकनीक अपनाने वाले किसानों को 4500 रुपये प्रति एकड़ तक का अनुदान दे रही है. इसके लिए किसानों को ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर 15 जून 2026 तक रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है. रजिस्ट्रेशन के बाद कृषि विभाग की टीमें खेतों का फिजिकल वेरिफिकेशन भी करेंगी.

DSR तकनीक में शुरुआत में पानी कम रहने के कारण खरपतवार तेजी से उग सकते हैं. इसलिए बुवाई के तुरंत बाद सही खरपतवार नाशक का उपयोग करना जरूरी है, ताकि फसल सुरक्षित रहे.

DSR अपनाते समय ध्यान रखने योग्य बातें

DSR तकनीक धान की खेती में एक बड़ा बदलाव साबित हो रही है. यह न केवल पानी की बचत करती है बल्कि किसानों की लागत भी घटाती है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करती है. सही तरीके से अपनाई जाए तो यह तकनीक किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक मजबूत साधन बन सकती है.

Published: 26 May, 2026 | 06:00 AM

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