आमों की सड़न से हर साल करोड़ों का नुकसान, एक्सपर्ट से जानें शेल्फ लाइफ बढ़ाने के असरदार उपाय
Mango Farming: आम जल्दी खराब होने के पीछे एन्थ्रेक्नोज, स्टेम-एंड रॉट, बैक्टीरियल ब्लैक स्पॉट जैसे रोग, फल मक्खी का प्रकोप, गलत तरीके से तुड़ाई, ढुलाई और भंडारण मुख्य कारण हैं. ज्यादा गर्मी, नमी और फलों पर लगी चोटें भी सड़न बढ़ाती हैं.
Mango Storage Tips: भारत को आम का देश कहा जाता है. यहां हर साल करोड़ों टन आम का उत्पादन होता है और देश दुनिया के सबसे बड़े आम उत्पादक देशों में शामिल है. लेकिन खेत से बाजार तक पहुंचने के दौरान बड़ी मात्रा में आम खराब हो जाते हैं. ऐसे में बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस. के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, कटाई के बाद खराब प्रबंधन, कीटों और रोगों का हमला, अत्यधिक गर्मी, नमी और लंबी दूरी तक परिवहन जैसी वजहों से आमों की क्वालिटी तेजी से प्रभावित होती है.
सालाना 25 से 30 फीसदी नुकसान
आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर साल उत्पादित आमों का लगभग 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा कटाई के बाद खराब हो जाता है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है, वहीं उपभोक्ताओं तक भी अच्छी क्वालिटी के फल नहीं पहुंच पाते. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि, आम जल्दी क्यों खराब होते हैं और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए कौन-कौन से उपाय अपनाए जा सकते हैं.
(उदाहरण के तौर पर, अगर कुल सालाना कारोबार 40,000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपये के बीच है और इसमें 30 फीसदी का नुकसान होता है, तो आर्थिक रूप से 12,000 रुपये करोड़ से 15,000 रुपये करोड़ का नुकसान होगा)
आमों में सड़न बढ़ाने वाले प्रमुख रोग
डॉ. एस. के. सिंह के अनुसार, आम की फसल में कई तरह के रोग लगते हैं, जिनमें एन्थ्रेक्नोज सबसे प्रमुख माना जाता है. इस रोग में फलों पर काले और धंसे हुए धब्बे दिखाई देने लगते हैं, जो धीरे-धीरे बढ़कर पूरे फल को खराब कर सकते हैं. अधिक नमी और बारिश का मौसम इस रोग को बढ़ावा देता है.
इसके अलावा स्टेम-एंड रॉट नामक रोग भी आमों के खराब होने का बड़ा कारण है. इसमें फल के डंठल वाले हिस्से से सड़न शुरू होती है और धीरे-धीरे पूरा फल खराब हो जाता है. गर्म और नम वातावरण में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है.
बैक्टीरिया और कीट भी बनते हैं नुकसान की वजह
आम में बैक्टीरियल ब्लैक स्पॉट नामक रोग भी पाया जाता है. इस रोग के कारण फल और पत्तियों पर छोटे-छोटे काले धब्बे बन जाते हैं, जो बाद में बड़े निशानों का रूप ले लेते हैं. वहीं फल मक्खी का प्रकोप किसानों के लिए बड़ी चुनौती है. यह कीट फल के अंदर अंडे देता है, जिससे फल बाहर से सामान्य दिखाई देता है लेकिन अंदर से सड़ने लगता है. कई बार ऐसे फलों की पहचान समय रहते नहीं हो पाती और बाजार तक पहुंचने से पहले ही वे खराब हो जाते हैं.
कटाई और ढुलाई में लापरवाही
डॉ. एस. के. सिंह का कहना है कि, कई बार आमों की खराबी का कारण रोग नहीं बल्कि लापरवाही होती है. तुड़ाई, पैकिंग और परिवहन के दौरान फलों पर लगने वाली चोटें सड़न को बढ़ावा देती हैं. अगर फल जमीन पर गिर जाएं, उन पर खरोंच आ जाए या डंठल टूट जाए तो वहां से रोगजनक आसानी से प्रवेश कर जाते हैं. यही कारण है कि कटाई के समय विशेष सावधानी बरतना जरूरी माना जाता है.
गलत तरीके से पकाना
बाजार में जल्दी बेचने के लिए कई बार आमों को जल्दबाजी में पकाया जाता है. ज्यादा तापमान, बंद कमरों और गलत रसायनों का इस्तेमाल फल की क्वालिटी को प्रभावित करता है. इससे आम जल्दी नरम पड़ जाते हैं और उनकी शेल्फ लाइफ कम हो जाती है. वैज्ञानिक तरीके से पकाए गए आम न केवल अधिक समय तक सुरक्षित रहते हैं बल्कि उनका स्वाद और रंग भी बेहतर बना रहता है.
आमों को सुरक्षित रखने के प्रभावी उपाय
आमों की सड़न रोकने के लिए सबसे पहले बाग की साफ-सफाई पर ध्यान देना चाहिए. गिरे हुए सड़े फलों और संक्रमित टहनियों को तुरंत हटाना जरूरी है. साथ ही समय-समय पर छंटाई करने से बाग में हवा का आवागमन बना रहता है और रोगों का खतरा कम होता है. तुड़ाई के दौरान फलों को डंठल सहित सावधानीपूर्वक तोड़ना चाहिए और उन्हें जमीन पर गिरने से बचाना चाहिए. कटाई के बाद फलों को छाया में रखना और साफ पानी से धोने के बाद ही पैकिंग करना बेहतर माना जाता है.
आधुनिक तकनीकों से घट सकती है बर्बादी
फल मक्खी नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाएं. इसके अलावा फलों की बैगिंग, गर्म जल उपचार और ठंडे भंडारण जैसी तकनीकें भी काफी असरदार मानी जाती हैं. जैविक नियंत्रण के तहत ट्राइकोडर्मा और अन्य लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग रोगों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है. वहीं आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सलाह से फफूंदनाशी दवाओं का भी उपयोग किया जा सकता है.
एकीकृत प्रबंधन ही है सबसे बेहतर समाधान
आमों को खराब होने से बचाने के लिए केवल एक उपाय पर्याप्त नहीं है. स्वच्छता, वैज्ञानिक तुड़ाई, कीट एवं रोग नियंत्रण, उचित पैकिंग, बेहतर परिवहन और भंडारण जैसी सभी तकनीकों को एक साथ अपनाना होगा. अगर किसान खेत से लेकर बाजार तक हर चरण में वैज्ञानिक तरीकों का पालन करें, तो आमों की बर्बादी काफी हद तक कम की जा सकती है. इससे फलों की क्वालिटी बेहतर होगी और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी.