सरकार का दावा- किसानों को कम नहीं पड़ेगी खाद, घरेलू उत्पादन बढ़ना बताई वजह, स्टॉक आंकड़े जारी

Fertilizers Stock Latest Figures : केंद्रीय रासायनिक एवं उर्वरक मंत्री ने कहा कि सरकार पक्का कर रही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की उथल-पुथल का प्रभाव देश के अन्नदाता पर बिल्कुल न पड़े. किसानों को न केवल समय पर और समान रूप से उर्वरक मिले, बल्कि वे सहजता से किफायती दरों पर उपलब्ध हों.

नोएडा | Updated On: 6 Jul, 2026 | 09:51 AM

खरीफ सीजन के लिए खाद की कमी को लेकर किसानों की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने फिर से दावा किया है कि देश में भरपूर खाद स्टॉक मौजूद है. केंद्रीय रासायनिक एवं उर्वरक मंत्री ने कहा कि उर्वरकों का कच्चा माल लेकर आ रहे 15 जहाजों ने सुरक्षित हॉर्मुज़ स्ट्रेट पार करके भारत पहुंच चुके हैं. घरेलू खाद का उत्पादन भी बढ़ गया है. इसके चलते उर्वरकों का भंडार बढ़ना तय हो गया है. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने किसानों को खाद संकट से पहले भी बचाया है और आगे भी कोई कमी नहीं होने दी जाएगी. उन्होंने कहा कि राज्यों को मांग के अनुरूप उर्वरक मिलती रहेगी

उर्वरक आयात और घरेलू उत्पादन मजबूत स्थिति में – जेपी नड्डा

केंद्रीय रासायनिक एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि पश्चिम एशिया में शुरु हुए संघर्ष की वजह से पूरी दुनिया की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई. उर्वरकों की कीमतें आसमान छूने लगीं और माल पहुंचने में लगने वाला समय भी बढ़ गया. भारत भी इस वैश्विक संकट से अछूता नहीं रहा. इससे कच्चे माल और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति में चुनौतियां आईं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत सरकार शुरू से ही सतर्क और तैयार थी. वैकल्पिक मार्गों से उर्वरक आयात के प्रयास तेज किए गए. परिणाम यह हुआ कि आज हमारा आयात और घरेलू उत्पादन दोनों ही अत्यंत मजबूत स्थिति में हैं.

सरकार यह पक्का कर रही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की उथल-पुथल का प्रभाव देश के अन्नदाता पर बिल्कुल न पड़े. किसानों को न केवल समय पर और समान रूप से उर्वरक मिले, बल्कि वे सहजता से किफायती दरों पर उपलब्ध हों. बेहद चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने अपने अन्नदाताओं पर आंच नहीं आने दी. वैश्विक कीमतों में ऐतिहासिक उछाल के बावजूद भारत सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है.

कई देशों से मंगाई गई उर्वरक

भारत सरकार ने अपने कूटनीतिक एवं रणनीतिक प्रयासों के बल पर कई नए देशों से भी उर्वरकों की आपूर्ति पक्की की है और भारत की उर्वरक आपूर्ति पहले से अधिक मजबूत हुई है. यूरिया आपूर्ति के लिए ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की तथा नीदरलैंड सहित कई देशों से सफलतापूर्वक व्यवस्था की गई है. वहीं, डीएपी एवं एनपीके उर्वरकों के लिए लाल सागर समुद्री मार्ग के माध्यम से रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया तथा सऊदी अरब से आवश्यक व्यवस्था की गई है.

उर्वरक शिपमेंट लेकर आ रहे कई जहाज रास्ते में

उर्वरक और कच्चा माल लेकर आ रहे 8 जहाजों में 3.32 लाख मीट्रिक टन (LMT) यूरिया, 4 जहाजों में 2.57 LMT डीएपी तथा 3 जहाजों में 1.11 LMT सल्फर भारत पहुंच रहा है. इसके अतिरिक्त 5 अन्य जहाज भारत के लिए आएंगे. इनमें से एक जहाज में 0.25 LMT अमोनिया तथा एक अन्य जहाज में 0.45 LMT यूरिया लदा हुआ है. शेष दो जहाजों में यूरिया और एक जहाज में सल्फर की लोडिंग की जा रही है. इन जहाजों के आगमन के साथ ही भारत के उर्वरक भंडार में बढ़ोतरी होगी.

खाद का घरेलू उर्वरक उत्पादन बढ़ा

उर्वरक संयंत्रों के लिए प्राकृतिक गैस की उपलब्धता फिर से 100 फीसदी किए जाने से देश के सभी यूरिया प्लांट पूरी क्षमता पर चल रहे हैं. इससे घरेलू उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है. इस साल अप्रैल माह में भी 20.34 LMT के लक्ष्य के मुकाबले 20.98 LMT का उत्पादन दर्ज किया गया. मई 2026 में 22.55 LMT के लक्ष्य के मुकाबले 25.19 LMT का रिकॉर्ड यूरिया उत्पादन दर्ज किया गया. जून 2026 में भी यह प्रदर्शन जारी रहा और 24.96 LMT के लक्ष्य के मुकाबले 25.37 LMT का उत्पादन हुआ. इस प्रकार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 67.86 LMT के लक्ष्य के मुकाबले 71.55 LMT का कुल यूरिया उत्पादन हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य से 3.69 LMT अधिक है.

देश में 2 जुलाई तक खाद स्टॉक आंकड़े.

देश में खाद का भंडार कितना है

रासायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार खाद के आयात और घरेलू उत्पादन के क्षेत्र में किए गए प्रयासों का परिणाम है कि वर्तमान में देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार अनुमानित 383.9 लाख मीट्रिक टन (LMT) की जरूरत के मुकाबले 197.56 लाख मीट्रिक टन (LMT) उर्वरकों का भंडार सुरक्षित कर लिया गया है, जो कुल सालाना जरूरत का 51 फीसदी से अधिक है. इससे आगामी कृषि मौसम में किसानों को उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता पक्की होगी.

Published: 6 Jul, 2026 | 09:35 AM

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