Vegetable Cultivation: फरवरी-मार्च में करें खीरे की अगेती खेती, कम समय में पाएं शानदार मुनाफा

फरवरी और मार्च में खीरे की अगेती खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छी कमाई का मौका बन रही है. सही बीज, उचित देखभाल और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है. बाजार में जल्दी फसल आने से दाम भी अच्छे मिलते हैं, जिससे मुनाफा बढ़ता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 21 Feb, 2026 | 06:00 AM

Early Cucumber Farming: आज खेती सिर्फ धान और गेहूं तक सीमित नहीं रही. किसान अब ऐसी फसलों की तलाश में हैं, जो कम समय में ज्यादा मुनाफा दें. इसी कड़ी में खीरे की अगेती खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. खासकर फरवरी के आखिरी हफ्ते और मार्च की शुरुआत में अगर इसकी बुवाई की जाए, तो अप्रैल-मई तक फसल तैयार हो जाती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. कम लागत, कम समय और बढ़िया दाम-इसी वजह से खीरा किसानों के लिए फायदे का सौदा बनता जा रहा है.

सही किस्म और सही समय है सफलता की चाबी

विशेषज्ञों के अनुसार अगेती खीरे की खेती  के लिए उन्नत बीज का चुनाव बहुत जरूरी है. अच्छी किस्म के बीज से रोग कम लगते हैं और उत्पादन ज्यादा मिलता है. पंत संकर-1, पूसा संयोग और स्वर्णा शीतल जैसी किस्में बेहतर मानी जाती हैं. इनमें से कुछ किस्में ज्यादा उपज और अच्छी क्वालिटी के लिए जानी जाती हैं. फरवरी-मार्च का मौसम खीरे के लिए अनुकूल रहता है. इस समय तापमान संतुलित  होता है, जिससे बीज जल्दी अंकुरित होते हैं और पौधों की बढ़वार अच्छी होती है. अगर किसान समय पर बुवाई कर दें, तो उन्हें बाजार में जल्दी फसल बेचने का फायदा मिलता है.

ऐसे करें खेती, मिलेगी ज्यादा पैदावार

खीरे के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी  सबसे बेहतर मानी जाती है, जहां पानी जमा न हो. सबसे पहले खेत की अच्छी जुताई कर उसे समतल कर लें. हर गड्ढे में 3 से 4 बीज डालें. अंकुर निकलने के बाद दो मजबूत पौधे छोड़ दें और बाकी हटा दें, ताकि पौधों को सही पोषण मिल सके. खाद का संतुलित उपयोग जरूरी है. सड़ी हुई गोबर की खाद खेत में डालें. इसके अलावा जरूरत के अनुसार यूरिया, डीएपी और पोटाश का इस्तेमाल करें. पहली खाद बुवाई के समय, दूसरी पत्तियां निकलने पर और तीसरी फूल आने के समय देना फायदेमंद रहता है.

मचान विधि से बढ़ेगा उत्पादन

खीरे की खेती  में मचान विधि काफी फायदेमंद मानी जाती है. इसमें खंभे गाड़कर जाली या तार बांध दिया जाता है, जिससे बेल ऊपर की ओर चढ़ती है. इससे फल जमीन से दूर रहते हैं, सड़न कम होती है और आकार भी अच्छा आता है. अगर मचान संभव न हो, तो नाली विधि भी अपनाई जा सकती है. इसमें बीच में नाली बनाकर दोनों तरफ बीज बोए जाते हैं, जिससे सिंचाई और देखभाल आसान हो जाती है.

सिंचाई हल्की और समय-समय पर करें. ज्यादा पानी देने से जड़ों को नुकसान हो सकता है. सही देखभाल और वैज्ञानिक तरीके अपनाने पर एक एकड़ में 70 से 80 हजार रुपये तक मुनाफा कमाया जा सकता है. कम समय में बेहतर आमदनी देने के कारण अगेती खीरे की खेती किसानों के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बनती जा रही है.

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Published: 21 Feb, 2026 | 06:00 AM

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