ट्रैक्टर का कूलिंग सिस्टम: कैसे रखता है इंजन को ठंडा और लंबे समय तक ताकतवर?

कूलिंग सिस्टम इंजन की अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालकर तापमान को संतुलित रखता है. इससे ट्रैक्टर की ताकत बनी रहती है और वह लंबे समय तक बिना दिक्कत काम करता है. सही तापमान पर चलने वाला इंजन ईंधन भी कम खर्च करता है और उसकी उम्र भी बढ़ती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 21 Feb, 2026 | 08:54 AM

Tractor cooling system: गांव की सुबह हो या दोपहर की तपती धूप, खेत में सबसे पहले जिस मशीन की आवाज सुनाई देती है, वह है ट्रैक्टर. किसान के लिए यह सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि मेहनत का सच्चा साथी है. घंटों तक लगातार जुताई करना, भारी ट्रॉली खींचना या कड़ी मिट्टी को पलटना ट्रैक्टर हर काम बिना रुके करता है. लेकिन कभी आपने सोचा है कि इतना काम करने के बाद भी इसका इंजन जलता क्यों नहीं? इसका राज छिपा है उसके कूलिंग सिस्टम में.

इंजन जब चलता है तो उसके अंदर डीजल जलता है और तेज गर्मी पैदा होती है. अगर यह गर्मी बाहर न निकले तो इंजन के पुर्जे खराब हो सकते हैं. यही वजह है कि ट्रैक्टर में एक खास व्यवस्था लगाई जाती है, जिसे कूलिंग सिस्टम कहते हैं. यह इंजन को जरूरत से ज्यादा गर्म होने से बचाता है.

क्यों जरूरी है कूलिंग सिस्टम

सोचिए अगर इंजन बहुत ज्यादा गर्म हो जाए तो क्या होगा? पिस्टन जाम हो सकता है, गास्केट जल सकता है या इंजन पूरी तरह बंद हो सकता है. ऐसी स्थिति में ट्रैक्टर खेत के बीचों-बीच रुक जाए तो किसान के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है.

कूलिंग सिस्टम इंजन की अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालकर तापमान को संतुलित रखता है. इससे ट्रैक्टर की ताकत बनी रहती है और वह लंबे समय तक बिना दिक्कत काम करता है. सही तापमान पर चलने वाला इंजन ईंधन भी कम खर्च करता है और उसकी उम्र भी बढ़ती है.

कैसे काम करता है यह सिस्टम

ट्रैक्टर का कूलिंग सिस्टम एक समझदार चक्र की तरह काम करता है. इसमें एक तरल पदार्थ भरा होता है, जिसे कूलैंट कहा जाता है. यह पानी और एंटीफ्रीज का मिश्रण होता है. जब इंजन गर्म होता है, तो यह कूलैंट इंजन के अंदर घूमकर उसकी गर्मी को अपने अंदर खींच लेता है. फिर यह गर्म कूलैंट रेडिएटर तक पहुंचता है. रेडिएटर में पतली जालियां होती हैं, जिनसे होकर हवा गुजरती है. हवा के संपर्क में आते ही कूलैंट की गर्मी बाहर निकल जाती है और वह दोबारा ठंडा हो जाता है. फिर यही ठंडा कूलैंट वापस इंजन में चला जाता है. यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है.

वाटर पंप कूलैंट को घुमाने का काम करता है. थर्मोस्टेट नाम का एक छोटा वाल्व तापमान को नियंत्रित करता है. जब इंजन ठंडा होता है तो थर्मोस्टेट बंद रहता है, ताकि इंजन जल्दी गर्म हो सके. जैसे ही तापमान बढ़ता है, यह खुल जाता है और कूलैंट रेडिएटर की ओर बहने लगता है.

रेडिएटर के साथ लगा पंखा भी अहम भूमिका निभाता है. जब ट्रैक्टर भारी काम कर रहा हो या मौसम बहुत गर्म हो, तब यह पंखा ज्यादा तेजी से घूमकर इंजन को ठंडा रखने में मदद करता है.

इसके फायदे जो किसान महसूस करते हैं

सही कूलिंग सिस्टम की वजह से ट्रैक्टर बिना रुके काम करता है. इंजन ओवरहीट नहीं होता, जिससे बड़ी खराबी का खतरा कम हो जाता है. ट्रैक्टर की खींचने की ताकत बनी रहती है और डीजल की खपत भी संतुलित रहती है. कुल मिलाकर, किसान को कम खर्च में ज्यादा काम मिल जाता है.

रखरखाव क्यों है जरूरी

अगर कूलिंग सिस्टम की देखभाल न की जाए तो परेशानी शुरू हो सकती है. समय के साथ कूलैंट गंदा हो सकता है या कम हो सकता है. रेडिएटर में धूल भर जाने से हवा का रास्ता बंद हो सकता है. पाइप में लीकेज होने पर कूलैंट बाहर निकल सकता है.

इसलिए हफ्ते में एक बार कूलैंट का स्तर जरूर देखना चाहिए. जरूरत हो तो सही कंपनी का कूलैंट ही डालें. रेडिएटर को साफ रखें और पाइपों में दरार या रिसाव की जांच करते रहें. छोटी सी लापरवाही आगे चलकर बड़ा खर्च बन सकती है.

खराबी के संकेतों को न करें नजरअंदाज

अगर ट्रैक्टर थोड़ी देर में ही गर्म होने लगे, रेडिएटर से भाप निकले या बार-बार कूलैंट कम हो जाए, तो समझिए कुछ गड़बड़ है. इंजन की ताकत कम लगना भी एक संकेत हो सकता है. ऐसे में तुरंत मैकेनिक को दिखाना समझदारी है.

नई तकनीक से और सुरक्षित

आजकल कई नए ट्रैक्टरों में स्मार्ट कूलिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं. इनमें सेंसर लगे होते हैं, जो इंजन का तापमान खुद जांचते हैं और जरूरत के अनुसार पंखे की गति बढ़ा देते हैं. इससे इंजन ज्यादा सुरक्षित रहता है और ईंधन की बचत भी होती है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

आम में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला विटामिन कौन सा है?