राजस्थान में कुसुम की खेती का प्रयोग सफल, परंपरागत फसलें छोड़ रहे किसान, बीज-तेल और पंखुडियों से कमाई
Safflower Farming : कृषि वैज्ञानिक डॉ. भरतलाल मीना ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के प्रयासों से जिले में पहली बार कुसुम की खेती की शुरुआत की गई है. यह फसल कम पानी में तैयार होती है और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद फायदेमंद मानी जाती है. इसके बीज, तेल और फूलों की पंखुड़ियां तक महंगे दाम पर बिकती हैं.
परंपरागत फसलों की खेती छोड़कर किसान कैश क्रॉप और ज्यादा कमाई कराने वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. राजस्थान के सवाई माधोपुर में किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में पहली बार कुसुम की खेती करने में सफलता मिली है. कुसुम के तेल का इस्तेमाल खाना पकाने, दवाओं और ब्यूटी प्रोडक्ट में इस्तेमाल किया जाता है. इसीलिए यह तेल काफी महंगा बिकता है और किसानों को अच्छी कमाई होती है.
राजस्थान के सवाई माधोपुर के किसानों ने परंपरागत फसलों की बजाय मिट्टी की सेहत सुधारने वाली और कम सिंचाई में होने वाली कुसुम की फसल की खेती कर रहे हैं. कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. भरतलाल मीना ने मीडिया को बताया कि सवाई माधोपुर में पहली बार कुसुम की खेती की गई है, जिसमें सफलता मिली है. उन्होंने कहा कि जिले में किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है.
कृषि विज्ञान केंद्र के निर्देशन में किसानों ने उगाई कुसुम की फसल
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. भरतलाल मीना ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र के प्रयासों से अब जिले में पहली बार कुसुम यानी सैफ्लावर की खेती की शुरुआत की है. खास बात यह है कि यह फसल कम पानी में तैयार होती है और स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. शुष्क और कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त कुसुम की फसल अब सवाई माधोपुर में अपनी पहचान बना रही है. कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किए गए इस प्रयोग से किसानों को नई संभावनाएं मिल रही हैं.
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. भरतलाल मीना.
कई तरह की औषधीय खूबियों से लैस होता है तेल
कुसुम के बीजों में 25 से 45 फीसदी तक तेल पाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है. इसका तेल जहां खाद्य उपयोग में आता है, वहीं औद्योगिक कामों में भी इस्तेमाल किया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार कुसुम का तेल ओमेगा-6, ओलिक अम्ल और विटामिन-ई से भरपूर होता है, जो कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण, वजन संतुलन और त्वचा व बालों के लिए लाभकारी है. इसके फूलों की पंखुड़ियां औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं, जिनमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं.
एक एकड़ में 6 क्विंटल उत्पादन
कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि कुसुम की खासियत यह है कि यह फसल सूखा और ठंड दोनों को सहन कर सकती है, जिससे जोखिम कम होता है. आर्थिक रूप से भी यह फसल किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. एक हेक्टेयर से 75 से 100 किलो तक सूखी पंखुड़ियां मिलती हैं, जिनकी बाजार में 1500 रुपये प्रति किलो तक की अच्छी कीमत मिलती है. एक एकड़ में 6 क्विंटल बीजों का उत्पादन होता है, जिसमें 45 फीसदी तेल निकलता है. जबकि, बाकी खली के रूप में पशु चारे में इस्तेमाल की जाती है.