धान की बालियां आते ही मंडराया खतरा! इस समय की एक गलती भारी पड़ेगी

धान में बालियां निकलने से पहले गभोट अवस्था बेहद अहम होती है. इस समय सही पोषण मिलने से बालियों और दानों का विकास बेहतर हो सकता है. कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक, बोरॉन, पोटाश और नैनो यूरिया का इस्तेमाल फसल की जरूरत के अनुसार सावधानी से किया जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 6 Sep, 2026 | 11:30 PM

धान की फसल में बालियां निकलने का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस अवस्था में पौधे को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिलने पर बालियों और दानों के विकास पर असर पड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को धान की फसल में गभोट अवस्था की पहचान कर समय पर पोषक तत्वों का छिड़काव करना चाहिए. सही समय पर पोषण देने से फसल की वृद्धि, बालियों के विकास और दानों की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

गभोट अवस्था में छिड़काव क्यों जरूरी?

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, जब धान की फसल  में बालियां निकलने वाली होती हैं, तब पौधे की पोषण संबंधी जरूरत बढ़ जाती है. इस अवस्था को गभोट या गर्भावस्था की अवस्था कहा जाता है. इस दौरान पौधे के अंदर बालियां विकसित हो रही होती हैं, इसलिए पोषक तत्वों की उपलब्धता महत्वपूर्ण हो जाती है. किसानों को बालियां पूरी तरह बाहर निकलने का इंतजार करने के बजाय गभोट अवस्था में ही फसल की स्थिति देखकर छिड़काव की योजना बनानी चाहिए. इससे पौधे को जरूरी पोषण सही समय पर मिल सकता है.

एक एकड़ में इन पोषक तत्वों का इस्तेमाल

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, एक एकड़ धान की फसल के लिए छिड़काव  में 250 ग्राम बोरॉन, करीब 500 ग्राम पोटाश NPK 0:50:50 और 1 लीटर नैनो यूरिया का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, इन उत्पादों की मात्रा फसल की स्थिति, मिट्टी की जरूरत और संबंधित उत्पाद के लेबल निर्देशों के अनुसार तय करनी चाहिए. बिना जरूरत किसी भी पोषक तत्व का अधिक इस्तेमाल फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है. किसान सामान्य स्प्रेयर के साथ ड्रोन से भी समान रूप से छिड़काव कर सकते हैं.

दानों के विकास में पोषक तत्वों की भूमिका

धान की गभोट अवस्था में बोरॉन, पोटाश और नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्व पौधे के लिए उपयोगी  हो सकते हैं. बोरॉन पौधे में प्रजनन विकास और दानों के बेहतर विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व है. वहीं पोटाश पौधे की मजबूती और दानों की गुणवत्ता बनाए रखने में भूमिका निभाता है. नैनो यूरिया पौधे को नाइट्रोजन उपलब्ध कराने का एक माध्यम है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार का कहना है कि इनका इस्तेमाल खेत की वास्तविक पोषण जरूरत को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए.

ऐसे पहचानें धान की गभोट अवस्था

गभोट अवस्था की सही पहचान किसानों के लिए सबसे जरूरी है. इस समय धान के पौधे का तना सामान्य अवस्था की तुलना में मोटा और गोल दिखाई देने लगता है. पौधे के अंदर बालियां विकसित हो रही होती हैं, लेकिन वे अभी पूरी तरह बाहर नहीं आई होतीं. कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, गभोट अवस्था शुरू होने के बाद लगभग 10 दिनों के भीतर आवश्यक पोषक तत्वों का छिड़काव पूरा कर लेना उपयोगी हो सकता है. किसानों को खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए और फसल में किसी बीमारी, कीट या पोषक तत्व की कमी के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.

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Published: 6 Sep, 2026 | 11:30 PM