पंजाब में बारिश का संकट, धान किसानों की बढ़ी लागत.. सिंचाई का खर्च 5 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंचा

पंजाब में कमजोर और अनियमित मॉनसून ने धान किसानों की चिंता बढ़ा दी है. बारिश की कमी से सिंचाई, डीजल और कीटनाशकों का खर्च बढ़ गया है, जबकि धान की पैदावार 10 से 20 फीसदी तक घटने की आशंका जताई जा रही है. पानी की कमी से दाने छोटे और कमजोर रहने का भी खतरा है.

नोएडा | Published: 7 Sep, 2026 | 07:34 AM

पंजाब में इस साल मॉनसून की बेरुखी ने धान किसानों की चिंता बढ़ा दी है. समय पर और पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों को खेतों में नमी बनाए रखने के लिए ट्यूबवेल और जनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है. इससे धान की खेती की लागत बढ़ गई है और पैदावार घटने का डर भी सताने लगा है. वहीं, बारिश की कमी के कारण किसानों को सिंचाई पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. गांवों में बिजली की सप्लाई बाधित होने से कई किसान डीजल इंजन चलाकर खेतों की सिंचाई कर रहे हैं. इससे प्रति एकड़ सिंचाई का खर्च करीब 3,000 रुपये से बढ़कर 5,000 रुपये तक पहुंच गया है.

सरकार की ओर से कृषि क्षेत्र को लगातार बिजली देने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में ओवरलोडिंग के कारण लंबे समय तक बिजली कटौती हो रही है. बिजली की अनियमित सप्लाई ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है. कृषि विशेषज्ञ राजिंदर पाल सिंह औलख ने ईटीवी भारत बताया कि सूखे मौसम के कारण धान की फसल में कीट और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. इस बार धान में तना छेदक, कैटरपिलर, ब्लाइट और स्कैब जैसी समस्याएं देखने को मिली हैं. आमतौर पर इनसे बचाव के लिए एक-दो बार कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव काफी होता है, लेकिन इस बार किसानों को 4 से 5 बार महंगी दवाओं का छिड़काव करना पड़ा. इससे किसानों पर प्रति एकड़ करीब 2,000 से 3,500 रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है.

पंजाब में कमजोर मॉनसून से धान की पैदावार घटने का डर

पंजाब में इस साल कमजोर मॉनसून का असर धान की पैदावार पर पड़ने की आशंका है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और कृषि विशेषज्ञ डॉ. सरदारा सिंह जौहल ने कहा कि शुरुआती आकलन के मुताबिक, मौसम की मार  से धान की पैदावार 10 से 20 फीसदी तक घट सकती है. यानी किसानों को प्रति एकड़ करीब 3 से 6 क्विंटल तक कम उत्पादन मिल सकता है. उन्होंने कहा कि अभी फसल का अंतिम आकलन करना जल्दबाजी होगी, लेकिन खेती की बढ़ी लागत से किसानों की आमदनी पर असर पड़ना तय है. तेज गर्मी और दाना बनने के समय पानी की कमी से धान में खाली दानों की संख्या बढ़ सकती है. किसानों के खेतों में धान की बालियों में खाली दाने पहले के मुकाबले ज्यादा दिखाई दे रहे हैं.

बढ़ी खेती लागत और घटती पैदावार से किसानों की आय पर संकट

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी की कमी से धान के दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए हैं. इससे दाने छोटे रह सकते हैं और मिलिंग के दौरान चावल टूटने की समस्या भी बढ़ सकती है. कमजोर मॉनसून ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. एक तरफ सिंचाई और कीटनाशकों का खर्च  बढ़ गया है, वहीं दूसरी तरफ पैदावार और आमदनी घटने का डर है. लगातार ट्यूबवेल चलने से पंजाब में भूजल स्तर पर भी दबाव बढ़ा है. किसान संगठनों ने सरकार से प्रभावित इलाकों का तत्काल सर्वे कराने की मांग की है. संगठनों का कहना है कि किसानों को बढ़ी खेती लागत और पैदावार में संभावित कमी के लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए.

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