लम्पी बीमारी ने बढ़ाई टेंशन… एक छोटी लापरवाही से पशु, दूध और हजारों की कमाई पर संकट

Cattle Health: लम्पी त्वचा रोग गायों में तेजी से फैलने वाली वायरस बीमारी है, जिससे दूध कम होता है और पशु कमजोर पड़ जाते हैं. विभाग ने पशुपालकों को टीकाकरण, साफ-सफाई और मच्छर-मक्खी से बचाव की सलाह दी है. समय पर पहचान और डॉक्टर की मदद से इस बीमारी से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 16 Apr, 2026 | 08:44 PM

Lumpy Skin Disease: गांवों में पशुपालन सिर्फ दूध का काम नहीं, बल्कि परिवार की रोजी-रोटी का मजबूत सहारा है. ऐसे में अगर अचानक गाय के शरीर पर गांठें निकलने लगें, तेज बुखार आए और दूध कम हो जाए, तो पशुपालक की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. इन दिनों लम्पी त्वचा रोग फिर से पशुपालकों के लिए चिंता का कारण बन रहा है. बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, यह एक वायरस से फैलने वाली बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और गौवंशीय पशुओं को प्रभावित करती है. समय रहते पहचान और सावधानी से इस बीमारी से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है.

क्या है लम्पी त्वचा रोग और क्यों है खतरनाक

विभाग के अनुसार,लम्पी त्वचा रोग एक विषाणु जनित बीमारी है, जो खासकर गाय, बछड़े और बैलों  में तेजी से फैलती है. इस बीमारी में पशु के शरीर पर छोटे-छोटे दाने या गांठें निकल आती हैं, जो बाद में बड़े घाव का रूप ले सकती हैं. पशु को तेज बुखार, आंख और नाक से पानी आना, कमजोरी और भूख कम लगने जैसी परेशानी होती है. सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इस बीमारी से दूध उत्पादन तेजी से घट जाता है. जो पशु रोज अच्छा दूध दे रहा होता है, उसका दूध अचानक बहुत कम हो सकता है. इससे पशुपालकों की कमाई पर सीधा असर पड़ता है.

कैसे फैलती है यह बीमारी

बिहार पशुपालन निदेशालय के अनुसार, यह बीमारी सीधे छूने से कम और मच्छर, मक्खी, जूं तथा दूसरे काटने वाले कीड़ों से ज्यादा फैलती है. बरसात और गर्मी के मौसम  में इसका खतरा ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकि इस समय कीड़े तेजी से बढ़ते हैं. अगर गांव में एक पशु संक्रमित हो जाए और उसे अलग न रखा जाए, तो दूसरे पशुओं तक बीमारी जल्दी पहुंच सकती है. इसलिए बीमार पशु को तुरंत दूसरे पशुओं से अलग बांधना बहुत जरूरी है.

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समय पर टीका और सफाई से लम्पी रोग से बचाव संभव.

किन लक्षणों को देखकर तुरंत हो जाएं सावधान

इस बीमारी की पहचान  आसान है, बस पशुपालकों को थोड़ा ध्यान देना होगा. अगर गाय को तेज बुखार हो, शरीर पर उभरी गांठें दिखें, आंखों से पानी आए, पशु सुस्त रहे और चारा कम खाए, तो यह लम्पी का संकेत हो सकता है. इसके अलावा पशु काफी कमजोर महसूस करता है और कई बार चलने-फिरने में भी दिक्कत होती है. विभाग के अनुसार, ऐसे लक्षण दिखते ही नजदीकी पशु चिकित्सक या सरकारी पशु अस्पताल से तुरंत संपर्क करना चाहिए.

बचाव के आसान तरीके, नुकसान से बचेंगे पशुपालक

लम्पी बीमारी से बचाव के लिए सबसे जरूरी है टीकाकरण. बिहार सरकार लगातार पशुओं के लिए वैक्सीनेशन अभियान  चला रही है. जिन पशुओं को अभी तक टीका नहीं लगा है, उन्हें जल्द टीका लगवाना चाहिए. पशुओं के रहने की जगह साफ रखें, गोशाला में पानी जमा न होने दें और मच्छर-मक्खियों को दूर रखने के लिए दवा का छिड़काव करें. बीमार पशु के बर्तन, रस्सी और चारे को दूसरे पशुओं से अलग रखें.

अगर समय पर सावधानी रखी जाए तो लम्पी से होने वाले बड़े नुकसान से बचा जा सकता है. पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे अफवाहों से बचें और बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की सलाह के अनुसार ही इलाज और बचाव करें. सही समय पर टीका, सफाई और डॉक्टर की सलाह से पशु स्वस्थ रहेंगे, दूध भी बना रहेगा और कमाई पर असर नहीं पड़ेगा.

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Published: 16 Apr, 2026 | 08:44 PM
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