छत्तीसगढ़ में मखाना को बढ़ावा, 100 एकड़ में होगी खेती.. अब महिला किसानों की बढ़ेगी कमाई

कलेक्टर ने यह भी निर्देशित किया कि कृषि एवं उद्यानिकी विभाग समन्वय बनाकर किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करें तथा जल प्रबंधन एवं फसल संरक्षण पर विशेष ध्यान दें. आने वाले समय में चरणबद्ध रूप से रकबे का विस्तार कर अधिक से अधिक समूहों को इस पहल से जोड़ा जाएगा.

नोएडा | Published: 8 Mar, 2026 | 10:10 AM

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में मखाना की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए सरकार ने प्लान तैयार किया है. खासकर सरकार का फोकस वनांचल क्षेत्र के ऊपर है. धमतरी जिला को मखाना का हब बनाया जाएगा. राज्य सरकार को उम्मीद है कि उसकी इस पहल से राज्य में मखाना खेती को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही मखाना खेती से महिला समूहों को नए आय के स्रोत मिलेंगे और उन्हें सशक्त बनाया जाएगा. ऐसे भी जिले की जलवायु मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी. वहीं, मखाना उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए नए अवसर खुलेंगे.

दरअसल, धमतरी जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र में आजीविका बढ़ाने के लिए एक नई पहल के तहत मखाना खेती  शुरू की जा रही है. यह काम स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है. जिले में कुल 100 एकड़ भूमि मखाना उत्पादन के लिए चिन्हित की गई है, जिसमें प्रारंभिक चरण में संकरा क्षेत्र के 25 एकड़ में खेती की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. विशेषज्ञों के अनुसार नगरी क्षेत्र की जलवायु, पर्याप्त जल और प्राकृतिक वातावरण मखाना उत्पादन के लिए बहुत अनुकूल है. इससे स्थानीय किसान और महिला स्व-सहायता समूहों को अतिरिक्त आय के नए अवसर मिलेंगे. यह पहल वनांचल क्षेत्र में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी.

धमतरी जिला बनेगा मखाना उत्पादन का मॉडल

बता दें कि कलेक्टर धमतरी ने हाल ही में संकरा जाकर मखाना खेती की तैयारियों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि मखाना खेती नगरी वनांचल क्षेत्र में आय बढ़ाने का प्रभावी तरीका बन सकती है. स्व-सहायता समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज और विपणन की सही व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि धमतरी जिले को मखाना उत्पादन   का मॉडल जिला बनाया जाए.

किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा

कलेक्टर ने यह भी निर्देशित किया कि कृषि एवं उद्यानिकी विभाग समन्वय बनाकर किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करें तथा जल प्रबंधन एवं फसल संरक्षण पर विशेष ध्यान दें. आने वाले समय में चरणबद्ध रूप से रकबे का विस्तार कर अधिक से अधिक समूहों को इस पहल से जोड़ा जाएगा. जिला प्रशासन की इस पहल से नगरी वनांचल क्षेत्र में आर्थिक सशक्तिकरण की नई संभावनाएं साकार होती दिखाई दे रही हैं. ध्यान देने वाली बात है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने धमतरी दौरे के दौरान जिले को मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा की थी. इसके बाद जिला प्रशासन ने मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की है.

इस तरह के इलाके में होती है मखाने की खेती

मखाना एक ऐसा पौधा है जो तालाब, दलदल और आर्द्रभूमि जैसे स्थिर जल वाले स्थानों में उगता है. इसका प्रसार बीजों के जरिए होता है और अंकुरण के लिए परिपक्व बीज जरूरी होते हैं. मखाना खेती में कम खर्च आता है क्योंकि पिछले साल के बीज आसानी से नए पौधे उगाते हैं. पोषक तत्वों से भरपूर  और नकदी फसल होने के कारण यह किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता रखता है. धमतरी में मखाना खेती से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदल रही है. छोटी-छोटी डबरी से लेकर समृद्धि तक, महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया रास्ता दिख रहा है. यह शासकीय प्रयासों का परिणाम है, जिससे धमतरी में महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण होगा.

मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 80 फीसदी

भारत विश्व का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक देश है, जिसमें कुल उत्पादन का 80 फीसदी से अधिक हिस्सा बिहार से आता है. बिहार के मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार और सुपौल प्रमुख मखाना उत्पादक जिले हैं. यहां 12,000 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर 1,20,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना उगाया जा रहा है. मखाना एक सुपरफूड है और इसका उत्पादन सालाना 17-18 फीसदी की दर से बढ़ रहा है. इसका प्रमुख निर्यात बाजार अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया हैं.

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