Parali Management: आने वाले धान कटाई सीजन को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त तैयारी शुरू कर दी है. हर साल सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में पराली जलाने से प्रदूषण काफी बढ़ जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में खास निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं. ये निर्देश शुक्रवार को कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट अधिनियम, 2021 की धारा 12 के तहत आयोजित एक वर्चुअल बैठक में जारी किए गए. इस बैठक में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियों पर चर्चा की गई.
आयोग का कहना है कि अगर शुरुआत से ही पराली जलाने पर नियंत्रण किया जाए, तो सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसलिए प्रशासन और संबंधित विभागों को पहले से सतर्क रहने और किसानों को जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है.
हर खेत की होगी मैपिंग
आयोग ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि गांव और खेत स्तर तक पूरी मैपिंग तैयार की जाए. इसमें यह जानकारी जुटाई जाएगी कि किस इलाके में कौन-सी फसल उगाई जा रही है, फसल के बचे अवशेष का प्रबंधन कैसे किया जा रहा है और किन किसानों द्वारा पराली का इस्तेमाल चारे या दूसरे कामों में किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि किसान पराली जलाने के बजाय उसका दूसरे तरीकों से उपयोग करें, ताकि प्रदूषण कम हो सके.
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किसानों की निगरानी के लिए तैनात होंगे नोडल अधिकारी
नई व्यवस्था के तहत हर नोडल अधिकारी को ज्यादा से ज्यादा 100 किसानों की जिम्मेदारी दी जाएगी. वहीं जिन गांवों को पराली जलाने के मामले में ज्यादा संवेदनशील माना गया है, वहां निगरानी और कड़ी रहेगी. ऐसे हॉटस्पॉट गांवों में एक अधिकारी सिर्फ 50 किसानों की देखरेख करेगा. ये अधिकारी किसानों के लगातार संपर्क में रहेंगे और उन्हें पराली न जलाने तथा उसके सही प्रबंधन के तरीकों के बारे में जागरूक करेंगे.
रात में बढ़ेगी खेतों की गश्त
आयोग ने यह भी माना है कि कई किसान सैटेलाइट निगरानी से बचने के लिए देर रात पराली जलाते हैं. इसी वजह से राज्यों को शाम और रात के समय खेतों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष ‘पराली सुरक्षा बल’ बनाने की योजना तैयार की गई है, जिसमें पुलिस, कृषि विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया जाएगा.
मशीनों की उपलब्धता पर जोर
फसल अवशेष प्रबंधन को आसान बनाने के लिए आयोग ने सीआरएम मशीनों की समीक्षा करने को कहा है. राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि पुरानी और खराब मशीनों को हटाकर अगस्त दो हजार छब्बीस तक नई मशीनों की खरीद पूरी की जाए. साथ ही छोटे और सीमांत किसानों की मदद के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां किसानों को मशीनें बिना किराए या कम लागत पर उपलब्ध कराई जा सकें.
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
आयोग ने साफ किया है कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. नियमों का उल्लंघन करने वालों के भूमि रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ दर्ज की जाएगी और उनसे पर्यावरणीय मुआवजा भी वसूला जाएगा. इसके अलावा राज्यों को हर महीने आयोग को प्रगति रिपोर्ट भेजनी होगी ताकि पूरी योजना की लगातार निगरानी हो सके.
प्रदूषण रोकने की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर में होने वाले गंभीर वायु प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है. साथ ही किसानों को नई तकनीकों और पराली के वैकल्पिक उपयोग के तरीकों से जोड़कर खेती को ज्यादा बेहतर और टिकाऊ बनाने में भी मदद मिलेगी.