बारिश से धान, आम और मक्का की फसल चौपट, निरीक्षण का काम पूरा.. कब मिलेगा मुआवजा ?

कृषि विभाग के एक अधिकारी ने भरोसा दिलाया है कि नुकसान का सही आकलन होने के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि सिरुमलाई में पिछले कुछ दिनों में कई दर्जन एकड़ में सहजन (ड्रमस्टिक), केले के बागान और नींबू के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा है. फिलहाल अधिकारी इन इलाकों में हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 3 May, 2026 | 03:04 PM

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के डिंडीगुल और थेनी जिले में बीते दिनों हुई बारिश से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है. कहा जा रहा है कि थेनी जिले के पेरियाकुलम तालुक में कटाई के लिए तैयार धान की फसल, आम और नारियल के पेड़ों को काफी नुकसान हुआ है. वहीं सिरुमलाई इलाके में केले, नींबू और सहजन (ड्रमस्टिक) की खेती भी प्रभावित हुई है. इसके अलावा पलानी क्षेत्र में भी कई एकड़ फसलें खराब हो गई हैं. कृषि और राजस्व विभाग की टीमें बारिश से प्रभावित इलाकों का निरीक्षण पूरा कर चुकी हैं, ताकि फसल नुकसान का सही आकलन किया जा सके. कृषि विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, अब दूसरी टीम बाकी क्षेत्रों में जमीन और फसल रिकॉर्ड की जांच करेगी.

थमरैकुलम के धान किसान वी. श्रीनिवासन ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि उन्होंने अपनी चार एकड़ जमीन पर खेती के लिए 1.5 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए थे. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि उनकी फसल मई के दूसरे हफ्ते में कटाई के लिए तैयार हो जाएगी. लेकिन गुरुवार रात आए तेज हवाओं ने उनकी पूरी फसल को बुरी तरह गिरा दिया, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान हुआ है.

मक्का की फसल भी बारिश से प्रभावित हुई है

तमिलनाडु किसान संघ (दिन्डीगुल) के अध्यक्ष एम. रामासामी ने कहा कि गुरुवार को दो बार बारिश हुई. पहली दोपहर 3 से 4 बजे के बीच और दूसरी रात 8 से 10 बजे के बीच. इस बारिश से बालासमुद्रम, कुरुंपाडी, ए. कलाइमुथुर और थमरैकुलम में कई एकड़ धान की फसलें  बर्बाद हो गईं. उन्होंने कहा कि ये फसलें अगले कुछ दिनों में कटाई के लिए तैयार थीं, लेकिन अब किसानों को भारी नुकसान हुआ है और वे काफी परेशान हैं. इसके अलावा, पोनाप्पुरम और बालासमुद्रम के कुछ हिस्सों में उगाई गई मक्का की फसल भी बारिश से प्रभावित हुई है.

धान की खेती में बढ़ गया खर्च

धान किसान के. जगन्नाथन ने कहा कि पलानी क्षेत्र अपनी धान की खेती के लिए जाना जाता है, जहां खासतौर पर ‘मट्टई अरिसी’ किस्म की धान उगाई जाती है, जिसकी केरल के व्यापारियों में अच्छी मांग है. उन्होंने कहा कि किसानों ने यह फसल पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में बोई थी और एक एकड़ पर खाद, बुवाई, सिंचाई और अन्य खर्चों में 30,000 रुपये से ज्यादा निवेश किया था. उन्हें उम्मीद थी कि कुछ ही दिनों में फसल की कटाई  हो जाएगी, लेकिन तेज हवाओं और बारिश ने पूरी फसल को बर्बाद कर दिया.

सही आकलन के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी

कृषि विभाग के एक अधिकारी ने भरोसा दिलाया है कि नुकसान का सही आकलन होने के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि सिरुमलाई में पिछले कुछ दिनों में कई दर्जन एकड़ में सहजन (ड्रमस्टिक), केले के बागान और नींबू के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा है. फिलहाल अधिकारी इन इलाकों में हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं. इसी बीच, थेनी जिले के पेरियाकुलम तालुक के कई गांवों में गुरुवार की बारिश से आम और नारियल के बागानों  को भी नुकसान हुआ है. करीब 80 आम के पेड़ और 90 नारियल के पेड़ उखड़ गए. इसके अलावा, थेनी जिले के उत्तमपलायम, सुरुलिपट्टी और कामयगौंडनपट्टी इलाकों में लाल और नेनथरम केले की कई एकड़ फसल भी तेज हवाओं और बारिश की वजह से पूरी तरह उखड़ गई.

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Published: 3 May, 2026 | 02:57 PM
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