MP में गेहूं खरीदी में हो रही देरी से जीतू पटवारी नाराज, कहा- कृषि मंत्री के निवास के सामने करेंगे भूख हड़ताल

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी और किसानों की स्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. गेहूं खरीदी में हो रही देरी पर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितु पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्दी खरीदी की व्यवस्था नहीं हुई तो वह भोपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास के सामने भूख हड़ताल करेंगे.

नोएडा | Updated On: 3 Apr, 2026 | 09:06 PM

Madhya Pradesh News: कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पर गेहूं खरीदी शुरू करने में हो रही देरी को लेकर निशाना साधा है. पार्टी का कहना है कि इस देरी के कारण किसानों को अपनी फसल कम दाम पर बिचौलियों को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितु पटवारी ने कहा है कि अगर जल्दी खरीदी की व्यवस्था नहीं हुई तो वह भोपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास के सामने भूख हड़ताल करेंगे.

दरअसल, राज्य सरकार ने 30 मार्च को घोषणा की थी कि 24 जिलों में 10 अप्रैल से और बाकी 31 जिलों में 15 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू की जाएगी, जिसमें चंबल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग शामिल हैं. लेकिन राज्य सरकार ने फिर गेहूं खरीदी  की नई तारीखों की घोषणा की है. खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आदेश के अनुसार, इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नरसिंहपुर संभागों में 10 अप्रैल से और बाकी संभागों में 15 अप्रैल से खरीदी शुरू होगी. यह पिछले एक महीने में दूसरी बार है जब सरकार ने खरीदी की तारीख आगे बढ़ाई है. आमतौर पर राज्य में खरीदी 15 मार्च से शुरू होती है, लेकिन पहले सरकार ने इस साल इसे 1 अप्रैल से शुरू करने की घोषणा की थी.

क्या बोले मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितु पटवारी

एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जितु पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्दी खरीदी की व्यवस्था नहीं हुई तो वह भोपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास के सामने भूख हड़ताल करेंगे. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में रबी मार्केटिंग सीजन में गेहूं की सरकारी खरीदी का बड़े पैमाने पर प्रचार किया जा रहा है और इसके लिए करोड़ों मीट्रिक टन का लक्ष्य भी रखा गया है. लेकिन हकीकत यह है कि राज्य सरकार के पास गेहूं रखने के लिए जरूरी बोरों (गुन्नी बैग) की कमी है. किसान अपने कटे हुए अनाज के साथ मंडियों में खुले आसमान के नीचे बैठे हैं, जबकि प्रशासन केवल सिस्टम की कमियों की बात करता रहता है.

राज्य के किसान वर्तमान में कर्ज में डूबे हैं

जितु पटवारी ने कहा कि राज्य के किसान वर्तमान में कर्ज में डूबे  हैं. कर्ज की किस्तों की समयसीमा बीत चुकी है, लेकिन मोहन सरकार की लापरवाही के कारण किसान अपनी फसल बिचौलियों को बेहद कम दाम में बेचने को मजबूर हैं. वहीं, द हिन्दू से बात करते हुए, बीकेएस के राज्य अध्यक्ष कमल सिंह अंजाना ने कहा कि जबकि गेहूं खरीदी की तारीख बार-बार आगे बढ़ाई जा रही है, किसानों को उनके कर्ज की किस्तों के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया गया है. अंजाना ने कहा कि बीकेएस के प्रतिनिधियों ने बुधवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किसानों की मांगें रखीं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार हमारी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती, तो हम 6 अप्रैल को बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेंगे.

 

Published: 3 Apr, 2026 | 09:26 PM

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