मोदी सरकार ने 12 साल में 5 गुना बढ़ाया कृषि बजट, किसान कल्याण योजनाओं के लिए खोला खजाना

मोदी सरकार ने दावा किया है कि पिछले 12 वर्षों में कृषि बजट पांच गुना बढ़ाकर 1.4 लाख करोड़ रुपये किया गया है. पीएम-किसान के तहत 4.3 लाख करोड़ रुपये किसानों को दिए गए, जबकि खाद सब्सिडी 2.21 लाख करोड़ रुपये पहुंची. MSP खरीद, फसल बीमा, जैविक खेती, रिकॉर्ड उत्पादन और कृषि निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई.

नोएडा | Published: 11 Jun, 2026 | 07:56 AM

Modi Government 12 Years: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए पिछले 12 वर्षों में कृषि मंत्रालय का बजट लगभग 5 गुना बढ़ा दिया है. सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का बजट 1.4 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जबकि 2013-14 में यह बजट 27,663 करोड़ रुपये था. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बनने के अवसर पर जारी एक पुस्तिका में यह जानकारी दी गई है. ‘जनसेवा ही संकल्प’ नामक इस पुस्तिका में किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए पिछले 12 वर्षों में उठाए गए कदमों का उल्लेख किया गया है.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का कहना है कि कृषि बजट में बढ़ोतरी के साथ किसानों को विभिन्न योजनाओं, कृषि निवेश, आधुनिक तकनीक और अन्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के प्रयास किए गए हैं. इसके जरिए खेती को अधिक लाभकारी बनाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया गया है. केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र में हुई प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा है कि वर्ष 2014 से 2025 के बीच किसानों के लिए 3,000 जलवायु-अनुकूल (क्लाइमेट-रेजिलिएंट) फसल किस्में विकसित और जारी की गई हैं. इन किस्मों को बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों का बेहतर सामना करने के लिए तैयार किया गया है.

26 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी

सरकार के अनुसार, किसानों को संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों के उपयोग के लिए अब तक करीब 26 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड  (सॉयल हेल्थ कार्ड) जारी किए गए हैं. इससे किसानों को अपनी जमीन की उर्वरता के बारे में जानकारी मिल रही है और खाद के इस्तेमाल में दक्षता बढ़ी है. सरकार ने यह भी बताया कि फरवरी 2019 में शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत अब तक किसानों के खातों में 4.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है.

पात्र किसानों को 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता

PM-KISAN योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में दी जाती है. सरकार का कहना है कि इस योजना से करोड़ों किसानों को खेती और घरेलू जरूरतों के लिए वित्तीय सहायता मिल रही है. केंद्र सरकार ने कहा है कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए उर्वरक (खाद) पर दी जाने वाली सब्सिडी में बड़ा इजाफा किया गया है. वर्ष 2014-15 में खाद सब्सिडी का बजट 75,000 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 2024-25 में 2.21 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है.

यूरिया पर किसानों को करीब 90 प्रतिशत सब्सिडी

सरकार के अनुसार, यूरिया पर किसानों को करीब 90 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है. इसकी वजह से किसानों को 45 किलो की एक बोरी यूरिया केवल 266 रुपये में मिलती है, जबकि इसकी वास्तविक कीमत करीब 2,200 रुपये प्रति बोरी है. सरकार ने यह भी बताया कि पिछले 12 वर्षों में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य  (MSP) पर मुख्य रूप से गेहूं और धान की 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खरीद की गई है. इससे किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाने में मदद मिली है और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित हुआ है.

खाद्यान्न उत्पादन 3,577 लाख टन तक पहुंचा

इन प्रयासों के चलते देश में खाद्यान्न उत्पादन ने नया रिकॉर्ड बनाया है. वर्ष 2024-25 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 3,577 लाख टन तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है. सरकार के मुताबिक, कृषि क्षेत्र में निर्यात भी लगातार बढ़ा है. पिछले वित्त वर्ष में कृषि निर्यात का मूल्य लगभग 5 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वर्ष 2013-14 की तुलना में 37 प्रतिशत अधिक है. सरकार का कहना है कि इससे किसानों और कृषि क्षेत्र को वैश्विक बाजारों से बेहतर अवसर मिले हैं.

जैविक खेती को दिया बढ़ावा

केंद्र सरकार ने कहा है कि किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए फसल बीमा, जैविक खेती, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल कृषि जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बीमा सुरक्षा पाने वाले किसानों में 63 प्रतिशत किसान अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से हैं. यह योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है.

 

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