Farmers Protest 2026: देश में किसानों के हक और उनकी आवाज को मजबूत करने के लिए एक बार फिर बड़ा आंदोलन आकार लेता दिख रहा है. किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने ऐलान किया है कि फरवरी की शुरुआत में किसान जागृति यात्रा निकाली जाएगी, जो देश के दक्षिणी सिरे कन्याकुमारी से शुरू होकर दिल्ली तक पहुंचेगी. इस यात्रा का मकसद किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी दिलाने की मांग को देशभर में मजबूती से उठाना है.
कन्याकुमारी से दिल्ली तक किसानों की आवाज
दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि यह यात्रा फरवरी के पहले सप्ताह, संभवतः 2 फरवरी से शुरू होगी. यात्रा कन्याकुमारी से चलकर देश के अलग-अलग राज्यों से गुजरते हुए कश्मीर तक जाएगी और अंत में 19 मार्च को दिल्ली में समाप्त होगी. उन्होंने बताया कि यात्रा का समापन एक बड़ी किसान रैली के रूप में किया जाएगा, जिसके लिए रामलीला मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है. इसके लिए संबंधित प्रशासन से अनुमति लेने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डल्लेवाल ने साफ किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है. यह पूरी तरह किसानों के हक और उनकी समस्याओं को लेकर है. उन्होंने कहा कि चाहे सरकार अनुमति दे या न दे, किसानों की यह लड़ाई रुकेगी नहीं और वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात जनता तक पहुंचाते रहेंगे.
भूख हड़ताल के बाद फिर आंदोलन की राह
गौरतलब है कि जगजीत सिंह डल्लेवाल इससे पहले पंजाब-हरियाणा सीमा पर 130 दिनों से अधिक समय तक भूख हड़ताल पर रहे थे. उस दौरान किसानों की मांगों को लेकर केंद्र सरकार से कई दौर की बातचीत भी हुई थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका. अब डल्लेवाल का कहना है कि सिर्फ धरने या भूख हड़ताल से बात नहीं बनेगी, इसलिए इस बार देशभर के किसानों को जोड़ने और उन्हें जागरूक करने की रणनीति अपनाई जा रही है.
उनका मानना है कि जब तक हर किसान को यह समझ नहीं आएगा कि उसकी फसल का सही दाम और कानूनी सुरक्षा क्यों जरूरी है, तब तक बदलाव संभव नहीं है. इसी सोच के साथ किसान जागृति यात्रा की रूपरेखा तैयार की गई है.
कानूनी MSP और कर्ज माफी प्रमुख मुद्दे
इस यात्रा के दौरान किसानों को MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी और खेती से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों के असर के बारे में जानकारी दी जाएगी. डल्लेवाल ने कहा कि किसान आज भी लागत से कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर है. ज्यादा उत्पादन होने के बावजूद किसान खुशहाल नहीं है, क्योंकि उसे अपनी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल रहा.
उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ यह कहना कि देश में रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है, किसानों की हालत सुधारने का पैमाना नहीं हो सकता. असली सवाल यह है कि किसान की जेब में कितना पैसा जा रहा है और क्या वह कर्ज से बाहर निकल पा रहा है या नहीं.
सीड बिल और विदेशी बीजों पर चिंता
किसान नेता ने प्रस्तावित सीड बिल को लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि इस कानून के जरिए विदेशी कंपनियों के बीज भारत में बड़े पैमाने पर आ सकते हैं. इससे किसान महंगे बीज खरीदने के जाल में फंस जाएगा और उसकी लागत और बढ़ जाएगी. डल्लेवाल के मुताबिक, इससे किसान धीरे-धीरे कर्ज के दलदल में फंस सकता है और अपनी पारंपरिक बीज प्रणाली से दूर हो जाएगा.
उन्होंने दावा किया कि तकनीक के नाम पर जेनेटिकली मॉडिफाइड बीजों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो लंबे समय में किसानों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं.
मार्च में दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन
किसान जागृति यात्रा का अंतिम पड़ाव 19 मार्च को दिल्ली में होगा, जहां देशभर से किसान जुटेंगे. इस रैली के जरिए सरकार को यह संदेश देने की कोशिश होगी कि किसान अब अपने हक के लिए पूरी तरह एकजुट है. डल्लेवाल ने कहा कि यह आंदोलन लंबा चल सकता है, लेकिन किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं.
कुल मिलाकर, कन्याकुमारी से दिल्ली तक प्रस्तावित यह यात्रा आने वाले महीनों में देश की राजनीति और कृषि नीति पर बड़ा असर डाल सकती है. अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार किसानों की इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या कोई ठोस समाधान निकल पाता है या नहीं.