Maize Farming: इस खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश में मक्के की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि, कर्नाटक और महाराष्ट्र में कम बारिश और मॉनसून में देरी के कारण बुवाई प्रभावित हुई है. इसी वजह से देश में कुल मक्के का रकबा पिछले साल के मुकाबले कम है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई तक देश में 67.89 लाख हेक्टेयर में मक्के की बुवाई हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 71.5 लाख हेक्टेयर थी. यानी इस बार मक्के का कुल रकबा करीब 5 फीसदी कम है.
मध्य प्रदेश में मक्का बुवाई में बढ़ोतरी देखने को मिली. यहां 23.37 लाख हेक्टेयर में मक्के की बुवाई हुई, जो पिछले साल के 19 लाख हेक्टेयर की तुलना में 23 फीसदी अधिक है. वहीं, कर्नाटक में कम बारिश की वजह से मक्के की बुवाई करीब 30 फीसदी घटकर 9.43 लाख हेक्टेयर रह गई. महाराष्ट्र में भी मक्के का रकबा 5.1 फीसदी घटकर 9.59 लाख हेक्टेयर रह गया.
राजस्थान में कम हुआ मक्का का रकबा
इसके अलावा राजस्थान, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में भी मक्के की बुवाई में गिरावट दर्ज की गई है. जबकि आंध्र प्रदेश और बिहार में मक्के का रकबा पिछले साल की तुलना में मामूली बढ़ा है. मक्का उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो के असर और कई राज्यों में समय पर बुवाई नहीं होने की वजह से इस साल मक्के का उत्पादन कम रह सकता है.
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किसानों को MSP से कम कीमत पर मक्का बेचना पड़ा
CLFMA ऑफ इंडिया के चेयरमैन दिव्या कुमार गुलाटी ने बिजनेसलाइन से कहा कि पिछले साल कई जगह किसानों को MSP से कम कीमत पर मक्का बेचना पड़ा था. वहीं, इस समय सोयाबीन के अच्छे दाम मिल रहे हैं. ऐसे में कई किसान मक्के की बजाय सोयाबीन की खेती की ओर रुख कर सकते हैं. वहीं, CLFMA ऑफ इंडिया के डिप्टी चेयरमैन और कर्नाटक पोल्ट्री फार्मर्स एंड ब्रीडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन पसुपार्थी ने कहा कि इस साल पशु आहार (लाइवस्टॉक फीड) उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति बन सकती है. उन्होंने कहा कि मक्के की बुवाई में देरी हुई है और कुल रकबा भी कम रहने की आशंका है. इसके कारण नई फसल की आवक भी करीब एक महीने देर से, यानी दिसंबर के आसपास शुरू होने की उम्मीद है.
मक्के के उत्पादन पर बहुत असर पड़ने की संभावना नहीं
एथेनॉल उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि खरीफ सीजन में मक्के के उत्पादन पर बहुत बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि मक्का ऐसी फसल है जिसे दूसरी फसलों की तुलना में कम पानी की जरूरत होती है. सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे राज्यों में मक्के की फसल की स्थिति फिलहाल सामान्य बनी हुई है और वहां उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं दिख रहा है. वहीं, कर्नाटक पोल्ट्री फार्मर्स एंड ब्रीडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और CLFMA ऑफ इंडिया के डिप्टी चेयरमैन नवीन पसुपार्थी ने कहा कि देश की 14 पोल्ट्री एसोसिएशनों ने मिलकर मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों का डिजिटल सर्वे शुरू किया है. इस सर्वे का उद्देश्य फसलों की मौजूदा स्थिति का आकलन करना और इस साल के संभावित उत्पादन का सही अनुमान लगाना है.