Haryana Farmers News: केंद्र और राज्य सरकारें जैविक खेती को बढ़ावा दे रही हैं. लेकिन, जैविक उत्पादों की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों और ग्राहक तक जैविक उत्पाद पहुंचाने की दिशा में हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री नायब सैनी ने राज्य में जैविक खेती कर रहे किसानों के कृषि उत्पादों को सर्टिफाई करने के लिए लैब स्थापित करने की घोषणा की है. इससे उत्पादों को प्रमाणित किया जा सकेगा और किसानों को ज्यादा कीमत मिलने का रास्ता साफ होगा. मुख्यमंत्री ने राज्य में स्मार्ट एग्रीकल्चर जोन बनाने की भी घोषणा की है.
हरियाणा में बड़े पैमाने पर ऑर्गेनिक खेती कराई जा रही है. राज्य के 1 लाख से ज्यादा किसानों ने जैविक खेती करने और इसके लिए योजनाओं के जरिए दी जा रही सब्सिडी पाने के लिए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है. लेकिन, करीब 11 हजार किसान ही पाए गए हैं जो वास्तव में जैविक खेती कर रहे हैं. वहीं, करीब 17 हजार एकड़ में जैविक फसलों की खेती की जा रही है. लेकिन, किसानों को अपने जैविक उत्पादों की बिक्री और सही कीमत मिलने में मुश्किलें देखी जा रही हैं.
जैविक कृषि उत्पादों को सर्टिफाई करने के लिए लैब बनेगी
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मीडिया से कहा कि जैविक उत्पादों को सर्टिफाइड करने के लिए लैब स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए ताकि किसानों को ऐसी फसलों के लिए बेहतर दाम मिल सकें. इसके लिए हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण (HKKP) को निर्देशित किया गया है कि वे किसानों को ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करें.
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5 हजार एकड़ में स्मार्ट एग्रीकल्चर जोन विकसित होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत लगभग 5,000 एकड़ में एक स्मार्ट एग्रीकल्चर जोन विकसित किया जाए. उन्होंने कहा कि इस जोन के किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए और उन्हें आश्वासन दिया जाना चाहिए कि उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा. टिकाऊ खेती के तरीकों पर जोर देते हुए उन्होंने प्रस्तावित स्मार्ट एग्रीकल्चर जोन में प्रभावी जल प्रबंधन के माध्यम से माइक्रो इरिगेशन सिस्टम अपनाने का आह्वान किया.
जैविक उत्पादों की कम कीमत मिलने पर सरकार देगी मुआवजा
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक उत्पादों की आम तौर पर प्रीमियम कीमतें मिलती हैं, लेकिन अगर आय में कोई नुकसान होता है तो राज्य सरकार किसानों को मुआवजा देगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्टिफाइड फसलों के लिए बेहतर बाजार मूल्य पक्का करने के लिए प्राकृतिक खेती के उत्पादों के सर्टिफिकेशन के लिए जल्द से जल्द एक लैब स्थापित की जानी चाहिए.
ब्लॉक स्तर पर सेमिनार करके किसानों को नई खेती विधियों की जानकारी दें
मुख्यमंत्री ने हाई क्वालिटी वाले बीजों के विकास के लिए भी निर्देश जारी किए. अधिकारियों को किसानों के बीच ज्ञान और नीतिगत पहलों को फैलाने के लिए ब्लॉक स्तर तक किसान बैठकों, कार्यशालाओं, सेमिनारों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों का कैलेंडर तैयार करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि अभियान चलाकर किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के प्रतिकूल प्रभावों के साथ-साथ प्राकृतिक खेती के लाभों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए.
महिला किसानों को योजनाओं का लाभ देने पर जोर
उन्होंने अधिकारियों से राज्य में महिलाओं को और सशक्त बनाने के लिए अधिक योजनाओं को महिला केंद्रित बनाने के लिए कहा. हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण की कई पहलों पर भी विस्तार से चर्चा की, जिसमें पायलट सहकारी खेती क्लस्टर, उन्नत जल निकासी तकनीकों का उपयोग, पीएम-कुसुम योजना के तहत फीडरों का सोलराइजेशन, फसल विविधीकरण, संयुक्त डेयरी परियोजनाएं, झींगा पालन को बढ़ावा देना, बकरी और भेड़ पालन, और खरीफ मौसम के दौरान तिलहन और दालों को प्रोत्साहन देना शामिल है.