सूख रहे बैंगन के पौधों में फिर आई जान, नई तकनीक से किसानों को मिलेगा जबरदस्त उत्पादन

बैंगन की खेती में नई तकनीक किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. सूखी डालियों की कटिंग और नैनो यूरिया-नैनो DAP के इस्तेमाल से पौधों में तेजी से सुधार देखा जा रहा है. इससे मुरझाए पौधों में नई जान आ रही है और उत्पादन के साथ किसानों की कमाई भी बढ़ रही है.

नोएडा | Updated On: 27 May, 2026 | 05:09 PM

Brinjal Farming Tips: बैंगन की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. कई बार पौधों में फल कम लगने, पत्तियां सूखने और पौधों के मुरझाने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. लेकिन अब नई तकनीक और सही देखभाल से मुरझाए पौधों में भी दोबारा जान लाई जा सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार सूखी डालियों की समय-समय पर कटिंग और नैनो यूरिया व नैनो DAP के इस्तेमाल से बैंगन की फसल में तेजी से सुधार देखा जा रहा है. इससे उत्पादन बढ़ने के साथ बैंगन की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है.

सूखी डालियों की कटिंग से बढ़ा उत्पादन

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार (Pramod Kumar) के अनुसार बैंगन के पौधों  की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है. अगर किसी पौधे की पत्तियां सूखने लगें या डालियां मुरझा जाएं, तो उन्हें तुरंत काट देना चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि सूखी और कमजोर डालियां पौधे की ऊर्जा को कम करती हैं. इन्हें हटाने से पौधे की ताकत नई शाखाओं और फलों की ओर जाती है. इसके लिए बागवानी में इस्तेमाल होने वाले धारदार औजारों का उपयोग करना बेहतर माना जाता है. हर 8 से 10 दिन में पौधों की जांच कर सूखी शाखाओं को हटाने से पौधों की वृद्धि तेजी से होती है.

नैनो यूरिया और नैनो DAP का मिला फायदा

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार नैनो यूरिया और नैनो DAP  आधुनिक खेती में काफी प्रभावी साबित हो रहे हैं. ये बेहद छोटे नैनो पार्टिकल्स होते हैं, जो पौधों को तेजी से पोषण पहुंचाते हैं. इन्हें सिंचाई के पानी में घोलकर पौधों की जड़ों में दिया जाता है. नियमित इस्तेमाल से पौधों की वृद्धि तेज होती है और कमजोर पौधों में भी नई जान आने लगती है. विशेषज्ञों का दावा है कि इस तकनीक से कम समय में बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं. कई किसानों ने बताया कि पहले जहां एक पौधे में केवल एक-दो बैंगन लगते थे, वहीं अब एक पौधे में 6 से 8 बड़े और अच्छी गुणवत्ता वाले बैंगन मिल रहे हैं.

किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही तकनीक

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार का कहना है कि बैंगन की खेती में पौधों की देखभाल  सबसे अहम होती है. केवल खाद और पानी देने से अच्छी पैदावार नहीं मिलती, बल्कि समय-समय पर पौधों की सफाई और पोषण प्रबंधन भी जरूरी है. उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि पौधों में बीमारी या सूखापन दिखते ही तुरंत कार्रवाई करें. इससे फसल खराब होने से बच सकती है और उत्पादन में लगातार सुधार होता है. विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक छोटे और मध्यम किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि कम लागत में अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है.

Published: 27 May, 2026 | 10:00 PM

Topics: