तमिलनाडु में धान खरीद ने बनाया नया रिकॉर्ड, 64 लाख टन के पार पहुंचा आंकड़ा.. किसानों की बंपर कमाई

तमिलनाडु में 2025-26 के दौरान रिकॉर्ड 64.2 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है. 2026-27 खरीफ सीजन के लिए सरकारी खरीद 1 सितंबर से शुरू होगी. राज्य सरकार ने धान पर इंसेंटिव बढ़ाया है. फाइन वैरायटी पर किसानों को 2,750 और सामान्य धान पर 2,600 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे. ज्यादा खरीद से चावल का अतिरिक्त स्टॉक तैयार होगा.

नोएडा | Published: 31 Aug, 2026 | 11:49 AM

तमिलनाडु में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए धान खरीद ने नया रिकॉर्ड बनाया है. 2025-26 में राज्य में 64.2 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया, जो अब तक का सबसे ज्यादा है. इससे पहले 2024-25 में 47.98 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी. इस तरह पिछले साल के मुकाबले इस बार धान खरीद में 16.22 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हुई है. तमिलनाडु सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन (TNCSC) और उसकी अधिकृत एजेंसी नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) ने किसानों से यह धान खरीदा. यह खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) की ओर से की गई और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत भुगतान किया गया.

तमिलनाडु में 2026-27 खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए धान की सरकारी खरीद 1 सितंबर से शुरू होगी. केंद्र सरकार ने संशोधित न्यूनतम समर्थन मूल्य  (MSP) पर धान खरीद की मंजूरी दे दी है. नया MSP भी 1 सितंबर से लागू होगा. पिछले साल केंद्र की आपत्ति के बावजूद तमिलनाडु सरकार ने MSP के ऊपर किसानों को मिलने वाले प्रोत्साहन (इंसेंटिव) में बढ़ोतरी की थी. मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 10 अगस्त को धान खरीद पर इंसेंटिव बढ़ाने का ऐलान किया. इसके तहत अच्छी क्वालिटी वाली धान की किस्म पर इंसेंटिव 156 रुपये से बढ़ाकर 289 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया. वहीं, सामान्य किस्म के धान पर इंसेंटिव 131 रुपये से बढ़ाकर 159 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है.

फाइन धान पर 2,750, सामान्य पर 2,600 रुपये मिलेगा रेट

इंसेंटिव बढ़ने के बाद किसानों को अच्छी किस्म के धान के लिए कुल 2,750 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के धान के लिए 2,600 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे. तमिलनाडु सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन (TNCSC) की मैनेजिंग डायरेक्टर शिल्पा प्रभाकर सतीश ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि राज्य में धान की ज्यादा खरीद की मुख्य वजह गारंटीड MSP और बांधों से समय पर पानी छोड़ा जाना है. उन्होंने कहा कि MSP बढ़ने से किसानों के लिए सरकारी खरीद केंद्रों पर धान बेचना ज्यादा फायदेमंद हो गया है.

अनुकूल मौसम से बढ़ा धान का रकबा

उन्होंने बताया कि अनुकूल मौसम के कारण राज्य में धान की खेती का रकबा भी बढ़ा है. इससे धान की सरकारी खरीद में तेजी आई. अधिक खरीद के कारण अब FCI की जरूरत से ज्यादा चावल का उत्पादन हुआ है. अतिरिक्त चावल को भविष्य में इस्तेमाल के लिए स्टोर किया जाएगा. TNCSC के मुताबिक, ज्यादा धान खरीदने से राज्य को चावल खरीदने पर होने वाला खर्च भी कम करने में मदद मिलेगी.

तमिलनाडु में जरूरत से ज्यादा चावल का उत्पादन

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय खाद्य निगम (FCI) सार्वजनिक वितरण प्रणाली  (PDS) के तहत हर महीने करीब 2.78 लाख मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराता है. इसके अलावा, तमिलनाडु सरकार केंद्र से करीब 1 लाख मीट्रिक टन चावल 23.20 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदती है. तमिलनाडु को PDS के लिए हर साल करीब 33.36 लाख मीट्रिक टन चावल की जरूरत होती है. वहीं, इस साल राज्य में 64.2 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है. इससे करीब 42.44 लाख मीट्रिक टन चावल मिलने का अनुमान है. यानी राज्य की सालाना जरूरत से ज्यादा चावल उपलब्ध होने की उम्मीद है.

फाइन वैरायटी के धान पर ज्यादा इंसेंटिव

20 अगस्त को मंत्री पी. वेंकटरामनन ने अच्छी किस्म के धान पर ज्यादा इंसेंटिव देने के फैसले का बचाव किया. उन्होंने बताया कि TNCSC की कुल धान खरीद में करीब 60 फीसदी हिस्सा अच्छी किस्म (फाइन वैरायटी) का है. मंत्री के मुताबिक, फाइन वैरायटी का चावल सामान्य किस्म के चावल से बेहतर गुणवत्ता वाला होता है. उन्होंने कहा कि सरकार उचित मूल्य की दुकानों (Fair Price Shops) के जरिए लोगों को बेहतर गुणवत्ता वाला चावल उपलब्ध कराने की योजना बना रही है.

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