खाद की किल्लत से परेशान किसान? 200 लीटर के इस घोल से मक्का फसल को मिलेगी नई ताकत
मक्के की फसल में खाद की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है. ऐसे समय में कृषि विशेषज्ञों ने एक आसान और कम खर्च वाला उपाय बताया है, जिससे पौधों को जरूरी पोषण मिल सकता है. सही समय पर देखभाल और पोषण देने से फसल मजबूत बनती है और उत्पादन बेहतर होने की संभावना बढ़ जाती है.
Maize Farming: देश के कई हिस्सों में किसान तेजी से मक्के की खेती की ओर बढ़ रहे हैं. अच्छी कीमत और बढ़ती मांग के कारण यह फसल किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है. लेकिन फसल की अच्छी बढ़वार और ज्यादा उत्पादन के लिए समय पर पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है. कई बार खाद और उर्वरकों की कमी के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. ऐसे में कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान कुछ घरेलू और प्राकृतिक उपाय अपनाकर भी फसल को मजबूत बना सकते हैं.
घर पर तैयार करें प्राकृतिक पोषक घोल
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, मक्के के पौधों को मजबूत बनाने के लिए किसान एक आसान जैविक घोल तैयार कर सकते हैं. इसके लिए 200 लीटर पानी में लगभग 10 किलो देसी गाय का गोबर और 1 किलो बेसन मिलाएं. इस मिश्रण को अच्छी तरह घोलकर किसी छायादार स्थान पर 7 दिनों तक ढककर रखें. निर्धारित समय के बाद यह घोल तैयार हो जाता है. इसका छिड़काव खेत में करने से पौधों को जरूरी पोषण मिलता है और उनकी वृद्धि बेहतर होती है.
फल आने के समय पौधों को चाहिए अतिरिक्त ताकत
मक्का की फसल में भुट्टा बनने की अवस्था सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस समय पौधों पर भार बढ़ जाता है और यदि तना कमजोर हो तो पौधे झुक सकते हैं या टूट सकते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, इसी चरण में पौधों को अतिरिक्त पोषण देना जरूरी होता है. सही पोषण मिलने से तना मजबूत रहता है, पौधों की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है.
माइक्रोन्यूट्रिएंट का भी ले सकते हैं सहारा
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार बताते हैं कि जरूरत पड़ने पर किसान माइक्रोन्यूट्रिएंट और घुलनशील उर्वरकों का भी उपयोग कर सकते हैं. फसल की शुरुआती अवस्था में नैनो डीएपी और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व लाभकारी हो सकते हैं. वहीं भुट्टा निकलने के समय NPK 20-20-20 का छिड़काव पौधों के विकास में मदद करता है. हालांकि किसी भी उर्वरक का उपयोग खेत की स्थिति और फसल की जरूरत को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए.
सही प्रबंधन से मिल सकता है बेहतर उत्पादन
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल उर्वरक ही नहीं, बल्कि समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और रोग प्रबंधन भी अच्छी पैदावार के लिए जरूरी है. यदि किसान पौधों को संतुलित पोषण और उचित देखभाल दें तो मक्के की फसल अधिक स्वस्थ रहती है और उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा सकती है. प्राकृतिक और जैविक उपायों को अपनाकर किसान लागत कम करने के साथ-साथ बेहतर उत्पादन भी हासिल कर सकते हैं.