पराली केस: 6 के खिलाफ सख्त कार्रवाई, अब दो साल तक MSP पर नहीं बेच पाएंगे उपज
हरियाणा के यमुनानगर में पराली जलाने के मामलों में 6 किसानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है. किसानों के नाम ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर रेड एंट्री के साथ दर्ज किए गए हैं, जिससे वे अगले दो फसल सीजन तक MSP पर उपज नहीं बेच सकेंगे. प्रत्येक किसान पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.
Stubble Case: हरियाणा के यमुनानगर जिले में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने गेहूं की पराली जलाने के मामलों में 6 किसानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों की जमीन के रिकॉर्ड में सरकार के ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर रेड एंट्री दर्ज कर दी है. इसके चलते ये किसान अगले दो फसल सीजन तक मंडियों में अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नहीं बेच सकेंगे. इसके अलावा प्रत्येक किसान पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हरियाणा स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (HARSAC) से मिली रिपोर्ट के आधार पर इस वर्ष आग लगने की 19 सूचनाएं प्राप्त हुई थीं. जांच में इनमें से 5 मामले गलत अलर्ट निकले, जबकि 7 घटनाएं दुर्घटनावश हुई थीं. बाकी मामलों में पराली जलाने की पुष्टि होने पर संबंधित किसानों के खिलाफ कार्रवाई की गई.
18 मामलों में एफआईआर दर्ज
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष यमुनानगर जिले में पराली जलाने से जुड़े 36 अलर्ट मिले थे. इनमें से 18 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई थी और कुल 55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था. यमुनानगर के उप कृषि निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप डबास ने ‘द ट्रिब्यून’ को बताया कि जिन किसानों के नाम ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर रेड एंट्री के साथ दर्ज किए गए हैं, वे अगले दो फसल सीजन तक मंडियों में अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नहीं बेच सकेंगे. उन्होंने कहा कि मंडियों में फसल की एंट्री इसी पोर्टल से जुड़ी हुई है, इसलिए रेड एंट्री वाले किसानों पर प्रतिबंध लागू रहेगा.
मिट्टी की सेहत बेहतर होती है
डॉ. डबास ने कहा कि कृषि विभाग लगातार किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक कर रहा है. विभाग किसानों को फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने और उन्हें खेतों में उपयोग करने के लिए भी प्रेरित कर रहा है, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे. डॉ. आदित्य प्रताप डबास ने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता पर बुरा असर पड़ता है और मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों का सही तरीके से प्रबंधन करने से मिट्टी की सेहत बेहतर होती है और वायु प्रदूषण भी कम होता है.
अभी तक 3,355 मामले सामने आए
वहीं, बीते दिनों खबर सामने आई थी कि हरियाणा में इस बार गेहूं कटाई के सीजन के दौरान खेतों में आग लगाने के मामलों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. राज्य में पराली और फसल अवशेष जलाने की घटनाएं पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई हैं. इससे पर्यावरण प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ गई है और प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है. आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक खेतों में आग लगने के 3,355 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 2025 में इसी अवधि में यह संख्या 1,745 थी. यानी सिर्फ एक साल में 1,610 मामलों की बढ़ोतरी हुई है, जो करीब 92 प्रतिशत अधिक है.