5 लाख एकड़ में DSR तकनीक से धान की खेती, किसानों को 1500 रुपये एकड़ मिलेगी मदद

पंजाब सरकार 2026-27 में 5 लाख एकड़ में DSR तकनीक बढ़ाएगी. राज्य में 156 फीसदी भूजल दोहन और 111 ओवरएक्सप्लॉइटेड ब्लॉक हैं. किसानों को 1,500 रुपये प्रति एकड़ सहायता और 40 करोड़ बजट मिलेगा. DSR से पानी, श्रम और बिजली की खपत कम होने की उम्मीद है.

नोएडा | Updated On: 27 May, 2026 | 09:16 AM

Paddy Cultivation: पंजाब सरकार ने राज्य में तेजी से गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए पानी की बचत करने वाली डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक को बढ़ावा देने का फैसला किया है. सरकार ने 2026-27 फसल सीजन में 5 लाख एकड़ कृषि भूमि को DSR के तहत लाने का लक्ष्य तय किया है. जानकारी के अनुसार, पंजाब में भूजल का दोहन उसकी सालाना पुनर्भरण क्षमता से कहीं अधिक हो रहा है. राज्य में हर साल जितना भूजल रिचार्ज होता है, उससे लगभग 156 प्रतिशत अधिक पानी निकाला जा रहा है. यही वजह है कि राज्य के 153 प्रशासनिक ब्लॉकों में से 111 ब्लॉक ‘ओवरएक्सप्लॉइटेड’ श्रेणी में आ चुके हैं, जहां भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है.

सरकार का मानना है कि DSR तकनीक अपनाने से धान की खेती में पानी की खपत कम होगी और भूजल संरक्षण में मदद मिलेगी. इसी उद्देश्य से आने वाले सीजन में बड़े स्तर पर किसानों को इस तकनीक से जोड़ने की योजना बनाई गई है. पंजाब सरकार किसानों को डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक अपनाने के लिए प्रति एकड़ 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता देगी. यह सहायता ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सीधे किसानों के खाते में दी जाएगी. सरकार ने आने वाले वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट भी तय किया है.

23,410 किसानों ने की थी सीधी बुवाई

वर्ष 2025-26 में 23,410 किसानों ने इस पानी बचाने वाली तकनीक को अपनाया था, जिनको कुल 35.38 करोड़ रुपये की सहायता दी गई थी. यह योजना राज्य सरकार की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भूजल संरक्षण  करना और पारंपरिक धान रोपाई पर निर्भरता कम करना है. विशेषज्ञों के अनुसार, DSR तकनीक से खेती करने पर पानी की खपत, श्रम लागत और बिजली की जरूरत पारंपरिक धान खेती की तुलना में काफी कम हो जाती है.

1 जून से शुरू होगी धान की बुवाई

ऐसे पंजाब में इस साल धान की रोपाई 1 जून से शुरू होगी, जबकि किसान 15 मई से धान की सीधी बुवाई (DSR) कर रहे हैं. बीते दिनों मुख्यमंत्री ने कहा था कि जो किसान सीधी बुवाई करेंगे, उन्हें 8 घंटे निर्बाध बिजली और नहरी पानी उपलब्ध कराया जाएगा. इसके साथ ही बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए राज्य को चार जोनों में बांटा गया है, ताकि खेती के दौरान व्यवस्था सुचारु रहे.

अतिरिक्त पानी की मांग नहीं है

जोन के अनुसार बुवाई का शेड्यूल तय किया गया है. पहला जोन 15 मई से 31 मई तक सीधी बुवाई के लिए है. दूसरा जोन 1 जून से शुरू होगा, जिसमें गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर, तरनतारन, रूपनगर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब और होशियारपुर शामिल हैं. तीसरा जोन 5 जून से फरीदकोट, फिरोजपुर, बठिंडा, मुक्तसर और फाजिल्का में लागू होगा. चौथा जोन 9 जून से लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, पटियाला, संगरूर, बरनाला, कपूरथला, जालंधर और शहीद भगत सिंह नगर में शुरू होगा. तब मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि इस बार हरियाणा ने अपने हिस्से का लगभग 70 प्रतिशत पानी उपयोग कर लिया है और अतिरिक्त पानी की मांग नहीं की गई है.

Published: 27 May, 2026 | 09:13 AM

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