धान में ज्यादा यूरिया डालना पड़ सकता है भारी! किसान तुरंत बदलें ये आदत, वरना घटेगी पैदावार
Paddy Farming Tips: धान की अच्छी पैदावार के लिए ज्यादा यूरिया डालना जरूरी नहीं है. जरूरत से अधिक यूरिया फसल में रोग, कीट और कमजोर दानों की समस्या बढ़ा सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार ने किसानों को संतुलित खाद प्रबंधन अपनाने और सही मात्रा में उर्वरक इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
Paddy Farming: धान की अच्छी पैदावार के लिए कई किसान जरूरत से ज्यादा यूरिया का इस्तेमाल कर रहे हैं. किसानों को लगता है कि अधिक मात्रा में यूरिया डालने से फसल ज्यादा हरी-भरी होगी और उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह सोच गलत है. जरूरत से अधिक यूरिया का प्रयोग धान की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे पौधों में रोग और कीटों का प्रकोप बढ़ने के साथ ही दाने की गुणवत्ता और उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार ने किसानों को धान की खेती में संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है.
अधिक यूरिया से धान में बढ़ता है रोग और कीटों का खतरा
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार धान की फसल में नाइट्रोजन की अधिक मात्रा पौधों की प्राकृतिक वृद्धि को प्रभावित करती है. ज्यादा यूरिया डालने से पौधे जरूरत से ज्यादा बढ़ जाते हैं, लेकिन उनकी मजबूती कम हो जाती है. ऐसे पौधों में तना छेदक कीट, ब्राउन प्लांट हॉपर और अन्य रोगों का खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि अधिक यूरिया के कारण पौधों में हरियाली तो दिखाई देती है, लेकिन दानों का भराव कमजोर रह सकता है. इससे किसान को उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं मिल पाता है. इसलिए किसानों को केवल फसल की जरूरत के अनुसार ही यूरिया का प्रयोग करना चाहिए.
धान की फसल में इतनी मात्रा में डालें यूरिया
प्रमोद कुमार ने बताया कि धान की अच्छी पैदावार के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग जरूरी है. धान की एक हेक्टेयर फसल के लिए लगभग 110 से 120 किलोग्राम नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है. एक किलोग्राम यूरिया में करीब 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है. इस हिसाब से पूरे फसल चक्र में करीब 250 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होती है. उन्होंने कहा कि किसान एक एकड़ खेत में लगभग 100 किलोग्राम और एक कट्ठा भूमि में करीब 3 किलोग्राम यूरिया का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह पूरी फसल अवधि के लिए पर्याप्त मात्रा है. कई किसान एक ही खेत में बार-बार यूरिया डालते हैं, जिससे मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है और फसल पर इसका विपरीत असर पड़ता है.
संतुलित खाद से बढ़ेगी धान की गुणवत्ता
कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि धान की खेती में केवल यूरिया पर निर्भर रहना सही नहीं है. फसल को फॉस्फोरस और पोटाश की भी जरूरत होती है. संतुलित मात्रा में सभी पोषक तत्व मिलने से पौधे मजबूत होते हैं और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेत की मिट्टी की जांच के आधार पर खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करें. जरूरत के अनुसार सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी), पोटाश और अन्य पोषक तत्वों का प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और लंबे समय तक बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
वैज्ञानिक तरीके से खाद प्रबंधन अपनाने की सलाह
प्रमोद कुमार ने किसानों से अपील की है कि अधिक उत्पादन की लालच में यूरिया का अंधाधुंध इस्तेमाल न करें. अधिक यूरिया से लागत बढ़ने के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है. किसानों को समय पर और सही मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि संतुलित खाद प्रबंधन, उचित सिंचाई और समय-समय पर रोग नियंत्रण उपाय अपनाकर किसान धान की बेहतर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं. वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने से उत्पादन बढ़ेगा और फसल भी स्वस्थ रहेगी.