Fertilizer Stock: खरीफ 2026 सीजन से पहले किसानों के लिए राहत भरी खबर है. उर्वरक विभाग के अनुसार अप्रैल 2026 में देश का घरेलू यूरिया उत्पादन 11 फीसदी से ज्यादा बढ़कर करीब 20 लाख टन रहने की उम्मीद है. मार्च में यह उत्पादन 18 लाख टन था, जो गैस सप्लाई कम होने की वजह से घट गया था. अब एलएनजी की उपलब्धता बढ़ने से उत्पादन फिर सामान्य स्तर की ओर लौट रहा है. इसके साथ करीब 6 लाख टन आयातित यूरिया भी आने की संभावना है, जिससे कुल उपलब्धता और मजबूत होगी. देश में 15 अप्रैल तक कुल उर्वरक स्टॉक 18.4 मिलियन टन दर्ज किया गया, जो पिछले साल से ज्यादा है.
युद्ध के असर से आयात महंगा, फिर भी सप्लाई पर फोकस
पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में तेज उछाल आया है. भारतीय पोटाश लिमिटेड को हालिया टेंडर में यूरिया के दाम करीब 935 से 959 डॉलर प्रति टन तक मिले हैं, जो दो महीने पहले के मुकाबले लगभग दोगुने हैं. इसके बावजूद केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन से पहले सप्लाई मजबूत रखने पर जोर दिया है. सरकार का फोकस है कि किसानों तक समय पर खाद पहुंचे और बोआई पर कोई असर न पड़े. यही वजह है कि घरेलू उत्पादन और आयात दोनों मोर्चों पर तेजी से काम किया जा रहा है.

यूरिया उत्पादन बढ़ा, यूपी में पर्याप्त खाद स्टॉक से भरोसा.
यूपी में यूरिया, डीएपी और एनपीके का मजबूत स्टॉक
उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन से पहले उर्वरकों की उपलब्धता मजबूत बनी हुई है. ताजा आंकड़ों के अनुसार यूरिया का कुल स्टॉक 11,38,903 टन है, जिसमें 4,16,229 टन सहकारिता क्षेत्र और 7,22,674 टन निजी क्षेत्र में मौजूद है. इसी तरह डीएपी का कुल स्टॉक 4,93,335 टन दर्ज किया गया है, जिसमें 2,38,429 टन सहकारिता और 2,54,906 टन निजी क्षेत्र में उपलब्ध है. वहीं एनपीके का कुल स्टॉक 4,76,253 टन है, जिसमें 1,75,281 टन सहकारिता क्षेत्र और 3,00,973 टन निजी क्षेत्र में रखा गया है. यह मजबूत भंडारण किसानों के लिए राहत भरी खबर है और आने वाले खरीफ सीजन में खाद की कमी की आशंका को काफी हद तक कम करता है.
कालाबाजारी रोकने और संतुलित उपयोग पर जोर
उर्वरक विभाग और राज्य सरकारें अब सिर्फ सप्लाई ही नहीं, बल्कि कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने पर भी सख्त नजर रख रही हैं. कई राज्यों में निरीक्षण अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि सब्सिडी वाली यूरिया का गलत इस्तेमाल न हो. किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे जरूरत के हिसाब से ही खाद खरीदें और मिट्टी जांच के आधार पर संतुलित उपयोग करें. इससे लागत कम होगी और फसल उत्पादन बेहतर रहेगा. कुल मिलाकर, बढ़ते घरेलू उत्पादन, आयात और यूपी के मजबूत स्टॉक को देखते हुए खरीफ 2026 में खाद संकट की आशंका काफी कम नजर आ रही है.