Farming Tips: गर्मी का मौसम आते ही अगर किसी सब्जी की सबसे ज्यादा मांग बढ़ती है, तो वह खीरा है. ठंडक देने वाला, पानी से भरपूर और सेहत के लिए फायदेमंद खीरा आज सिर्फ सलाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी खेती किसानों के लिए भी कमाई का अच्छा जरिया बन चुकी है. बाजार में हर समय ताजा खीरे की जरूरत रहती है, इसलिए किसान अब ऐसी किस्मों की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिनकी पैदावार अच्छी हो, स्वाद बेहतरीन हो और ग्राहक दोबारा खरीदने पर मजबूर हो जाएं.
खीरा पोषण से भरपूर सब्जी है. इसमें मोलिब्डेनम, विटामिन सी, विटामिन के और भरपूर मात्रा में पानी होता है, जो शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ त्वचा, किडनी और दिल की सेहत को भी बेहतर बनाता है. यही वजह है कि शहरों से लेकर गांवों तक इसकी खपत लगातार बढ़ रही है. अब आइए जानते हैं खीरे की उन किस्मों के बारे में, जो खेती और बाजार दोनों के लिहाज से सबसे ज्यादा पसंद की जाती हैं.
पंजाब खीरा-1: पॉलीहाउस में शानदार उत्पादन
पंजाब खीरा-1 एक ऐसी किस्म है, जिसे खास तौर पर पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस खेती के लिए विकसित किया गया है. इस किस्म का पौधा तेजी से बढ़ता है और हर गांठ पर एक से दो फल आसानी से आ जाते हैं. इसकी खास बात यह है कि इसके फूल बिना परागण के भी फल बना लेते हैं, जिससे उत्पादन पर मौसम का असर कम पड़ता है. इसके फल गहरे हरे रंग के, चिकने और लगभग 13 से 15 सेंटीमीटर लंबे होते हैं, जो देखने में भी आकर्षक लगते हैं. यह किस्म बुवाई के करीब डेढ़ से दो महीने बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है और सही देखभाल में इसकी पैदावार काफी अच्छी मानी जाती है.
पंजाब नवीन: स्वाद और कुरकुरेपन का बेहतरीन मेल
पंजाब नवीन किस्म की पहचान इसके कुरकुरे स्वाद और मुलायम गूदे से होती है. इसके फल हल्के हरे रंग के होते हैं और पूरी तरह विकसित होने पर भी इनमें कड़वाहट नहीं आती. इस किस्म में बीज बहुत कम या ना के बराबर होते हैं, जिससे ग्राहक इसे खाना ज्यादा पसंद करते हैं. इसमें विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है, जो इसे सेहत के लिहाज से भी खास बनाती है. यही वजह है कि होटल, ढाबे और सब्जी मंडियों में इसकी मांग बनी रहती है. कम समय में तैयार होने के कारण किसान इसे जल्दी बाजार में उतार सकते हैं.
पुसा उदय: संतुलित उत्पादन और भरोसेमंद किस्म
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित पुसा उदय किस्म किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है. इसके फल हल्के हरे रंग के और मध्यम लंबाई के होते हैं. यह किस्म कम समय में तैयार हो जाती है और इसकी खेती खुले खेतों में आसानी से की जा सकती है. सही खाद और सिंचाई प्रबंधन से इसमें स्थिर और संतुलित पैदावार मिलती है, जिससे किसान को जोखिम कम रहता है.
पुसा बरखा: बारिश के मौसम की मजबूत साथी
पुसा बरखा किस्म खास तौर पर खरीफ मौसम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है. यह नमी और ज्यादा तापमान को अच्छी तरह सहन कर लेती है. साथ ही, पत्तों पर लगने वाली कई सामान्य बीमारियों के प्रति इसमें सहनशीलता पाई जाती है. यही वजह है कि बारिश के मौसम में भी इसकी फसल सुरक्षित रहती है और उत्पादन प्रभावित नहीं होता.