सरकारी सिस्टम से परेशान किसान ने जहर खाकर दी जान, कई दिनों से था तनाव में
ओडिशा के नुआपाड़ा में किसान नेपाल माझी की आत्महत्या के बाद किसानों ने NH-353 जाम कर विरोध प्रदर्शन किया. धान खरीद में देरी और आर्थिक संकट को कारण बताया गया. किसानों ने 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की. प्रशासन ने आश्वासन देकर जाम हटवाया और मंडी से धान उठाने की कार्रवाई शुरू की.
Farmer Suicides: ओडिशा में किसानों की आत्महत्या करने के मामले कम होने के नाम नहीं ले रहे हैं. ताजा मामला नुआपाड़ा में जिले में सामने आया है, जहां एक किसान ने जहर खाकर अपनी जान दे दी. इससे नाराज किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-353 को जाम कर दिया. इससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब पांच घंटे तक यातायात बाधित रहा. नाराज किसानों का कहना है कि मृतक के परिवार को सरकारी मुआवजा मिलना चाहिए, क्योंकि उसने सिस्टम से परेशान होकर खुदकुशी की है.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मृत किसान की पहचान 45 वर्षीय नेपाल माझी के रूप में हुई है, जो कोमना क्षेत्र के जदामुंडा गांव का रहने वाला था. बताया जा रहा है कि नेपाल माझी ने सोमवार को जहर खा लिया था और इलाज के दौरान नुआपाड़ा जिला अस्पताल में उनकी मौत हो गई. परिवार का आरोप है कि धान खरीद के लिए टोकन मिलने के बावजूद लंबे समय तक खरीद नहीं होने से वे आर्थिक संकट में थे.
किसानों ने NH-353 को जाम कर दिया
किसान की मौत के बाद सैकड़ों ग्रामीणों और किसानों ने NH-353 को जाम कर दिया और परिवार के लिए मुआवजे तथा मंडियों में पड़े धान की तुरंत खरीद की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसान नेपाल माझी ने इस रबी सीजन में तीन एकड़ में धान और दो एकड़ में मूंगफली की खेती की थी. उन्हें 30 मई को 36.96 क्विंटल धान बेचने के लिए टोकन भी मिला था, लेकिन 24 दिन बीतने के बाद भी उनकी फसल की खरीद नहीं हो पाई.
घर के खर्च और तीन बच्चों की पढ़ाई का आर्थिक दबाव
परिजनों के अनुसार, किसान पर ट्रैक्टर और थ्रेसर के किराए, घर के खर्च और तीन बच्चों की पढ़ाई का काफी आर्थिक दबाव था. सोमवार को वे जदामुंडा मंडी से धान की खरीद की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में भी शामिल हुए थे. घर लौटने के बाद आर्थिक परेशानियों को लेकर उनका परिवार से विवाद भी हुआ. बताया जा रहा है कि धान की बिक्री में देरी और बढ़ते कर्ज से परेशान होकर उन्होंने जहर खा लिया. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
किसानों का क्या है गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि 25 मई से धान की खरीद शुरू होने के बावजूद जिले की कई मंडियों में हजारों बोरे धान अब भी पड़े हुए हैं और उनकी खरीद नहीं हो पा रही है. हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद सड़क जाम हटा लिया गया.
20 लाख रुपये मुआवजे की मांग
उप-जिलाधिकारी सुरमी सोरेन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने किसान नेपाल माझी के परिवार के लिए 20 लाख रुपये मुआवजे, मंडियों से धान उठाने और बच्चों की शिक्षा में मदद की मांग की है. प्रशासन ने तुरंत तीन वाहनों को मंडी से धान उठाने के लिए भेज दिया. इसके साथ ही रेड क्रॉस फंड से परिवार को 50,000 रुपये की सहायता दी गई है, जबकि बाकी मुआवजे पर आगे विचार किया जाएगा.