आम की खेती पर मंडरा रहा दीमक का खतरा, समय रहते नहीं किया बचाव तो पूरी बगिया हो सकती है बर्बाद

दीमक जमीन के अंदर रहकर जड़ों को चाटना शुरू करती है. धीरे-धीरे यह तने तक पहुंच जाती है और लकड़ी को खोखला बना देती है. बाहर से पेड़ ठीक दिख सकता है, लेकिन अंदर से वह कमजोर होता जाता है. पत्तियां पीली पड़ना, शाखाओं का सूखना और तने पर मिट्टी की परत दिखाई देना इसके शुरुआती संकेत हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 Feb, 2026 | 03:16 PM

Mango farming: आम की खेती किसानों के लिए सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि साल भर की उम्मीद और कमाई का जरिया होती है. एक पेड़ को फल देने लायक बनाने में कई साल लग जाते हैं. ऐसे में अगर दीमक जैसी समस्या लग जाए तो मेहनत पर पानी फिर सकता है. दीमक दिखने में छोटी होती है, लेकिन नुकसान बहुत बड़ा करती है. यह पेड़ की जड़ों और तने को अंदर ही अंदर खोखला कर देती है. जब तक किसान को इसकी भनक लगती है, तब तक पेड़ काफी कमजोर हो चुका होता है.

क्यों खतरनाक है दीमक?

दीमक जमीन के अंदर रहकर जड़ों को चाटना शुरू करती है. धीरे-धीरे यह तने तक पहुंच जाती है और लकड़ी को खोखला बना देती है. बाहर से पेड़ ठीक दिख सकता है, लेकिन अंदर से वह कमजोर होता जाता है. पत्तियां पीली पड़ना, शाखाओं का सूखना और तने पर मिट्टी की परत दिखाई देना इसके शुरुआती संकेत हैं. तेज हवा चलने पर ऐसे पेड़ गिर भी सकते हैं.

बगीचे की साफ-सफाई से ही आधी समस्या खत्म

दीमक अक्सर वहीं पनपती है जहां गंदगी और नमी ज्यादा हो. इसलिए आम के पेड़ों के आसपास सूखी पत्तियां, सड़ी-गली लकड़ियां या जैविक कचरा जमा न होने दें. समय-समय पर खेत की सफाई करते रहें.

पेड़ के नीचे दूसरी फसल लगाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे नमी बनी रहती है और दीमक को रहने का मौका मिलता है. अगर कुछ लगाना ही हो तो हल्दी बेहतर विकल्प है, क्योंकि यह कीटों को दूर रखने में मदद करती है. खरपतवार और अनावश्यक घास को नियमित रूप से हटाना भी जरूरी है. तने के पास उग रही छोटी-छोटी शाखाओं को काट दें ताकि दीमक को छिपने की जगह न मिले.

जैविक तरीके भी हैं असरदार

जो किसान रासायनिक दवाओं का कम इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे नीम खली और करंज खली का सहारा ले सकते हैं. इन्हें मिट्टी में मिलाने से न केवल दीमक का प्रकोप कम होता है, बल्कि मिट्टी की सेहत भी सुधरती है.

घरेलू उपाय के तौर पर बेकिंग सोडा और साबुन के पानी का घोल भी उपयोगी है. अगर तने में दीमक के छेद दिखें तो उस जगह यह घोल डालने से राहत मिल सकती है.

जब समस्या ज्यादा बढ़ जाए

अगर दीमक का असर गंभीर हो जाए तो दवाओं का प्रयोग जरूरी हो जाता है. छोटे पेड़ों के लिए करीब 10 ग्राम और बड़े पेड़ों के लिए 15 ग्राम रीजेंट अल्ट्रा इस्तेमाल किया जा सकता है.

क्लोरोपाइरीफास का छिड़काव भी प्रभावी तरीका है. 1 लीटर पानी में 3 मिलीलीटर दवा मिलाकर जड़ों और तने के आसपास डालें. इससे पहले दीमक की मिट्टी की सुरंगों को हटा देना चाहिए.

तने को मजबूत और सुरक्षित रखने के लिए चूने के घोल में 5 ग्राम ब्लिटोक्स और 2 मिलीलीटर क्लोरोपाइरीफास मिलाकर ब्रश से तने पर लेप किया जा सकता है. इससे दोबारा हमला होने की संभावना कम हो जाती है.

सावधानी ही सबसे बड़ा इलाज

आम का पेड़ कई सालों तक फल देता है, इसलिए उसकी देखभाल लगातार जरूरी है. महीने में एक बार पेड़ों की जांच करें. जड़ों के पास मिट्टी की हलचल या तने पर बदलाव दिखे तो तुरंत कार्रवाई करें. थोड़ी सी सतर्कता और समय पर उपचार से दीमक पर काबू पाया जा सकता है. अगर किसान नियमित देखभाल करें, तो उनकी बगिया लंबे समय तक स्वस्थ और फलदार बनी रह सकती है.

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