तेलंगाना में धान की खेती प्रभावित, 24 फीसदी कम रकबे में बुवाई.. पैदावार पर मंडराया संकट

तेलंगाना में बारिश की कमी से खरीफ फसलों की खेती प्रभावित हुई है. 25 अगस्त तक धान का रकबा लक्ष्य से 24.02 फीसदी कम रहा. राज्य में 28.68 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है. कृषि विभाग को धान उत्पादन घटने की आशंका है. किसानों को पानी बचाने के लिए कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें अपनाने की सलाह दी गई है.

नोएडा | Published: 27 Aug, 2026 | 02:44 PM

तेलंगाना में खरीफ की प्रमुख फसल धान की खेती इस बार लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है. कृषि विभाग के मुताबिक, 25 अगस्त तक 50,11,417 एकड़ में धान की खेती हुई है, जबकि सरकार ने 65,95,645 एकड़ का लक्ष्य रखा था. इस तरह धान का रकबा लक्ष्य से 24.02 फीसदी कम है. कृषि विभाग का कहना है कि किसानों के पास अगस्त के अंत तक धान की रोपाई करने का समय है, लेकिन मौजूदा बारिश की स्थिति को देखते हुए रकबे में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद कम है. महीने के अंत तक मौसम के शुष्क रहने की संभावना है, जिससे धान की आगे की खेती प्रभावित हो सकती है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना में बारिश की कमी के कारण धान की खेती का रकबा बढ़ने की संभावना कम हो गई है. अधिकारियों को उम्मीद थी कि बारिश शुरू होने और रोपाई के लिए पानी मिलने के बाद धान की खेती  तेजी से बढ़ेगी. लेकिन राज्य के कई हिस्सों में जारी सूखे जैसे हालात ने इस उम्मीद को कमजोर कर दिया है. इस खरीफ सीजन में तेलंगाना में बारिश सामान्य से कम रही है. मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक राज्य में 28.68 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है. राज्य के 15 जिलों और 266 मंडलों में सामान्य से कम बारिश हुई है. अधिकारियों का कहना है कि अगस्त के अंत तक सूखे की स्थिति बनी रही तो धान की खेती का रकबा बढ़ाना मुश्किल होगा. इससे सीजन के बाकी समय में फसल क्षेत्र बढ़ने को लेकर चिंता बढ़ गई है.

तेलंगाना में 89.62 फीसदी खरीफ बुवाई पूरी

तेलंगाना के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश होने का असर खरीफ फसलों पर पड़ रहा है. कम बारिश वाले जिलों में आदिलाबाद, वारंगल, हनमकोंडा, महबूबाबाद, जंगांव, खम्मम, भद्राद्री कोठागुडेम, मेदचल-मलकाजगिरी, नारायणपेट, नागरकुरनूल, वानापर्थी, जोगुलाम्बा गडवाल, नलगोंडा, सूर्यापेट और यादाद्री भुवनगिरी शामिल हैं. अधिकारी के मुताबिक, 2025 के खरीफ सीजन में तेलंगाना में करीब 67.57 से 69.89 लाख एकड़ में धान की खेती हुई थी और करीब 148 लाख टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था. इस साल बारिश की कमी के कारण धान का उत्पादन काफी घटने की आशंका है. कृषि विभाग की सरकार को भेजी गई ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में अब तक 1,18,63,969 एकड़ में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है. यह कुल निर्धारित लक्ष्य 1,32,38,446 एकड़ का 89.62 फीसदी है.

धान के साथ गन्ने और अरंडी की खेती भी घटने की आशंका

तेलंगाना में बारिश की कमी का असर धान के साथ दूसरी पानी की ज्यादा जरूरत वाली फसलों पर भी पड़ सकता है. इस सीजन में अरंडी और गन्ने की खेती में 25 से 48 फीसदी तक गिरावट आने की संभावना है. वहीं, ज्वार, मक्का, अरहर और सोयाबीन जैसी कम पानी में होने वाली बारिश आधारित फसलों का उत्पादन सामान्य रहने की उम्मीद है. अधिकारी के मुताबिक, बारिश आधारित फसलों की बुवाई की अंतिम समय सीमा लगभग खत्म हो गई है. दालों और कपास की बुवाई पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले बढ़ी है. ज्यादातर फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि धान की रोपाई और सीधी बुवाई अभी जारी है. खेतों में खाद डालने और कीट नियंत्रण जैसे काम भी चल रहे हैं.

पानी बचाने के लिए धान का रकबा घटाने की सलाह

कृषि विभाग ने किसानों को धान की खेती का कुछ हिस्सा कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों में बदलने की सलाह दी है. विभाग के मुताबिक, IMD के पूर्वानुमान में अल नीनो का बारिश के पैटर्न पर लंबे समय तक असर पड़ने की संभावना जताई गई है. ऐसे में वैकल्पिक फसलों से मौसम संबंधी जोखिम कम करने और पानी बचाने में मदद मिल सकती है.

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