नूंह में किसान रजिस्ट्रेशन सबसे कम, सिर्फ एक-तिहाई जुड़े.. एग्रीस्टैक में हरियाणा का सबसे पिछड़ा जिला बना

हरियाणा का नूंह जिला एग्रीस्टैक योजना के तहत किसान रजिस्ट्रेशन में सबसे पीछे है. 24 अगस्त तक सिर्फ 37.73 फीसदी पात्र किसानों की किसान आईडी बनी है. करीब 68 हजार किसान अभी रजिस्ट्रेशन से बाहर हैं. अधिकारियों के मुताबिक, आगे सब्सिडी, मुआवजा और बीमा का लाभ किसान आईडी से जुड़ सकता है. हालांकि, रजिस्ट्रेशन कराने से मौजूदा सरकारी लाभ प्रभावित नहीं होंगे.

नोएडा | Published: 5 Sep, 2026 | 12:26 PM

Haryana News: हरियाणा का नूंह जिला केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक योजना के तहत किसान रजिस्ट्रेशन के मामले में सबसे पीछे है. जिले के अब तक करीब एक-तिहाई पात्र किसान ही इस योजना से जुड़ पाए हैं. एग्रीस्टैक के तहत किसानों को किसान आईडी (Kisan ID) दी जाती है. यह एक डिजिटल पहचान है, जिसमें किसान की जमीन के रिकॉर्ड और व्यक्तिगत जानकारी जुड़ी होती है. इसका मकसद किसानों को सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, फसल बीमा और दूसरी कृषि सेवाओं का लाभ आसानी से दिलाना है.

हरियाणा की एग्रीस्टैक योजना में नूंह जिले का प्रदर्शन काफी खराब रहा है. 24 अगस्त तक जिले के 1,09,649 पात्र किसानों में से सिर्फ 37.73 फीसदी किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ है. यह राज्य के 60.14 फीसदी औसत से काफी कम है. इसके साथ ही नूंह किसान रजिस्ट्रेशन के मामले में हरियाणा का सबसे पिछड़ा जिला बन गया है. हाल ही में एक दिन में जिले के सिर्फ 334 किसानों ने योजना के तहत रजिस्ट्रेशन कराया. इससे पता चलता है कि योजना की रफ्तार काफी धीमी है.

किसान आईडी नहीं बनी तो योजनाओं का लाभ मिलने में आ सकती है दिक्कत

वहीं, महेंद्रगढ़ में 93.06 फीसदी और रेवाड़ी में 92.65 फीसदी पात्र किसानों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है. ये दोनों जिले राज्य में सबसे आगे हैं. गुरुग्राम में 77.62 फीसदी और फरीदाबाद में 74.29 फीसदी किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, जो राज्य के औसत से बेहतर है. अधिकारियों के मुताबिक, आगे चलकर सब्सिडी, फसल खराब होने पर मुआवजा और फसल बीमा के दावों का भुगतान किसान आईडी के जरिए ही किया जा सकता है. ऐसे में नूंह के करीब 68 हजार रजिस्ट्रेशन से बाहर किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं. किसान आईडी अनिवार्य होने के बाद पीएम-किसान सम्मान निधि की किस्तों पर भी असर पड़ सकता है.

किसान आईडी बनवाने से मौजूदा लाभ पर नहीं पड़ेगा असर

उपायुक्त अखिल पिलानी ने साफ किया है कि किसान आईडी बनवाने से किसानों को पहले से मिल रहे किसी भी लाभ पर असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन कराने से बीपीएल कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन और पीएम-किसान सम्मान निधि की किस्तों जैसी मौजूदा सुविधाएं बंद या प्रभावित नहीं होंगी. किसान अपनी किसान आईडी बनवाने के लिए नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. इसके लिए किसानों को अपना आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और जमीन से जुड़े दस्तावेज साथ ले जाने होंगे. रजिस्ट्रेशन के दौरान आधार से पहचान की पुष्टि और ओटीपी वेरिफिकेशन किया जाएगा. इसके बाद किसान की कृषि भूमि का रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से उसकी व्यक्तिगत जानकारी से जोड़ा जाएगा.

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