बारिश ने पकड़ी रफ्तार, बढ़ी मूंग की बुवाई.. फिर भी रकबा पिछले साल से 11 फीसदी कम

देश में मूंग की बुवाई लक्ष्य के 62 फीसदी से अधिक क्षेत्र में हो चुकी है, लेकिन कम बारिश के कारण इसका रकबा पिछले साल से 11 फीसदी कम है. हाल की बारिश से किसानों को राहत मिली है. कम कीमत मिलने के बावजूद कम लागत और सीमित विकल्पों के कारण किसान मूंग की खेती जारी रखे हुए हैं.

नोएडा | Updated On: 22 Jul, 2026 | 07:42 AM

Mung Cultivation: जैसे-जैसे बारिश रफ्तार पकड़ रही है, वैसे-वैसे दलहन बुवाई में भी तेजी आ रही है. इस खरीफ सीजन में अब तक मूंग की बुवाई लक्ष्य के 62 फीसदी से अधिक क्षेत्र में हो चुकी है. हालांकि, पिछले साल की तुलना में अब तक इसका रकबा करीब 11 फीसदी कम है. इसकी मुख्य वजह राजस्थान, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में कम बारिश रही है.

हाल ही में हुई बारिश से मूंग किसानों को बड़ी राहत मिली है. किसानों का मानना है कि अगर आगे भी अच्छी बारिश होती रही, तो मूंग का रकबा पिछले साल के बराबर या उससे भी अधिक हो सकता है. राजस्थान के डूडू क्षेत्र के किसान जगदीश चंद सौ ने बिजनेसलाइन को कहा कि उन्होंने 27 जून को मूंग की बुवाई की थी और तब से बारिश का इंतजार कर रहे थे. सोमवार को हुई बारिश से उनकी फसल बच गई. उन्होंने कहा कि उनके इलाके में मूंग, बाजरा और ज्वार के अलावा दूसरी फसल का ज्यादा विकल्प नहीं है. वह अपनी 55 बीघा जमीन में से करीब 35 बीघा में मूंग की खेती करते हैं.

किसानों को दूसरी फसल अपनाने की सलाह

राजस्थान के किसानों का कहना है कि मूंग की कम कीमत  मिलने के बावजूद उन्हें दूसरी फसल का कोई बेहतर विकल्प नहीं बताया गया है. डूडू क्षेत्र के किसान जगदीश चंद सौ ने कहा कि न तो कृषि वैज्ञानिकों और न ही सरकारी अधिकारियों ने कभी दूसरी फसल अपनाने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि मूंग की खेती पर करीब 6,000 से 7,000 रुपये प्रति बीघा खर्च आता है. मौजूदा बाजार भाव पर प्रति बीघा करीब 3 क्विंटल उपज बेचकर 18,000 से 20,000 रुपये तक की आमदनी हो जाती है.

मूंग किसानों की MSP से कम कमाई

एगमार्कनेट के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान के किसानों ने पिछले खरीफ सीजन में अक्टूबर से दिसंबर के दौरान अपनी मूंग की फसल औसतन न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,768 रुपये प्रति क्विंटल से करीब 26 फीसदी कम कीमत पर बेची. किसान नेताओं का कहना है कि जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहां मूंग किसानों के पास दूसरी फसलों के ज्यादा विकल्प नहीं हैं. किसान नेता रामपाल जाट ने कहा कि मूंग की खेती में लागत कम आती है और यह फसल 60 से 75 दिन में तैयार हो जाती है. उन्होंने बताया कि मूंग की जल्दी कटाई होने से अगर बाद में अच्छी बारिश हो जाए तो किसान उसी खेत में दूसरी फसल भी ले सकते हैं. यही वजह है कि कम कीमत मिलने के बावजूद किसान मूंग की खेती जारी रखे हुए हैं.

Published: 22 Jul, 2026 | 07:36 AM

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