घटिया खाद डालने से फसल खराब होने का केस हारे किसान, कोर्ट में उर्वरक कंपनी दोषमुक्त
Onion Farmers vs Pawar Agro Services: साल 2022 में खाद डालने से प्याज फसल खराब होने के मामले में किसानों को कोर्ट में अब हार का सामना करना पड़ा है. महाराष्ट्र में कंज्यूमर कोर्ट ने मामले में खाद कंपनी को दोषमुक्त कर दिया है.
Maharashtra News: महाराष्ट्र की एक उपभोक्ता अदालत ने फसल खराब होने के मामले में उर्वरक कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया है. उपभोक्ता अदालत ने जिला फोरम के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक उर्वरक कंपनी को प्याज की फसल खराब होने पर एक दर्जन से ज्यादा किसानों को मुआवजा देने के लिए कहा गया था. अदालत ने माना कि खराब पैदावार की वजह पर्यावरणीय कारण हो सकते हैं.
2022 में किसानों की प्याज फसल खराब होने का मामला
साल 2022 के मामले में किसानों को कोर्ट में अब हार का सामना करना पड़ा है. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र के स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने पिछले महीने दिए अपने आदेश में कहा कि फर्टिलाइजर को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि एक नेशनल लैबोरेटरी ने इसकी क्वालिटी को सर्टिफाई किया था. कमीशन ने मैन्युफैक्चरर रामा कृषि रसायन और रिटेलर पवार एग्रो सर्विसेज की नासिक डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन के 2024 के फैसले के खिलाफ फाइल की गई अपील को स्वीकार कर लिया.
निजी कंपनी की खाद डालने से 70 फीसदी फसल चौपट
नासिक जिले के कई किसानों ने अलग-अलग पिटीशन के साथ डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने पवार एग्रो सर्विसेज से खरीदा सुपर फॉस्फेट फर्टिलाइजर इस्तेमाल किया था, लेकिन इसके इस्तेमाल के बावजूद उनकी प्याज की फसल खराब हो गई. शिकायतों के बाद तालुका लेवल की कंप्लेंट रिड्रेसल कमेटी ने 15 सितंबर 2022 को एक सर्वे किया, जिसमें 60-70% फसल नुकसान की रिपोर्ट दी गई.
जिला उपभोक्ता फोरम ने किसानों के पक्ष में सुनाया था फैसला
डिस्ट्रिक्ट कमीशन ने नासिक में फर्टिलाइजर कंट्रोल लैबोरेटरी की सैंपल को नॉन स्टैंडर्ड बताने वाली शुरुआती रिपोर्ट के बाद मैन्युफैक्चरर और रिटेलर को पिटीशनर्स को मुआवजा देने का आदेश दिया. फर्टिलाइजर कंपनी ने स्टेट कमीशन में अपील की, जिसमें कहा गया कि किसानों ने कोई सबूत नहीं दिया कि उसके बनाए फर्टिलाइजर का इस्तेमाल प्याज की खेती के लिए किया गया था.
कंपनी राज्य उपभोक्ता फोरम पहुंची और फैसले के विरुद्ध अपील
फर्म ने कहा कि तालुका कंप्लेंट रिड्रेसल कमेटी की रिपोर्ट बेबुनियाद थी, जो फर्म के रिप्रेजेंटेटिव की गैरमौजूदगी में तैयार की गई थी क्योंकि उन्हें जॉइंट सर्वे के लिए नहीं बुलाया गया था. स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन के सामने सुनवाई के दौरान फर्म ने नेशनल टेस्ट हाउस (ER), कोलकाता की एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें कन्फर्म किया गया कि सुपर फॉस्फेट फर्टिलाइजर में कोई क्वालिटी की दिक्कत नहीं थी.
स्टेट कमीशन ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट कमीशन फर्टिलाइजर कंपनी के थर्ड पार्टी रीवेरिफिकेशन के पेंडिंग रिक्वेस्ट का हिसाब देने में फेल रहा. अगर उसने नेशनल टेस्ट हाउस (ER) की रिपोर्ट का इंतजार किया होता तो ऑर्डर अलग होता.
कम उत्पादन के लिए खाद जिम्मेदार नहीं, पर्यावरण भी वजह
कमीशन ने कहा कि लोकल एग्रीकल्चरल डिपार्टमेंट का शुरुआती इंस्पेक्शन मैन्युफैक्चरर को पहले से नोटिस दिए बिना किया गया था. आयोग ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि भले ही प्रोडक्शन कम रहा हो, लेकिन इसके लिए फर्टिलाइजर को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. इसके अलग-अलग एनवायरनमेंटल कारण हो सकते हैं.