खेती में लागत होगी कम, किसानों की बढ़ेगी कमाई.. अब जलवायु प्रतिरोधी किस्में मचाएंगी धमाल

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये नई किस्में किसानों की पैदावार बढ़ाने, खेती की लागत  कम करने और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए विकसित की गई हैं. अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों के किसानों को इससे बेहतर उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता का लाभ मिलेगा.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 4 Jan, 2026 | 05:46 PM

New Crop Variety: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में राष्ट्र को समर्पित करने के बाद कहा कि भारत ने उच्च उत्पादक बीजों के विकास में बड़ी सफलता हासिल की है. उन्होंने बताया कि 1969 से अब तक 7,205 फसल किस्मों को अधिसूचित किया जा चुका है, जिनमें धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन और अन्य फसलें शामिल हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 11- 12 वर्षों में बीज विकास की रफ्तार और तेज हुई है और इस दौरान 3,236 नई उच्च उत्पादक किस्मों को मंजूरी मिली है. अब लॉन्च की गई 184 उन्नत किस्में किसानों को ज्यादा उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और जलवायु से मुकाबला करने में मदद करेंगी.

उन्होंने कहा कि इन किस्मों के विकास में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, राज्य और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों तथा निजी बीज कंपनियों ने मिलकर अहम भूमिका निभाई है. सूखा सहनशील, लवणीय और क्षारीय मिट्टी में उगने वाली और रोग-कीट प्रतिरोधी किस्में  किसानों को बदलते मौसम और जलवायु संकट से सुरक्षा देंगी. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ऐसे बीजों के दम पर भारत कृषि में एक नई क्रांति के दौर में प्रवेश कर चुका है.

भारत कृषि में नई क्रांति के दौर में प्रवेश कर चुका है

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उच्च उत्पादक और जलवायु सहनशील बीजों  के दम पर भारत कृषि में नई क्रांति के दौर में प्रवेश कर चुका है. उन्होंने बताया कि यह सफलता आईसीएआर की अखिल भारतीय समन्वित परियोजनाओं, राज्य और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों तथा निजी बीज कंपनियों के साझा प्रयासों का नतीजा है. हाल में विकसित 184 नई किस्मों में आईसीएआर की संस्थाओं ने 60, विश्वविद्यालयों ने 62 और निजी क्षेत्र ने 62 किस्मों का योगदान दिया है.

उपभोक्ताओं को अच्छी गुणवत्ता का अनाज मिलेगा

मंत्री ने कहा कि इन नई किस्मों में सूखा, बाढ़, लवणीयता और रोग-कीट प्रतिरोध जैसे गुण हैं, जिससे बदलते मौसम में भी स्थिर उत्पादन संभव होगा. इनमें बेहतर पैदावार, गुणवत्ता और पोषण के साथ प्रसंस्करण की क्षमता भी है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और उपभोक्ताओं को अच्छी गुणवत्ता का अनाज मिलेगा. उन्होंने इसे ‘लैब से खेत’ तक पहुंचने का सफल मॉडल बताया.

बेहतर उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता का लाभ मिलेगा

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये नई किस्में किसानों की पैदावार बढ़ाने, खेती की लागत  कम करने और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए विकसित की गई हैं. अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों के किसानों को इससे बेहतर उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता का लाभ मिलेगा. उन्होंने कहा कि इन उन्नत किस्मों के बड़े पैमाने पर उपयोग से लागत घटेगी, उपज बढ़ेगी और किसानों की आय में साफ बढ़ोतरी होगी. साथ ही, बेहतर बीजों की उपलब्धता से देश की खाद्य-पोषण सुरक्षा और कृषि निर्यात क्षमता भी मजबूत होगी.

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Published: 4 Jan, 2026 | 05:45 PM

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