Agriculture News: बढ़ते गर्मी का असर गेहूं की फसल पर दिखने लगा है. कई राज्यों में तापमान में बढ़ोतरी की वजह से गेहूं की फसल में ब्राउन रस्ट यानी भूरा रतुआ बीमारी लग गई है. इससे फसल को नुकसान पहुंच रहा है. अगर समय रहते इलाज नहीं किया गया तो फसल को नुकसान पहुंच सकता है. लेकिन किसानों को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है. वे गेहूं की पत्तियों, बालियों और जड़ों को देखकर रोग पहचान सकते हैं. अगर खेत में बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो जैविक और रासायनिक उपाय अपनाकर समय पर उपचार कर सकते हैं.
कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि तापमान बढ़ने पर गेहूं में ब्राउन रस्ट बीमारी दिखाई देती है. इसे पत्तियों पर भूरे या नारंगी रंग के छोटे-छोटे धब्बों से पहचाना जा सकता है, जो लोहे में जंग जैसा दिखते हैं. बीमारी बढ़ने पर पत्तियां सूखने लगती हैं और दानों का विकास रुक जाता है. अगर किसान इस बीमारी का जैविक विधि से इलाज करना चाहते हैं, तो नीम तेल 3-5 मिली प्रति लीटर पानी मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं. वहीं, रासायनिक उपाय के तहत मैनकोजेब 2-2.5 ग्राम या टेबुकोनाजोल/हेक्साकोनाजोल 1 मिली प्रति लीटर पानी में छिड़काव करें. दरअसल, पीला रतुआ रोग ठंडे और नम मौसम में तेजी से फैलता है. पत्तियों पर सीधी लाइनों में पीली पाउडर जैसी परत दिखाई देती है. बचाव के लिए प्रोपिकोनाजोल या टेबुकोनाजोल का छिड़काव करें और नीम आधारित जैविक घोल का भी इस्तेमाल करें. इसके अलावा भी कई रोग गेहूं के लिए घातक हैं.
झुलसा रोग की कैसे करें पहचान
झुलसा रोग: इसमें पत्तियों पर अनियमित भूरे-पीले धब्बे बनते हैं. धीरे-धीरे पूरी पत्ती सूखकर जली हुई जैसी दिखती है. बड़े धब्बे पत्ती को नुकसान पहुंचाते हैं. बचाव के लिए मैनकोजेब का छिड़काव करें, या जैविक रूप से दशपर्णी अर्क या ट्राइकोडर्मा का उपयोग करें. इसी तरह कंडुआ रोग भी गेहूं की फसल के लिए नुकसानदेह है. यह बीज से फैलता है. गेहूं की बालियों में दानों की जगह काला पाउडर भर जाता है और पूरी बाली काली दिखती है. बचाव के लिए बुवाई से पहले बीज का कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलो या ट्राइकोडर्मा से उपचार करें.
जड़ें काली होकर सड़ जाती हैं
वहीं, जड़ सड़न भी गेहूं के लिए खात बीमारी है. इसमें पौधे पीले पड़ने लगते हैं और जड़ें काली होकर सड़ जाती हैं. मुख्य कारण खेत में जलभराव है. बचाव के लिए खेत में जल निकासी, नीम खली का इस्तेमाल और कार्बेन्डाजिम से उपचार जरूरी है. हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि नियमित देखभाल सबसे बड़ा इन रोगों से बचाव है. इसलिए किसान खेत का नियमित निरीक्षण करें. पत्तियों पर धारियां दिखें तो पीला रतुआ, लोहे की जंग जैसे धब्बे हों तो ब्राउन रस्ट, बड़े अनियमित धब्बे हों तो झुलसा, बाली काली हो तो कंडुआ और जड़ सूखने लगे तो जड़ सड़न समझें. समय पर पहचान और उपचार से नुकसान कम किया जा सकता है.