प्याज के दाम में बड़ा उछाल! 15 दिन में भाव दोगुना, 65 रुपये किलो पहुंचा रेट
कोलकाता में प्याज के दाम दो हफ्तों में लगभग दोगुने होकर 60-65 रुपये किलो पहुंच गए हैं. कारोबारियों को दुर्गा पूजा और दिवाली के दौरान कीमतों में और तेजी की आशंका है. बंगाल में प्याज का उत्पादन मांग से कम है और खरीफ फसल नहीं होती. जुलाई से स्थानीय सप्लाई घटने के कारण राज्य को दूसरे राज्यों से प्याज मंगाना पड़ता है.
कोलकाता के बाजारों में प्याज की कीमतें पिछले दो हफ्तों में लगभग दोगुनी हो गई हैं. अगस्त के दूसरे हफ्ते में जहां प्याज 30-35 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वहीं सोमवार को ज्यादातर बाजारों में इसका भाव बढ़कर 60-65 रुपये प्रति किलो पहुंच गया. कारोबारियों के मुताबिक, पिछले साल अगस्त में भी कोलकाता के खुदरा बाजारों में प्याज 32-35 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा था.
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में इस साल प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी सामान्य से पहले शुरू हो गई है. कारोबारियों का कहना है कि अगर यही रफ्तार जारी रही तो दुर्गा पूजा और दिवाली के आसपास प्याज और महंगा हो सकता है. बंगाल में नदिया और मुर्शिदाबाद प्याज के प्रमुख उत्पादक जिले हैं. पिछले कुछ वर्षों में हुगली, पूर्व बर्दवान, पुरुलिया और मालदा के कुछ हिस्सों में भी प्याज की खेती बढ़ी है.
40 किलो प्याज की बोरी हुई महंगी
कोलकाता के कसबा इलाके के एक दुकानदार ने कहा कि अब 40 किलो प्याज की बोरी 2,300-2,500 रुपये में मिल रही है. करीब दो हफ्ते पहले इसी बोरी की कीमत 1,200-1,400 रुपये थी. एक बोरी में करीब 3-4 किलो प्याज खराब या छंटाई के बाद निकल जाता है. गड़ियाहाट, मानिकतला, बेहाला, लेक मार्केट और बेलेघाटा जैसे बड़े बाजारों के दुकानदारों के मुताबिक, अगस्त से अक्टूबर के बीच प्याज की कीमतों में अक्सर उतार-चढ़ाव रहता है. दिवाली तक भाव बढ़ने के बाद सामान्य सप्लाई शुरू होने पर कीमतों में धीरे-धीरे गिरावट आने लगती है.
बंगाल में खपत से 3 लाख टन कम प्याज का उत्पादन
राज्य के कृषि विपणन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, बंगाल में हर साल करीब 9 लाख टन प्याज का उत्पादन होता है, जबकि राज्य की खपत इससे करीब 3 लाख टन ज्यादा है. प्याज की कमी वाले सीजन में बंगाल को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान से प्याज मंगाना पड़ता है. अधिकारियों के मुताबिक, बंगाल में प्याज की खेती मुख्य रूप से सर्दियों में होती है. इससे पहले हुई भारी बारिश के कारण कई इलाकों में प्याज की खेती संभव नहीं हो पाती. यही वजह है कि राज्य में मांग और सप्लाई के बीच अंतर बना रहता है.
बंगाल में खरीफ प्याज की खेती नहीं
पश्चिम बंगाल में प्याज का उत्पादन और खपत का अंतर भले ही बहुत बड़ा न लगे, लेकिन मौसमी उत्पादन के कारण इसका असर ज्यादा होता है. राज्य में खरीफ सीजन में प्याज की खेती नहीं होती. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सर्दियों में उगाई गई प्याज की फसल की कटाई फरवरी के अंत से शुरू होती है और इसकी शेल्फ लाइफ करीब 90 से 100 दिन होती है.
सप्लाई घटते ही बढ़ती है प्याज की मांग
नदिया, हुगली और मुर्शिदाबाद के कुछ प्याज उत्पादकों के मुताबिक, स्थानीय बाजार में प्याज की सप्लाई जुलाई के मध्य से कम होने लगती है. इसी दौरान कुछ किसान बाद में ज्यादा कीमत मिलने की उम्मीद में प्याज को गोदामों में जमा कर लेते हैं. जब बाजार में प्याज की मांग और सप्लाई के बीच अंतर बढ़ता है, तो यही जमा किया गया स्टॉक बाद में बाजार में उतारा जाता है. इससे कीमतों में तेजी आने की संभावना बढ़ जाती है.