जुलाई की बारिश से संभली खरीफ की तस्वीर! महाराष्ट्र में 80 फीसदी बुवाई पूरी, मक्का का रिकॉर्ड

Kharif Sowing: जुलाई में हुई अच्छी बारिश से महाराष्ट्र में खरीफ सीजन ने रफ्तार पकड़ ली है. राज्य में अब तक 80 फीसदी बुवाई पूरी हो चुकी है. सोयाबीन और कपास की बुवाई अंतिम चरण में है, जबकि मक्का की खेती सामान्य क्षेत्र के 121 फीसदी तक पहुंच गई है.

नोएडा | Published: 26 Jul, 2026 | 05:57 PM

Maharashtra Kharif Sowing: महाराष्ट्र में खरीफ सीजन की शुरुआत किसानों के लिए आसान नहीं रही. जून में बारिश की कमी के कारण कई इलाकों में बुवाई प्रभावित हुई और कुछ किसानों को खराब अंकुरण की वजह से दोबारा बीज डालने पड़े. लेकिन जुलाई में हुई अच्छी बारिश ने हालात बदल दिए हैं. अब खेतों में नमी लौट आई है और बुवाई का काम तेजी से आगे बढ़ा है. राज्य कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में अब तक सामान्य बुवाई क्षेत्र के करीब 80 प्रतिशत हिस्से में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है.

सोयाबीन और कपास की बुवाई अंतिम चरण में

कृषि विभाग का कहना है कि राज्य में सोयाबीन और कपास की बुवाई लगभग पूरी होने की ओर है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सोयाबीन की बुवाई 44.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है, जो इसके सामान्य रकबे का 94 प्रतिशत है. वहीं, कपास की बुवाई 35.97 लाख हेक्टेयर में पूरी हो चुकी है, जो सामान्य क्षेत्र का 84 प्रतिशत है. जून में कई जिलों में बारिश की कमी के कारण बीजों का अंकुरण ठीक नहीं हुआ था. ऐसे में किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ी. हालांकि जुलाई की अच्छी बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी आई और बुवाई का काम फिर से रफ्तार पकड़ गया.

कृषि विभाग का अनुमान है कि, अगर मौसम अनुकूल रहा तो अगले एक सप्ताह में सोयाबीन और कपास की बुवाई पूरी हो जाएगी. कुछ क्षेत्रों में बुवाई सामान्य औसत से भी अधिक हो सकती है.

मक्का की खेती की ओर बढ़ा किसानों का रुझान

इस बार भी मक्का किसानों की पसंदीदा फसल बनकर उभरा है. लगातार दूसरे साल किसानों ने बड़े पैमाने पर मक्का की बुवाई की है. अब तक 11.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का बोया जा चुका है, जो इसके सामान्य रकबे का 121 प्रतिशत है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मक्का की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम आती है और बाजार में इसके अच्छे दाम मिल रहे हैं. यही वजह है कि किसान तेजी से इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं.

दलहन और तिलहन की बुवाई भी बढ़ी

राज्य में अन्य खरीफ फसलों की बुवाई भी लगातार आगे बढ़ रही है. अरहर (तुअर) की बुवाई 10.44 लाख हेक्टेयर यानी सामान्य क्षेत्र के 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इसके अलावा

इससे संकेत मिल रहे हैं कि इस बार दलहन और तिलहन उत्पादन भी बेहतर रहने की उम्मीद है.

धान की रोपाई अब भी धीमी

जहां अधिकांश फसलों की बुवाई अच्छी गति से आगे बढ़ी है, वहीं धान की रोपाई अभी भी पीछे चल रही है. अब तक केवल 4.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान लगाया गया है, जो सामान्य क्षेत्र का सिर्फ 33 प्रतिशत है. कृषि विभाग के अनुसार, जून में लंबे समय तक सूखे जैसे हालात रहने के कारण कोंकण और विदर्भ के प्रमुख धान उत्पादक जिलों, जैसे सिंधुदुर्ग, रायगढ़, गोंदिया और भंडारा में नर्सरी तैयार करने में देरी हुई. इसका असर धान की रोपाई पर पड़ा.

जुलाई की बारिश बनी किसानों के लिए राहत

1 जून से 20 जुलाई के बीच महाराष्ट्र में 368 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 421 मिमी वर्षा का लगभग 87 प्रतिशत है. राज्य के 355 तालुकों में से 98 तालुकों में सामान्य से अधिक बारिश हुई, जबकि 87 तालुकों में सामान्य के करीब वर्षा दर्ज की गई. केवल चार तालुकों में ही बारिश की भारी कमी रही.

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि, जुलाई की बारिश ने खरीफ सीजन को संभाल लिया है. हालांकि अब किसानों की नजर अगस्त की बारिश पर टिकी है. अगर अगले महीने भी मौसम साथ देता है, तो सोयाबीन, कपास, मक्का और धान जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार अच्छी रहने की उम्मीद है, जिससे किसानों की आय बढ़ सकती है.

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