देशभर में मशहूर ये सफेद मक्का, GI टैग से बढ़ी पहचान.. आज भी सिर्फ देसी बीजों से होती है खेती

चंबा की सलूणी सफेद मक्का को जुलाई 2026 में जीआई टैग मिलने से किसानों में उत्साह बढ़ा है. इस बार 150 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में इसकी खेती हुई है. देसी बीजों से तैयार होने वाली यह मक्का स्वाद और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है. जीआई टैग से किसानों को देशभर में बेहतर बाजार, पहचान और उपज का अच्छा दाम मिलने की उम्मीद है.

नोएडा | Published: 31 Aug, 2026 | 05:02 PM

हिमाचल प्रदेश की पहचान अक्सर सेब की खेती से जुड़ी होती है, लेकिन राज्य में कई दूसरी पारंपरिक फसलें भी किसानों की आमदनी का जरिया हैं. चंबा जिले की सलूणी सफेद मक्का ऐसी ही खास फसल है, जो अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पारंपरिक पहचान के लिए जानी जाती है. इस मक्का को जुलाई 2026 में ज्योग्राफिकल इंडिकेशन टैग (जीआई टैग) मिला है. इससे सलूणी सफेद मक्का को देशभर में नई पहचान मिलने और किसानों को बेहतर बाजार व कीमत मिलने की उम्मीद बढ़ी है. जीआई टैग मिलने के बाद किसान इसकी खेती का रकबा बढ़ाने की तैयारी में भी हैं. इससे आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ सकती है.

चंबा जिले के सलूणी पारंपरिक सफेद मक्का को जीआई टैग मिलने के बाद किसानों में उत्साह  बढ़ा है. इस बार क्षेत्र में 150 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर सफेद मक्का की खेती की गई है. किसानों को उम्मीद है कि जीआई टैग मिलने से उनकी फसल को देशभर में पहचान मिलेगी और बेहतर बाजार भी उपलब्ध होंगे. ऐसे किसान सलूणी के भांदल, संघणी और लंगेरा समेत आसपास के इलाकों में सफेद मक्का की खेती करते हैं. किसानों के मुताबिक, इस बार पिछले साल की तुलना में खेती का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़े हैं. यहां के मक्के की मांग चंबा के अलावा हिमाचल के दूसरे जिलों, डमटाल और पठानकोट में भी रहती है.

देसी बीजों से होती है सफेद मक्का की खेती

सलूणी का सफेद मक्का अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पौष्टिकता के लिए लंबे समय से पहचानी जाती है. इसकी खासियत यह है कि किसान आज भी इसकी खेती पारंपरिक देसी बीजों से करते हैं. किसान इन बीजों को मिट्टी के बर्तनों में सुरक्षित रखते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता और शुद्धता बनी रहती है. किसानों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद सलूणी सफेद मक्का को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी. इससे बाजार बढ़ने के साथ किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है.

सलूणी सफेद मक्का की बुवाई का सही समय

सलूणी सफेद मक्का की खेती मुख्य रूप से खरीफ सीजन में की जाती है. इसकी बुवाई के लिए 15 जून से 10 जुलाई का समय सबसे अच्छा माना जाता है. किसान मॉनसून की पहली बारिश के बाद या सिंचाई की मदद से इसकी बुवाई कर सकते हैं. पर्याप्त सिंचाई सुविधा होने पर इसे रबी और जायद सीजन में भी उगाया जा सकता है.

रबी और जायद में भी कर सकते हैं खेती

रबी सीजन में सलूणी सफेद मक्का की बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है. वहीं, जायद सीजन में फरवरी से मार्च तक इसकी बुवाई की जा सकती है. हालांकि, इन दोनों सीजन में अच्छी फसल के लिए पर्याप्त सिंचाई की सुविधा होना जरूरी है.

सलूणी सफेद मक्का की खेती में तापमान और नमी का रखें ध्यान

सलूणी सफेद मक्का की अच्छी फसल के लिए बुवाई के समय मौसम और मिट्टी में पर्याप्त नमी होना जरूरी है. बीज के बेहतर अंकुरण के लिए 16 से 32 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल माना जाता है. बारिश के भरोसे खेती करने वाले किसानों को पर्याप्त बारिश के बाद ही बुवाई करने की सलाह दी जाती है.

15 जुलाई के बाद बुवाई से पैदावार पर असर

मिट्टी में नमी की जांच के लिए किसान उसे हाथ में दबाकर देख सकते हैं. अगर मिट्टी आसानी से एक साथ बंध जाए, तो उसमें पर्याप्त नमी मानी जाती है. वहीं, 15 जुलाई के बाद बुवाई करने पर पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, जिससे फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है. इसलिए किसानों को समय पर बुवाई करने की सलाह दी जाती है.

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